नेट पर लगाई यारी
नेट पर लगाई यारी
रात के ठीक बारह बजे पूरा शहर अचानक घने अंधेरे में डूब गया। मोबाइल की स्क्रीन पर जो नेटवर्क की डंडियाँ दिखती थीं, वे पूरी तरह गायब हो चुकी थीं। वाई-फाई के राउटर की हरी बत्तियाँ हमेशा के लिए बुझ गईं। पूरी दुनिया का इंटरनेट क्रैश हो चुका था, पर कमरे में बैठे आर्यन को इसकी खबर नहीं थी। वह तो बस बार-बार रिया की चैट विंडो को रीफ्रेश किए जा रहा था, जहाँ अब 'कनेक्टिंग...' के अलावा कुछ नहीं दिख रहा था। आर्यन और रिया कभी असल जिंदगी में नहीं मिले थे। दोनों की मुलाकात इंटरनेट पर एक स्टोरी प्लेटफॉर्म के जरिए हुई थी। फिर सोशल मीडिया पर चैटिंग शुरू हुई और धीरे-धीरे दोनों की दुनिया सिर्फ एक-दूसरे की स्क्रीन पर सिमट कर रह गई। आर्यन अक्सर चैट पर रिया से मिन्नतें करता था, "रिया, प्लीज़ एक बार मिल लो ना। इस इंटरनेट का क्या भरोसा, यह कब ठप पड़ जाए कुछ पता नहीं।" पर रिया हमेशा हँसकर बात टाल देती, "अरे बाबा, अभी बहुत काम है, टाइम ही नहीं मिलता। कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ, यहीं तो हूँ स्क्रीन पर।" सुबह होते-होते पूरे देश में हाहाकार मच गया। टीवी पर खबरें आने लगीं कि ग्लोबल सर्वर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और इंटरनेट का वापस आना अब नामुमकिन है। लोग सड़कों पर परेशान घूम रहे थे, डिजिटल काम रुक गए थे, सब कुछ थम गया था। लेकिन आर्यन को इस दुनिया की कोई परवाह नहीं थी। वह पागलों की तरह अपने फोन को देख रहा था, जहाँ रिया की सिर्फ दो तस्वीरें और कुछ वॉयस नोट्स बचे थे जो ऑफलाइन प्ले हो सकते थे। आर्यन ने फोन कान से लगाया। रिया की पुरानी रिकॉर्डेड आवाज़ गूँजी—*"आर्यन, जब हमारे शहर में बारिश होती है ना, तो मैं अपनी बालकनी से सामने वाले पुराने क्लॉक टॉवर को देखती हूँ। मुझे वो पुराना वक़्त बहुत पसंद है।"* आर्यन की आँखें भीग गईं। उसने फोन को कसकर छाती से लगा लिया। बिना गूगल मैप के, हज़ारों किलोमीटर दूर किसी को ढूंढना एक सीरियस पागलपन था। लेकिन आर्यन का दिल हार मानने को तैयार नहीं था। उसने एक छोटा सा बैग पैक किया, बाइक की चाबी उठाई और रिया के बताए उस इकलौते सुराग—उस 'क्लॉक टॉवर' वाले शहर की तरफ निकल पड़ा। सफर आसान नहीं था। अब रास्ता बताने वाला कोई ऑनलाइन मैप नहीं था। आर्यन हर चौराहे पर रुककर, लोगों से पूछकर आगे बढ़ रहा था। दो दिन और दो रातें लगातार बाइक चलाने के बाद, आर्यन आखिरकार उस अनजान शहर की सीमा में दाखिल हुआ। रात हो चुकी थी और आसमान में काले बादल छाए हुए थे। आर्यन ने अपनी बाइक एक सुनसान सड़क के किनारे रोकी। उसका शरीर बुरी तरह थक चुका था, आँखें लाल थीं और दिल में एक अजीब सा डर बैठ रहा था कि क्या वह कभी रिया को ढूंढ पाएगा? वह एक ऊंचे चबूतरे पर बैठ गया और आसमान की तरफ देखने लगा, जहाँ बादलों के बीच एकाध तारा मुश्किल से दिख रहा था। तभी उसके दिमाग में रिया की कही एक और बात गूंजी। आर्यन के होंठ कांपे और उसने अकेले में बुदबुदाते हुए कहा, "रिया... तुमने कहा था ना कि अगर कभी हम दूर भी हो गए, तो एक ही आसमान