पंचम भाग 48
पंचम भाग 48
पंचम मध्य भारत के चंबल क्षेत्र में पहुंचते हैं , वहां पर शिवाय जंगल के कुछ भी दिखाई नही पड़ता है , इस जंगल में डाकुओं का बसेरा था , वह ऊपर से देखते हैं तो सभी और कई लुटेरों के दल दिखाई देते हैं,!!
वह सब नीचे उतरते हैं ,जंगल में ढेर सारे जंगली जानवर भी भटक रहे थे।"
श्रमिक कहता है,"यह तो लुटेरों का अड्डा है यहां कहां वह शैतान होंगे ,,**!!
कारक कहता है ,"कई लुटेरे भी किसी शैतान से कम नही होते हैं।"
नैवेद्य कहता है ,"उन्ही मे शायद हमे अपना शैतान मिलेगा।"
चरक कहता है ,"पर इनके तो की दल है ,और ये बहुत बड़ा जंगल है , कैसे खोजेंगे।"
अवधूत कहते हैं,"पहले भी हमने ढूंढा है ,और अब भी ढूढेंगे , पर अब हम कहीं जायेंगे नही ,हम यही बैठ कर ,इन शैतानों का आवाहन करेंगे और उनके आते ही उन्हे भस्म कर देंगे।"
चरक कहता है ,"मुझे लगता है ,यह तो सीधे तौर पर हम मरने जा रहे हैं।"
कारक कहता है ,"चरक तुम यह भूल रहे हो कि हमे देवराज इंद्र ने दस शैतानों को मारने की आज्ञा दी है ,और अब सिर्फ आठ बचे हैं और हमने सिर्फ एक शैतान को भस्म किया है।"
नैवेद्य कहता है ,"आवाहन करते ही जो आसानी से आ जायेंगे उन्हे भस्म नही होने देंगे ,जो नही मानेंगे ,उन्हे भस्म कर देंगे।"
अवधूत कहते हैं ,"नैवेद्य सत्य कह रहा है , अब हमे एक हवन कुंड बनाना है और फिर तंत्र साधना आरंभ कर उन पांचों का आवाहन करना है *"!!
कुछ देर में हवन कुंड और बाकी सामग्री की व्यवस्था हो जाती है , वह लोग अभी तैयारी ही कर रहे थे की एक डाकुओं का दल वहां आ जाता है , और उन्हे घेर लेता हैं।"
उनका सरदार उन्हे घूम कर देखता है ,सभी सोने के आभूषण पहने हुए थे।"
उनका सरदार पूछता है ,"ये आभूषण तुम लोगो ने असली पहने हैं या किसी ड्रामा कंपनी का है।"
चरक कहता है ,"सही कह रहे हो ये ड्रामा कंपनी का है ,पर तुम लोग किस ड्रामा कंपनी से हो।"
एक डाकू गुस्से में कहता है,"तुम्हे हम ड्रामा कंपनी वाले लग रहे हैं ,**!!
सरदार उसे चुप रहने का इशारा करता है और पूछता है "तुम लोग कोई पूजा पाठ कर रहे हो यहां पर।"?
चरक कहता है,"हां इस जंगल की शांति के लिए हवन कर रहे हैं ताकि कोई प्राकृतिक आपदा ना आए ,आप लोगो की इच्छा हो तो आप सब भी बैठ सकते है पूजा देखने के लिए।"
सरदार कहता है,"पंडित हो तुम लोग तो नकली सोना पहनने की क्या आवश्यकता।"?
एक डाकू कहता है ,"सरदार ये नकली नही असली पहने हुए हैं , उस दिन अखबार _में छपी खबर नही देखे थे , वह किसी बड़े मंदिर का महंत था चार किलो सोना पहने था , इनके पास चढ़ावा बहुत आता है।"
सरदार कहता है ,"छोड़ो इन्हे पूजा करने दो , ये पता नहीं कितने पापियों का पाप अपने सर लेते हैं , हम तो उन्हे लूटते हैं जो जनता को लूटते है , !!
