Shantak Singh

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4.0  

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परिवार-प्रेम

परिवार-प्रेम

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जब किताबें थीं अपने हाथों में, तब लगता था खुद के हैं हम, जब से लैपटॉप पर काम करना शुरू किया है ऐसे लगता है किसी दूसरे के हो गये हैं हम । इसलिए सोचा विचारों को एक आकार दें, शब्दों को एक आधार दें । जौनपुर एक छोटा से शहर है उत्तर प्रदेश में । अकबर को फतेहपुर सीकरी शहर बहुत पसंद था, वहाँ जाते वक़्त वो जौनपुर में रुक कर थोड़ा आराम करते थे । यहाँ एक किला है जिसमे नमाज़ अदा करने के लिए एक मस्ज़िद है और रानियों को नहाने के लिए एक शाही स्नान घर है जिसमे पुराने समय में एक रास्ता सीधे किले के बगल से गुजर रही गोमती नदी में जा कर मिलता था. एक अकबारी पुल गुज़रता है इस गोमती नदी के उपर से । कुछ पुराने लोगो का कहना है की यह जौनपुर सहर 17 दिन के लिए भारत की राजधानी रहा है ।

पुराने समय बदल चुका है और आज यहा पर राजा महाराजा तो नहीं हैं , पर यही जौनपुर में एक गाँव है माधोपतति जहाँ ऐसा कहा जाता है की हर घर से कोई ना कोई एक आदमी आइ. ए. एस ऑफीसर बना है. पर मैं जिस शलभ की बात बताने जा राहा हूँ, वो ना तो कोई राजा है ना आइ. ए. एस, वो तो सिर्फ़ एक बाप है ।

शलभ ने अपनी पढ़ाई जौनपुर से ही पूरी कर ली थी और 1 ऑफीस में नौकरी करने लगा था । घर वालों ने उसके लिए 1 लड़की देखी जिसका नाम अर्चना था । अर्चना ने बहुत पढ़ाई नहीं की थी, गाँव में रहने वाली एक सीधी सी लड़की थी, जो अपने पिता जी के कहने पर जिस से बोला गया उस से शादी करने को तैयार हो गयी । शलभ नयी सोच का आदमी था, उसने बीवी को कभी कम नहीं समझा और खूब ढेर सारा प्यार और सम्मान दिया । अर्चना, शलभ जैसे पति पा कर बहुत खुश थी । शलभ और शलभ का पूरा परिवार, अर्चना को बहू के रूप में पा कर खुश था ।

एक दिन माता रानी की आशीर्वाद से अर्चना प्रेगनेंट हुई । हॉस्पिटल में ज़रूरी टेस्ट करवाए गये जिसके बाद डॉक्टर ने बताया की पेट में एक लड़की है । यह बात सुन कर शलभ का तो खुशी का ठिकाना नही रहा और उसने घर पर सबको मिठाई खिलाई, पर शलभ के परिवार वाले कुछ पुराने ख़याल के थे, वो लड़की नहीं चाहते थे, उन्होने शलभ को पेट में ही लड़की को मरने की सलाह दी । शलभ ऐसा नही चाहता था, बहुत मनाया अपने घर वालों को पर वो नही माने. सबने शलभ को बोल दिया या तो लड़की को मार दो या घर छोड़ दो । शलभ बहुत दुखी हो गया पर वो एक नन्ही सी जान जिसने अभी तक जन्म भी नही लिया उसको मारने का ख़याल दिल में नहीं लाया । अपनी बूढ़ी माँ का आशीर्वाद ले कर अलविदा कहा और एक दूसरे घर में किराया पर रहना लगा ।

