परिवर्तन
परिवर्तन
खिड़की से झांकती हुई माला सोच रही थी की जीवन में कितना परिवर्तन आ गया है समय के साथ। जैसे अतीत में खो गई हो माला, वो दो कमरों का छोटा सा मकान चूल्हा फूंकती हुई माँ और परीक्षा की तैयारी करता छोटा भाई। बाबूजी एक प्राइवेट कंपनी में साधारण सी नौकरी करते थे लेकिन अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना चाहते थे। इसके लिए वो दिन रात मेहनत करते थे। उनका मानना था की केवल शिक्षा ही हमें गरीबी से मुक्त करा सकती है। बेटे और बेटी में वो कोई भी भेद नहीं करते थे। दोनों को ही अच्छे स्कूल में पढ़ाते थे बल्कि लड़कियों की शिक्षा पर वो ज्यादा जोर देते थे।"लड़कियों को अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए जिससे वो हर परिस्थिति में अपनी रक्षा कर सकें" कहते थे बाबूजी। ये बाबूजी की मेहनत का ही फल था की छोटा भाई आई आई टी में चयनित हो गया था। माला अपनी स्नातकीय परीक्षा दे चुकी थी और आई ऐ एस की तैयारी में जुटी हुई थी। पहले प्रयत्न में असफलता हाथ लगी पर बाबूजी हमेशा उत्साहित करते रहे।"बेटा कोई बात नहीं प्रयत्न करते रहो"बाबूजी धीरज बढ़ाते रहते। आखिरकार दूसरे प्रयत्न में माला को सफलता हाथ लग ही गई और उसका नाम टॉप के बच्चों में आ गया।
बाबूजी की ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं था। माला ने नौकरी ज्वाइन कर ली थी। बाबूजी दिन रात मेहनत करते करते बहुत कमजोर हो चुके थे। माला के कहने के बावजूद भी वो काम करना नहीं छोड़ रहे थे। माला सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए संयुक्त सचिव के पद तक पहुँच चुकी थी। बंगला गाड़ी नौकर चाकर सब थे उसके पास। कहाँ वो गरीबी में कटे हुए दिन कहाँ आज ये सुख कितना परिवर्तन आ गया है जीवन में सोचती हुई माला जैसे वर्तमान में लौट आई "जीवन में परिवर्तन लाने के लिए संघर्ष से गुजरना पड़ता है केवल अपने वर्तमान को कोसने से काम नहीं बनता है "माला ने अपने आप से कहा।
