Read a tale of endurance, will & a daring fight against Covid. Click here for "The Stalwarts" by Soni Shalini.
Read a tale of endurance, will & a daring fight against Covid. Click here for "The Stalwarts" by Soni Shalini.

Sandeep Panwar

Tragedy

5.0  

Sandeep Panwar

Tragedy

पंख

पंख

1 min
431


बहुत खुश था मेरा दिल 

पिंजरे में बंद पंछी

आज आज़ाद होंगे 

मैं देख सकूँगा उन्हें 

खुले आसमान में 

पंख फैलाए 

बादलों से बातें करते हुए 

पर यह मेरी सोच थी 

पिंजरे का दरवाज़ा खुलते ही 

पंछी डर गए 


जब उन्हें

आसमान की ओर

उड़ाने का प्रयास किया

वो धप से ज़मीन पर गिर गये

उन पंछियों के पास

उड़ने के पंख थे तो 

पर अफसोस वो उड़ना भूल 

गए थे

पर आज भी कितने

आकर्षक थे

उनके पंख,

गिरने के बाद वो

ज़मीन पर दौड़ने लगे

रेंगने लगे

मेरी आँखें न जाने क्यों

पर नम थी

उस क्षण कुछ

चुभ रहा था 

मेरे मन को ,


मुझे तुम याद आ रही थी जो 

जमाने की कुरीतियों को भुला 

कर इस तेज़ रफ्तार 

ज़माने के साथ चल रही थी

तुम्हारी प्रतिभाएँ 

तुम्हें बहुत ऊँचा बनाती जा रही थी

आसपास के ऊँचे लोग

बौने होने लगे थे पर दूसरी ओर

मुझे देश की कुरीतियों में फंसी

सभी बेटियाँ याद आ रही थी

कितनी बार उनके पंख भी तो

नोचे होंगे अपनों ने,

कितनी बार उन्हें फेका होगा

अंधेरे रास्तों पर के तुम कभी 

ऊँची न हो जाओ उनसे,

वो सभी इतनी बेड़ियों 

के बाद भी ऊँची उठती गयी

घायल और ज़ख़्मी


पंखों के संग 

वो सब कब तक उड़ती

असह पीड़ा कब तक सहती

खुद ही 

अपने पंख काट 

वो सब मुस्कुरा दी,

उन्होंने कहा था मुझसे

वक्त आने पर 

हम फिर उड़ेंगे

पर आज मैं सोचता हूँ

गर तुम भी 

उड़ना भूल गयी

उन सभी पंछियों की तरह 

तो मात्र शक्ति का क्या होगा

इस पर टिके हमारे

इतिहास क्या होगा

कुछ ऐसी थी

वो लड़की जो दुनिया में

होते हुए भी वह नहीं है 

जिसकी किसी को

जरूरत नहीं है ।


Rate this content
Log in

More hindi story from Sandeep Panwar

Similar hindi story from Tragedy