और फिर वो दिन आ गया जब अर्चना ने एक बेटी को जन्म दिया । उस नन्ही सी परी को जैसे ही शलभ ने सिने से लगाया उसकी आँखों में आँसू आ गये । नाम रखा रीनी । रीनी धीरे धीरे बढ़ने लगी, नन्ही रीनी को जो कोई भी देखता मानो देखता ही रह जाता था । घुंघराले बाल, गुलाबी गाल, एक छोटी सी मुस्कान हुमेशा उसके चेहरा पर दिखती थी । कल तक जो शलभ का परिवार रीनी को पेट में ही मार देना चाहता था आज उसकी एक मुस्कान देख कर सोचते है की क्या पाप करने जा रहे थे । इसके कुछ दिन बाद शलभ को 1 लड़का हुआ जिसका नाम रखा गया हर्ष. रीनी अपना छोटा भाई पा कर बहुत खुशी हुई । शलभ और अर्चना का परिवार पूरा हो गया । दोनो बच्चो को एक साथ खेलता हुआ देख कर शलभ को अपना बचपन याद आ जाता ।

धीरे धीरे रीनी बड़ी हुई और स्कूल जाना शुरू किया । परिवार वालो ने बोला की लड़कियों को पढ़ने ना दे और घर का काम सीखे. इस बार तो परिवार वालों के साथ साथ अर्चना का भी यही मानना था क्योकि अर्चना खुद बहुत पढ़ी लिखी नही थी और उसका भी यही मानना था की लड़कियों को बहुत पढ़ाई नही करनी चाहिए । पर शलभ को यह मंजूर नही था, रीनी उसकी आँखों का तारा था, वो चाहता था की रीनी हर वो चीज़ करे जिस से वो अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जी सके । शलभ फिर घर वालों से लड़ झगड़ कर रीनी को स्कूल भेजने लगा. अर्चना धीरे धीरे रीनी पर गुस्सा करने लगी और हर्ष को ही सारा प्यार देती । कभी-कभी बाहर वालों की बात सुन कर गुस्सा रीनी पर उतार देती, मार देती या कभी घर का काम करवाती. बेचारी रीनी सब सहती और अपने पापा शलभ का इंतेजर करती । जिस दिन आर्चना ज्यादा मार देती उस दिन रीनी शाम को शलभ के आने पर उस लिपट कर खूब रोती । शलभ रीनी को रोता देख कर टूट जाता, आर्चना को खूब समझाता की बेटी है अपनी, मत मारा करो पर आर्चना को कोई फ़र्क नही पड़ता और वो आए दिन रीनी को मार देती ।

फिर वो समय भी आए जब हर लड़की को रोमॅंटिक सॉंग अच्‍छे लगने लगते है, रीनी अब एक छोटी लड़की नही थी बड़ी हो चुकी थी । गुलाबी सलवार समीज़ पहन कर अपनी लेडी बर्ड साइकल से जब 17 साल की रीनी स्कूल जाती तो शहर के लड़को को एक सुखद एहसास मिलता । आए दिन कोई ना कोई लड़का उसको प्रपोज़ कर देता । कभी स्कूल में कभी कॉलोनी के लड़के । पर रीनी शर्मीली स्वाभ की लड़की थी जल्दी किसी से घुल मिल नही पाती थी और ऊपर से आर्चना का गुस्सा इन सब की वजह से वो सबके प्रपोज़ल रिजेक्ट कर दिया करती थी । पर उसका एक दोस्त थे रवि । रवि बचपन से ही रीनी के साथ स्कूल में था, वो रीनी को हमेशा साथ देता था । स्कूल का कोई प्रॉजेक्ट वर्क का समान लाना हो, कभी मार्केट में कोई नयी कहानी की किताब खरीद देता जिसको खरीदने के पैसे रीनी के पास नहीं होते थे या कभी किसी लड़के को डराना हो जो बार बार रीनी का पीछा कर रहा हो । रवि हमेशा रीनी को इन सारी मुसीबत के समय साथ देता था ।

एक दिन रवि ने भी रीनी को आपने प्यार का इज़ेहर कर दिया । रीनी भी मना नही कर पाई क्योकि मन ही मन कही वो भी रवि को बहुत चाहती थी । रीनी को रवि के आंदार शलभ दिखता था. यह वो दूसरा इंसान था शलभ के बाद जो हुमेशा रीनी को साथ देता था । बेचारा इंसान किसी ने किसी का साथ ढूंढता है । रीनी को वो साथ रवि में दिखता था । अब तो हर दिन रवि और रीनी कही ना कही मिलने लगे । वो किला जहाँ कभी राजा रानी रहा करते थे आज रवि और रीनी के प्यार को साक्षी थे । वो गोमती नदी जहाँ कभी रानी नाहया करती थी, रीनी और रवि वहाँ पर शाम का डूबता हुआ सूरज एक साथ देखा करते । रीनी को इतनी खुशी का एहसास इस से पहले कभी नही हुआ था ।