सभी डाकू उन्हे देखते हुए जाते हैं , !!
श्रमिक कहता है ,"मुझे लगा इन्हे भी सबक सिखाना होगा पर उनका सरदार समझदार था।"
अवधूत कहता है ,"कारक और नैवेद्य आस पास का ध्यान रखते हुए पूजा में सहयोग देंगे , मैं ,श्रमिक और चरक आवाहन कर उन्हे बुलाते है , ,**!!
वह पूजा आरंभ करते हैं ,मंत्र पढ़कर तीनो आहुति डालने लगते है, उसी समय एक बाघ वहां से गुजरता है ,वह इन लोगो को पूजा करते देख कुछ क्षण के लिए रुकता है , एक बार वह इनपर हमला करने की सोचता ही है कि कारक बड़ी तेज़ी से उसके सामने कूद कर उसे डर देता है ,बाघ डर कर तेज़ी से भागता है , !!
उनके आवाहन करते ही , आस पास तेज lहवा बहने लगती है ऐसा लगता है जैसे अंधी आने वाली है , दूर से कोई तेज़ी से चला आ रहा है ऐसा महसूस होता है , जैसे कोई पेड़ो की टहनियां गुस्से से तोड़ता हुआ आ रहा है, !!
वह डाकू दल भी जो थोड़ी दूर जाकर खाने बोते थे ,तेज हवा के चलते एकदम से घबरा कर उठ जाते हैं ,!!
सरदार कहता है ,"ये अचानक आंधी कहा से आ रही है , !!
दूसरा डाकू कहता है ,"ये जरूर उन पंडितो के पूजा का असर है।"
अवधूत मंत्र पढ़कर हवन सामग्री हैं कुंड में डालते हैं की एक पेड़ तोड़ता हुआ एक भयानक शैतान सामने आता है और कहता है ,"कौन हो तुम लोग क्यों हमे परेशान कर रहे हो ,तुम्हे हमारा जरा भी भय नहीं है , बंद करो ये आवाहन नही तो तुम्हारे सर फोड़कर खा जायेंगे।"
उसकी बात सुन वहां खड़ा कारक उसे उठाकर जमीन पर दे मारता है , उसकी चीख निकल पड़ती हैं , नैवेद्य भी उसी समय उसके पैर पकड़ कर पटकना शुरू करता है , उसकी चीखे निकलने लगती है ,!!
वह गिड़गिड़ाने लगता है ,"मुझे माफ कर दो कौन हो तुम लोग ,क्यों मार रहे हो , मुझे""!!
कारक उसे वलय कवच में बंद करते हुए कहते हैं ,"अब अपने घर पहुंच कर अपने भाइयों से पूछ लेना हम कौन हैं।"
और उसे नरक में भेज देता हैं ,!!
अवधूत का आवाहन चालू है ,इस बार दो शैतान एक साथ बड़ी तेज़ी से आते हैं ,उनके साथ कई छोटे मोटे भूत प्रेत तो ऐसे ही हवन कुंड में आकर भस्म हो चुके थे ,दोनो शैतान वहां पहुंचते हो बड़ी तेज़ी से घूमने लगते हैं , उनके घूमने से बवंडर सा उठने लगता है ,यह देख कारक और नैवेद्य उनकी ओर बढ़ते हैं, पर उनके घूमने का वेग इतना अधिक था कि कारक और नैवेद्य जैसे ही उनके पास पहुंचते है उनके वेहबके झटके से दूर जा गिरते हैं।"
उनके लगातार घूमने से वह वहां के कई पेड़ टूट जाते है ,पर अवधूत चरक और श्रमिक की शक्ति से हवन कुंड अपने स्वाभाविक रूप में जल रहा था ,वह उन दोनो को भस्म करने के लिए मंत्र पढ़ना शुरू करते हैं क्योंकि वह समझ गए थे कि यह सीधे सीधे पकड़ में नहीं आएंगे।"
क्रमशः

