पंचम भाग 39
पंचम भाग 39
भाग 39
पंचम चम्बल की ओर जाते हैं, चंबल के भयानक और इतने बड़े जंगल में उन पांच शैतानों को खोजना आसान नहीं था।
अवधूत कहते हैं, " हमें उस स्थान को ढूँढना होगा जहां पर वह लुटेरे डाकू मारे गए थे, वह लोग ऊपर से उड़ते हुए नीचे की ओर देख रहे थे, तो उन्हें नीचे कुछ भेड़ियों का झुंड दिखाई पड़ा जो, एक जगह पर एकत्रित थे, पंचम यह देख धीरे से अदृश्य रूप में ही वहां के एक बड़े पेड़ पर उतरते हैं।
उस पेड़ के नीचे करीब बीस पच्चीस भेड़िए खड़े एक और देख रहे थे, वहाँ पर अभी अभी किसी राहगीर को किसी ने मारा था, वह जरा आगे देखते है, तो एक भयानक शैतान वहां पर खड़ा आसमान को और देख कर शायद कुछ मंत्र पढ़ रहा था।
चरक नीचे देख कहता है, " वह मानव मृत नहीं है, वह अभी जीवित है, यह शैतान मंत्र पढ़कर उसका रक्त पान करेगा।
यह सुनते ही अदृश्य रूप में ही नैवेद्य जा कर तेज़ी से उस आदमी को उठाकर दूर ले जाता है, कारक उसके साथ जाता है।
आदमी के गायब होते ही भेड़िए गुर्राने लगते है, और शोर करने लगते हैं, तो शैतान मुड़कर उनकी ओर गुस्से से देखता है, और फिर उसकी नजर जहाँ पर आदमी बेहोश पड़ा था, उस जगह पर पड़ती है, तो वह चौक उठता है, और चारों ओर देखने लगता है, पर उसे दूर दूर तक उसका शिकार दिखाई ही नहीं पद रहा था, वह गुस्से में चिंघाड़ता है, तो सारे भेड़िए घबराकर इधर उधर होते हैं।"
शैतान तेज़ी से उछल उछल कर चारो ओर देखने लगता है, वैसे भी उसे देख कर जो आदमी बेहोश हो गया था, और उसके पास भेड़ियों का झुंड था तो गायब कैसे हुआ, यह तो उसके लिए घोर आश्चर्य की बात थी।
वह चिल्लाता है, " हे भाइयों तुम लोगों ने मेरा शिकार गायब कर दिया ये अच्छी बात नहीं है, मुझे मेरा शिकार लौटा दो नहीं तो अच्छा नहीं होगा।"
शायद शैतान को अपने भाइयों पर संदेह होता है, उसके हिसाब से उसके भाइयों के अलावा और कोई नहीं हो सकता जो उसका शिकार ले जा सके।"
श्रमिक कहता है, "क्या करे इसको निपटा दिया जाए।"
अवधूत कहते है "अभी रुको यह अभी अपने बाकी साथियों के पास ले जायेगा हम इनसे सीधे सीधे नहीं लड़ेंगे।"
उधर कारक और चरक उस आदमी को एक गांव के मंदिर पर छोड़ कर तेज़ी से लौटते हैं।
वह शैतान तेज़ी से अपने भाइयों के पास जंगल के मध्य स्थित एक बड़े से खंडहर में जाता हैं, ।
पंचम देखते हैं की सामने भयानक चार शैतान और बैठे हुए थे, वह सब के सब बड़े ही शक्ति शाली लग रहे थे, वह लोग किसी मनुष्य के मांस को खाने में लगे थे, उनके चेहरे पर खून लगा हुआ था जिस कारण वह और भी भयवाह लग रहे थे !!!
वहा उसके भाई बैठे भोज उड़ा रहे थे, यह देख उसे बहुत गुस्सा आता है, वह गुस्से में कहता है, " मेरा शिकार कहां गया।"
उसके भाई लोग उसे देख चौकते हैं, एक हंसकर कहता है, " तुझे शिकार नही मिला तो हमसे झूठ बोलकर शिकार पाना चाहता है, चल जा अंदर चार लोगो को उठा लाए हैं उनमें से कोई एक ले ले।"
पंचम यह सुन तुरंत अंदर जाकर देखते हैं तो, वहां पर शैतानों ने चार आदमियों को पकड़ रखा था चारों ही बेहोश पड़े थे, यह सभी इस जंगल के मार्ग से गुजरने वाले पथिक थे, और उनका दिन खराब था जो इन शैतानों के मार्ग में आ गए थे।
बाहर वह शैतान अभी बाते ही कर रहे थे।
अवधूत कहते हैं", इन्हें भी शीघ्र ले जाओ, और छोड़ आओ किसी सुरक्षित जगह पर तब तक मैं इन्हें सम्हलता हूं।"
कारक और चरक दोनों ही चारों को उठा कर गायब होते है।
पहला शैतान बड़बड़ाता हुआ अंदर की ओर आता है वह इधर उधर देखने लगता है तो वहां पर कोई भी शिकार नजर नहीं आता है।"
वह गुस्से में बाहर आकर उसको जोर से धकेलता है जिसने उस से कहा था जा जाकर ले ले, और उस पर चीखता है, "" तुम सब मिलकर मेरा मजाक उड़ा रहे हो, अंदर तो एक मुर्गी का बच्चा भी नहीं है।"
सभी चौकते हैं, दूसरा कहता है " क्या बात कर रहे हो, हमने पांच मुसाफिरों को रोका था और उन सभी को उठा लाए थे, ये तो पहला ही था।"
वह कहता है, " तो कहां गायब हो गए, अंदर कुछ भी नहीं है।"
सभी तेज़ी से अंदर जाते हैं, तो अंदर किसी को न देख आश्चर्य चकित रह जाते हैं।"
वह सब आपस में ही एक दूसरे पर इल्जाम लगाने लग जाते हैं, यह देख श्रमिक एक शैतान को पीछे जोर से लात मारता है, तो वह दूसरे शैतान से टकराता है, वह गुस्से से अपने दूसरे भाई की ओर देखता है।
वह कहता है, " अब तेरी इतनी हिम्मत हो गई की तु मुझे लात मरेगा।"
वह उसे एक जोरदार हाथ मारता है, शैतान तो शैतान ठहरे उनमें इतना दिमाग तो होता नहीं है की दूर तक सोचे।"
इसी बात में धीरे धीरे पांचों ही आपस में भिड़ जाते है, बीच बीच में कभी नैवेद्य हाथ साफ कर लेता था तो कभी श्रमिक, अवधूत तो एक और आराम से खड़ा इनकी लड़ाई का मजा ले रहा था, पांचों भयानक शैतान बुरी तरह से भिड़े हुए थे।
चरक और कारक भी वहाँ आकर तमाशा देखने लगते है, उन्हें भी मजा आने लगता है और वह भी बीच बीच में हाथ साफ करने लगते हैं।"
शैतानों में जो सबसे बड़ा था वह चीख कर कहता है, "रुक जाओ हम आपस में क्यों लड़ रहे हैं, पहले तो यह सोचो की हमारे शिकार गायब कैसे हुए इसके पहले छोटे का शिकार गायब हुआ उसके बाद इसके यहां आने के बाद हमारा भी शिकार गायब हो गए इसका मतलब समझने की कोशिश करो, हम अपनी शक्ति को आपस में लड़कर व्यर्थ कर रहे हैं।"
क्रमशः