पर एक दिन ना जाने कहा से हर्ष ने रीनी और रवि को एक साथ देख लिया । उसने घर जाते ही आर्चना को पूरी बात बता दी । उस शाम जैसे ही रीनी घर आई आर्चना ने उसको खूब मारा । हर्ष ने भी कोई बीच बचाव नहीं किया । मार मार कर घर से बाहर निकाल दिया । शलभ किसी काम की वजह से शहर से बाहर गया था । अगले दिन सुबह आया तो रीनी को घर के बाहर पाया । बेचारी रीनी रात भर घर के बाहर पड़ी थी । वो बेहोश हो गयी थी । शलभ जल्दी से रीनी को हॉस्पिटल ले गया । 2 दिन के बाद रीनी को होश आया । शलभ को देख कर उसके गले लिपट कर रोने लगी । शलभ को समझ में आ गया की उसकी बेटी को यहाँ कोई नही समझने वाला । शलभ ने रीनी का सिर अपने बाहों में भर लिया और बोला, “बेटी मैं तुम्हारा पापा तो हूँ, पर अब तुम बड़ी हो गयी तो आज से में तुम्हारा दोस्त भी हूँ, तुम जो कुछ भी करो बस मुझे बता दो, मेंमैंसारी दुनिया से लड़ लूँगा तुम्हारे लिए”। रीनी को कुछ दिन लग गये हॉस्पिटल में सही होने में और इतने दिन में रवि के पापा का ट्रान्स्फर दूसरे शहर में हो चुका था जिसकी वजह से उसको भी दूसरे शहर जाना पड़ा । बेचारे दो मासूम का प्यार एक दूसरे को बिना गुड-बाइ कहे ही ख़तम हो गया । रीनी के शरीर पर पड़े चोट के निशान कुछ दिन में भर गये पर उसके मन पर पड़े निशान भरने में बहुत साल लगने वाले थे ।

धीरे-धीरे रीनी रवि को भूल गयी और स्कूल की पढ़ाई पूरी कर ली. उसको नोएडा के एक बहुत अच्छे इंजिनियरिंग कॉलेज में में अड्मिशन मिला । आर्चना ना तो स्कूल की पढ़ाई के लिए राज़ी थी ना कॉलेज के लिए । पर शलभ तो आँख बंद करके रीनी पर विश्वास करता था. ट्रेन पर जाते वक़्त शलभ ने रीनी को बस यही समझाया की कॉलेज में पढ़ाई करना आपनी जिंदगी बनाना सब कुछ करना बस मुझे आपना दोस्त मान कर हमेशा हर दिक्कत परेशानी बताते रहना । धीरे धीरे ट्रेन स्टेशन से निकल रही थी और आँसू शलभ की आँखों से । जिस बेटी को हमेशा अपने सिने से लगा कर पूरी दुनिया से बचा कर रखा था आज वो उस से दूर जा रही थी ।

 

