पत्थरबाज़ का अंत
पत्थरबाज़ का अंत
टाइटल: पत्थरबाज़ का खौफनाक अंत शहर की ऊंची इमारतों के नीचे बसी तंग गलियों में मौत का सन्नाटा पसरा हुआ था। साल 1980 के उस दौर की यादें आज भी लोगों को कँपकँपा देती हैं, जब रात के अंधेरे में एक साया निकलता था। उसे दुनिया 'पत्थरबाज़' (Stoneman) कहती थी। उसका शिकार वो बेगुनाह मजदूर होते थे जो दिन भर की थकान के बाद फुटपाथ पर गहरी नींद सो जाते थे। वह आता, एक भारी पत्थर से उनके सिर पर वार करता और बिना कोई निशान छोड़े गायब हो जाता। पुलिस परेशान थी और लोग 'गधों' की तरह इसे किसी शैतान का साया मानकर ताबीज और टोटकों के पीछे भाग रहे थे। आर्यन और रिया इसी रहस्य की तलाश में शहर की एक पुरानी सराय में ठहरे हुए थे। रिया खिड़की से बाहर देखते हुए बोली, "आर्यन, आज फिर किसी की जान चली गई। लोग कह रहे हैं कि वह पत्थरबाज़ कोई इंसान नहीं, बल्कि एक रूह है जो दीवारों के आर-पार जा सकती है।" आर्यन ने अपनी मेज पर रखी उस जादुई अंगूठी को देखा, जो उसके पिता की विरासत थी। अंगूठी की नीली चमक आज कुछ ज्यादा ही तेज थी, जो किसी बड़े खतरे का संकेत दे रही थी। आर्यन ने शांत स्वर में कहा, "रिया, पत्थर कभी हवा में खुद नहीं चलते, उन्हें कोई उठाता है। चाहे वह रूह हो या इंसान, आज रात उसकी असलियत सामने आकर रहेगी।" आधी रात का वक्त था। आर्यन और रिया एक अंधेरी गली के कोने में छिपे थे। तभी उन्हें एक भारी कदम की आहट सुनाई दी। एक विशालकाय परछाईं, जो करीब सात फीट ऊंची लग रही थी, एक भारी पत्थर घसीटते हुए एक सोते हुए मजदूर की तरफ बढ़ी। जैसे ही उस साये ने पत्थर को दोनों हाथों से ऊपर उठाया, रिया की चीख निकल गई। लेकिन आर्यन ने पलक झपकते ही अपनी अंगूठी वाली मुट्ठी उसकी तरफ तान दी। अचानक, वह भारी पत्थर हवा में ही जम गया, जैसे किसी अदृश्य जंजीर ने उसे जकड़ लिया हो। वह साया पलटा, उसकी आँखें कोयले की तरह काली और धंसी हुई थीं। वह कोई साधारण इंसान नहीं था, बल्कि एक 'तामसिक शक्ति' से वश में किया गया एक अघोरी था, जिसे किसी ने शहर में दहशत फैलाने के लिए तैयार किया था। वह अपनी पूरी ताकत से पत्थर को नीचे गिराने की कोशिश कर रहा था, लेकिन आर्यन की अंगूठी से निकलने वाली नीली किरणों ने एक अभेद्य कवच बना दिया था। आर्यन ने गरजते हुए कहा, "तेरा खेल खत्म हुआ! पत्थरों के पीछे छिपकर वार करना कायरों का काम है।" आर्यन ने अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर उस भारी पत्थर को ही रेत की तरह बिखेर दिया। वह साया जैसे ही आर्यन पर झपटा, आर्यन ने अपनी अंगूठी की शक्ति से उसे ज़मीन पर पटक दिया। जैसे-जैसे अंगूठी की रोशनी बढ़ी, उस साये के भीतर छिपी काली रूह जलने लगी। वह चिल्लाता हुआ धुएं में बदल गया और पीछे छोड़ गया उस अपराधी का चेहरा, जो बरसों से तंत्र-मंत्र की आड़ में यह खूनी खेल खेल रहा था। अगली सुबह, पुलिस ने उस खंडहर से कई सबूत बरामद किए। शहर ने राहत की सांस ली। लोगों को समझ आया कि जिसे वे भूत समझ रहे थे, वह दरअसल इंसानी लालच और पागलपन का नतीजा था। रिया ने आर्यन की तरफ गर्व से देखा और आर्यन ने मुस्कुराते हुए अपनी अंगूठी को फिर से संभाल लिया।

