पति का कहना भाई से दूर रहना
पति का कहना भाई से दूर रहना
रितु की शादी को काफी साल हो गए थे। हर बार रक्षाबंधन पर भाई पहुच जाता था।लेकिन इस बार कुछ ऐसा मन मुटाव हो गया रितु के पति से की शिखर ने कहा कि अपने भाइयों से बात नही करना है ।सबको ब्लॉक करो।रितु डर बस ब्लॉक तो कर दी लेकिन अंदर ही अंदर घुट रही है।
अगर यही बात रितु कहती कि अपने सारे सगे सम्बंधियों से रिश्ता खत्म कर दो ?
क्या शिखर छोड़ता ,
नही बिल्कुल नहीं। छोड़ पाता। जब शिखर को रितु ने बोला कि स्वर्णिम से रिश्ता खत्म हो गया।तो इसपर जबाब तो आ गया हाँ -लेकिन उसी के टेन्शन में सुबह से पड़ा रहा शिखर और साथ में घर का माहौल भी खराब हो गया।
सोचने वाली बात है रितु से मायके का हर रिश्ता खत्म कराया जा रहा है और खुद जो इनलीगल रिश्ता बना है उसके लिए परेशान है।
अब रितु सोच रही है यदि मायका जाती हूँ।तब भी टेन्शन है और घर पर बुला नही सकती।
अब रितु क्या करे ?
बहुत परेशान और दुखी है।
सब भगवान पर छोड़कर बैठी है।और भगवान से रो रही है।
हे प्रभु-इस समस्या का कोई तो हल होगा।
कि मैं अपने भाईयों को राखी बांध सकूँ।
अब रितु को कल का इंतज़ार है ।कि क्या और कैसे होगा।रितु घर मे अपनी सभी बहनों की अपेक्षा सबसे परेशान रहती थी। क्योंकि उसकी जिंदगी में हर समय रोक टोक लगा रहता है।
रितु कभी अपनी तकदीर को कोसती तो कभी माँ पिता को, कि मैं बचपन से ही दुख पाती आ रही हूँ।अब तक तो ये ििइन्तजार था कि शादी के बाद अच्छा घर परिवार ,मिलेगा सब ठीक होगा।
लेकिन रितु की ये उम्मीद भी सफल न रही।सारी बहने जो आस पास में रहती थी ओ रक्षाबंधन पर राखी बांधने आती थी।तो लोग पूछते थे कि रितु क्यों नही आती। माँ बहाना लगाती की उसकी नंद आयी थी इसलिये नहीं आ पाती।
माँ तो बेटी की इज्ज़त बनाने में ही पड़ी रहती थी। माँ को इतना कुछ पता नही रहता था।तो जो रितु बता देती वही माँ बोल देती थी।अब रितु के दिल से कोई पूछे क्या दिल पर बीत रही थी।
रितु को बस कल का इंतज़ार है ईश्वर करें रितु का भी सभी बहनो की तरह उसका भी ये रक्षाबंधन अच्छे से निभ जाए।भगवान जैसे पूरी दुनिया को खुश रखते हो ठीक उसी तरह रितु का भी रक्षाबंधन और भाई बहन का प्यार मिले।
शेष अगला भाग -"खुशी रीतु की"।