छोटे से जौनपुर शहर से निकल कर रीनी नोएडा जैसे बड़े शहर में आ तो गयी थी, पर वो बहुत डरती थी । आर्चना की मार से उसका सेल्फ़ कॉन्फिडेन्स बहुत कम हो चुका था । वो आमिर घर से आने वाली लड़कियों के साथ ताल मेल नही बैठा पाती थी. । कॉलेज में वो ज़्यादा तर अकेले ही रहती, घर और शलभ को याद करके रोया करती थी । ऐसे ही एक शाम वो कॉलेज के एक गार्डेन में बैठी हुए थी. कॉलेज फॅकल्टी के बच्चे वहाँ खेल रही थे । यहाँ सबकी मम्मी लड़का और लड़की में कोई अंतर ना करके उनके साथ बहुत प्यार से खेल रही थी । यह देख कर रीनी के आँखों में आँसू आ गये । वो एक चेयर पर बैठ कर रोने लगी, तभी एक लड़का उसके पास वील चेयर पर आया । शुभम जिसको बचपन में पोलीयो की दवा ना मिल पाने की वजह से टाँग में पोलीयो हो गया था जिसकी वजह से वो चल फिर नही पता था इसलिए वील चेयर के सहारे एक जगह से दूसरी जगह जाता था । शुभम रीनी के ब्रांच में ही था पर हमेशा अकेले रहने वाली रीनी ने शुभम को कभी क्लास में अब्ज़र्व ही नही किया था । शुभम पास आ कर रीनी को रुमाल देता है और उसके रोने की वजह पूछता है । रीनी वैसे तो किसी से इतने जल्दी बात नही करती थी पर शुभम के शहरा देने से उसको अपनी बात बताने से रोक ना सकी । रीनी ने बताया की उसको घर में कभी मां और भाई का प्यार नही मिला । माँ उसे हमेशा मारा करती थी । लड़के लड़की में अंतर किया करती थी । यह बोलते बोलते वो शलभ को याद करके और रोने लगी । शुभम ने रीनी को चुप कराने की कोशिश की । कुछ देर में रीनी चुप हो कर अपने हॉस्टिल चली गयी । 

अगले दिन क्लास में रीनी ने शुभम को पहली बार अब्ज़र्व किया । कितनी मुश्किल से वो आपनी वील चेयर से क्लास की सीट पर बैठ पाता था । लंच में उसने देखा शुभम भी अकेले ही लंच कर रहा है । रीनी उसको पिछले दिन दिये हुआ उसके रुमाल वापस करने गयी और सपोर्ट के लिए थॅंक्स बोला । उसने शुभम को पूछा की क्लास में तुमको कोई हेल्प नही किया सीट पर बैठने के लिए । शुभम ने बोला की बचपन से ऐसे ही हुआ है उसके साथ कोई उसको हेल्प नही करता था । वो और बच्‍चों की तरह खेल नही पता था, पर उसने हुमेशा भगवान को लाइफ देने के लिए धन्यवाद दिया । रीनी को शुभम की बात सुन कर अपना दुख़ कम लगने लगा. उसको लगा की शुभम की लाइफ ज़्यादा डिफिकल्ट है पर तब भी वो खुश है”।

 

वो क्या है ना, एक अधूरा दूसरे अधूरे को मिल कर पूरा कर देता है. इस तरह ही, धीरे धीरे रीनी और शुभम बहुत अच्छे दोस्त बन गये । साथ में पढ़ाई करना, कॅंटीन में घंटो डिस्कशन, पार्क में वॉक करना । रीनी को कॉलेज में एक साथी मिल गया था जिस से वो अपन  हर बात बता सकती थी और वो अपने पुराने दोस्त मतलब की आपने पापा शलभ से थोड़ा थोड़ा दूर होने लग गयी थी । आज की यूथ इसको “जेनरेशन गैप कहती है”। जो रीनी जब बचपन में बोल नही पाती थी और शलभ उसकी हर बात समझ जाता था उस रीनी को लगता था की पापा है, वो बात कहाँ समझ पाएँगे । अपने पहले प्यार रवि का साथ नही मिल पाया था उसको, इसलिए उसको लगता था की घर वालों को वो शुभम के बारे में नही बतायागी क्योकि वो समझ नही पायंगे । पर काश उसने कोशिश की होती । काश उसने शलभ को बताया होता । क्योकि रवि के समय भी शलभ को कुछ नही पता था उसको आर्चना ने ही मारा था । रीनी ने शलभ को कुछ भी बताना सही नही समझा.