के नीचे रहेंगे। पर मुझसे अब अकेले रातों को ये तारे नहीं गिने जाएंगे। मुझे तुम चाहिए, सच में तुम चाहिए।" अगली सुबह, आर्यन शहर के बीचों-बीच बने उस पुराने क्लॉक टॉवर के पास पहुँचा। वह वहीं पास की एक चाय की दुकान पर बैठ गया और हर आने-जाने वाले चेहरे को गौर से देखने लगा। दोपहर से शाम होने को आई, पर कोई फायदा नहीं हुआ। आर्यन की उम्मीदें धीरे-धीरे टूट रही थीं। वह अपनी बाइक के पास आया और उसे स्टार्ट करने ही वाला था कि अचानक मौसम ने करवट ली। ठंडी हवाएं चलने लगीं और बारिश शुरू हो गई। तभी आर्यन को रिया का वही वॉयस नोट याद आया—*"जब यहाँ बारिश होती है ना, तो मैं बालकनी से सामने वाले पुराने क्लॉक टॉवर को देखती हूँ..."* आर्यन ने तुरंत बाइक बंद की और अपनी नज़रें सामने की इमारतों की बालकनियों पर घुमानी शुरू कीं। और तभी, क्लॉक टॉवर के ठीक सामने वाली तीसरी मंजिल की एक बालकनी का दरवाज़ा खुला। एक लड़की हाथ में चाय का कप लिए बाहर आई और रेलिंग के पास खड़ी होकर बारिश को देखने लगी। बारिश की बूंदों के बीच से भी आर्यन को वह चेहरा साफ पहचान में आ गया। वह हूबहू उसकी गैलरी वाली तस्वीर जैसी थी। वह रिया थी। आर्यन के पैर जैसे ज़मीन से उठ गए। उसने नीचे से ही पूरी ताकत से चिल्लाया, "रिया!!" बालकनी में खड़ी लड़की ने चौंककर नीचे देखा। नीचे एक लड़का पूरी तरह भीगा हुआ, उसकी तरफ देख रहा था। रिया ने अपनी आँखें मलीं, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जो इंसान सिर्फ उसकी स्क्रीन पर एक नाम था, वह आज उसके घर के नीचे खड़ा था। वह तुरंत बालकनी से पीछे हटी और सीढ़ियों की तरफ भागी। आर्यन भी बिल्डिंग के गेट की तरफ दौड़ा। जब दोनों बिल्डिंग के नीचे उस छोटे से बरामदे में एक-दूसरे के सामने आए, तो कुछ पलों के लिए दोनों के बीच सन्नाटा छा गया। कोई भारी डायलॉग नहीं था, सिर्फ उनकी भारी होती सांसें और आँखों से लगातार बहते आंसू सब कुछ बयां कर रहे थे। दोनों की कांपती उंगलियाँ और एक-दूसरे को खो देने का वह पुराना डर साफ दिख रहा था। रिया ने रोते हुए मुस्कुराकर कहा, "तुम सच में आ गए? बिना किसी एड्रेस के... बिना इंटरनेट के? मैं तो हमेशा टाइम ना होने का बहाना बनाती रही..." आर्यन ने आगे बढ़कर उसका हाथ थाम लिया और बोला, "मैंने कहा था ना रिया, इंटरनेट उड़ सकता है, हमारी प्रोफाइल गायब हो सकती है, पर जो यारी दिल से लगी हो, उसे कोई नेटवर्क नहीं रोक सकता। अच्छा हुआ मैं वक़्त रहते आ गया।" बारिश बाहर तेज़ हो रही थी, पर उस छोटे से बरामदे में दो ऑनलाइन अजनबी हमेशा के लिए एक-दूसरे का मुकम्मल सच बन चुके थे। ### **सुखविंदर की कलम से...**✍️ > "भाइयों, आजकल हम सब ऑनलाइन वाला प्यार तो बड़े मजे से कर रहे हैं, लेकिन मेरी एक बात हमेशा याद रखना। अपनी जो बंदियां हैं ना, उनसे वक़्त निकाल कर एक बार असल जिंदगी में मिल लो। इस इंटरनेट का कोई भरोसा नहीं है कि यह कब ठप पड़ जाए और कब पूरी तरह उड़ जाए। डिजिटल दुनिया की इस पतली डोर के भरोसे मत बैठो; इससे पहले कि नेटवर्क गायब हो जाए, अपनी मोहब्बत का हाथ असल दुनिया में थाम लो।" >