धीरे धीरे रीनी और शुभम एक दूसरे के और करीब आ गये थे । एक दूसरे को जान से ज़्यादा प्यार करते थे । दोनो के 1 ही कंपनी में जॉब मिल गया । शलभ ने जैसे ही रीनी की जॉब की खबर सुनी उसकी खुशी का ठिकाना नही रहा । कॉलेज ख़तम होने के बाद जॉब जाय्न से पहले रीनी घर आई । शलभ के बाल अब कुछ कुछ सफेद होने लग गये थे । उसने ऑफीस से हॉलिडे ले कर रीनी से खूब बाते की । कॉलेज लाइफ, दोस्त, नोएडा शहर सब पूछा । रीनी ने भी सब बताया । फिर शलभ ने पूछा, “रीनी तुमको कोई लड़का पसंद है क्या?” रीनी आचनक से डर गयी, एक बार उसने सोचा की शुभम के बारे में बता दे, पर वो डर गयी की मम्मी गुस्सा कारगी. दूसरे शहर में इसलिए माना कर रही थी लड़की को पढ़ाने के लिए और ऐसे काई सारी बाते सोच कर वो डर गयी और उसने माना कर दिया । शलभ ने फिर बोला बेटा किसी भी बात की डरने और शरमाने की ज़रूरत नही है, अगर कोई लड़का पसंद है तो अभी बता दो । रीनी ने दोबारा माना कर दिया की कोई नही है.

अगले दिन शलभ के बचपन का दोस्त संजीव आपने लड़के गौरव के साथ रीनी को देखने आए । रीनी को यह बात नही पता था । शलभ ने रीनी को बताया तो ओ तयार हो कर नीचे आ गये, जिस तरह से हमरी हिन्दी पिक्चर में दिखाया जाता है की लड़की चाइ और समोसा ले कर आ रही है वैसे कुछ सीन नही हुआ क्योकि गर्मी की समय चल रहा था तो रीनी ने कोल्ड-ड्रिंक और नमकीन सर्व की । गौरव और रीनी ने अकेले में कुछ बात की । गौरव को रीनी बहुत पसंद आई । दोनो फॅमिली ने शादी के लिए हा भर दी । पर शादी से पहले गौरव रीनी को अच्छे तरह से जान लेना चाहता था । गौरव रीनी को डेली रात में कॉल करता, घंटो बात करता । गौरव और रीनी मिलने लगे । गौरव को रीनी से प्यार होने लगा । रीनी ने भी गौरव को भी कभी शुभम के बारे में नही बताया. शलभ को लगा जैसे उसका जीवन का सारे सपने पूरे हो गये है और शादी के बाद रीनी रानी की तरह रहेगी गौरव के साथ । शादी की डटे निकल ली गयी जो की 8 महीनो बाद की थी. रीनी की जॉब जाय्निंग आ गयी. रीनी दिल्ली चली गयी ।

 

दिल्ली आ कर रीनी ने शुभम को सब कुछ बताया । शुभम को बहुत दुख हुआ, पर रीनी ने उसे विश्वास दिलाया की वो गौरव से शादी नही करेगी और वहाँ जौनपुर से निकल जाए इसलिए इतने दिन से यह सब ड्रामा किया था । रीनी अब भी गौरव से रात में बात करती । गौरव बहुत खुश था, पर शलभ उस से भी ज़यादा खुश था । शलभ ने बहुत ढेर सारी तायारी कर ली थी । शादी के लिए कार्ड, बुकिंग, रिश्तेदार और सबको बुला लिया था. धीरे धीरे शादी की तारीख नज़दीक आने लगी थी. शलभ बार बार रीनी को कॉल करके पूछता की बेटा ऑफीस से हॉलिडे ले कर घर आ जाओ अब । रीनी कोई ना कोई बहाना करके बात को अवाय्ड करती रहती । पर जब तारीख बहुत ही नज़दीक आ गयी तो उसने शलभ को फोन करके बताया की वो शादी की तारीख से 1 हाफते पहले डटे ट्रेन से आ जायागी. शलभ बहुत खुश हुआ 6-7 घंटे पहले ही स्टेशन पर पहुच गया था बेटी को घर लाने के लिए । उसने रीनी को फोन किया तो रीनी ने बोला की वो ट्रेन में बैठ गयी है. जब ट्रेन स्टेशन पर आई तब शलभ दौर्ड़ कर उस डिब्बे के पास गया जिसमे रीनी को होना चिहिये था । पर यह क्या रीनी उस डिब्बे में नही थी । शलभ ने रीनी को दोबारा फोन किया । फोन स्विच ऑफ आ रहा था. शलभ घंटो रेलवे स्टेशन पर रहा, कॉल करता रहा, टीटी के पास जा कर पूछता पर रीनी का कुछ पता नही चला । रात के 1 बजे गये वो पागलो की तरह स्टेशन पर बैठा रोता रहा । आचनक उसके फोन पर रीनी के नंबर से कॉल आ रही थी, उसने कॉल पिक की, रीनी ने उसको बोला, “पापा में शादी के लिए घर नही आ रही हूँ, में गौरव से शादी नही करूँगी. एक शुभम नाम का लड़का है उसके साथ शादी करने जा रही हूँ । हम दिल्ली में भी नही रहँगे, और हम खोजने की भी कोशिश मत करिये, आज के बाद में कॉल नही करूँगी, समझ लेजियागा की में मार गयी ।” यह बोल कर रीनी ने फोन कट कर दिया । शलभ के पैर के नीचे से जामीन खिशक गयी, रोने लगा वो. जिस रीनी को उसके परिवार वाले पेट में मारना चाहते थे, उस रीनी ने आज बोल दिया की समझ लिजये की मैं मर गयी । जिसके लिए उसने पूरे परिवार से नाता तोड़ लिए, जिस रीनी को कोई स्कूल, कॉलेज, जॉब पर जाने के लिए कोई राज़ी नही था उस रीनी के लिए पूरे परिवार से लड़ झगड़ कर हर चीज़ करने की आज़ादी दी आज उस रीनी ने पापा को वो भरोसा तोड़ दिया । शलभ जो रीनी को हमेशा दोस्त मानता था उसका दुख दर्द समझता था आज उस रीनी ने आपने पापा को ऐसे दर्द दिया. शलभ घर आया, रात में ही संजीव और गौरव को फोन करके रीनी की बात बता कर फोन पर रोने लग गया. गौरव भी शॉक में था जिस रीनी से वो इतने दिन से फोन पर बात कर रहा था प्यार कर रहा था उसका भी भरोसा टूट गया । अगले दिन गौरव ने आ कर शलभ को सम्हला और बोला, “अंकल जी आपकी बेटी गयी तो क्या हुआ मैं आज से आपको आपने पापा की तरह मानता हूँ.” पर शलभ दुख से बाहर नही निकल पा रहा था । शादी टूट गयी सभी रिश्तेदार ने शलभ को लड़की को खूब आज़ादी देने के लिए खूब सुनाया । शलभ सबकी बात सुनता और अंदर से टूटता जा रहा था । रीनी को कॉल करता पर उसका नंबर नोट रीचबल बताता रहा ।

कुछ मीहाने बीत गये, रीनी ने शलभ को बताया की ओ लखनऊ में है शुभम के साथ शादी करके । शलभ को इतने दिन से जो दुख था वो गुस्से में बदल चुका था । तुरंत उसने एक कांट्रॅक्ट किल्लर को कॉल किया की रीनी को जा कर मार दे । किल्लर लखनऊ के लिए निकल गया पर शलभ ने रीनी के बचपन की फोटो देखी अपने रूम में तो रोने लग गया जिस बेटी को पेट में ना मारने के लिए वो पूरी दुनिया से लड़ गया था आज उस बीती को वो खुद से कैसे मार पाएगा. शलभ ने किल्लर को कॉल करके माना कर दिया । पर रीनी को बोला की आज से वो उस से कोई रिश्ता नही रेखेगा ।

 

इस बात को 5 साल हो गये है, रीनी 2 बच्चों की माँ है अब. पर शलभ आज भी उस से बात नही करता है. रीनी ने हॅंडिकॅप्ड लड़के से प्यार किया उसको आपनाया उस से सच्‍चा प्यार किया. प्यार की तो जीत हो गयी पर शलभ का प्यार, परिवार प्रेम कही ना कही हार गया!

 



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