पंचम भाग 18
पंचम भाग 18
सर्पों और पक्षियों को आपस में लड़ते देख अवधूत कहता है "वह चारो शैतान हमे भटका रहे हैं, वह चारो बहुत चालक हैं हमे इस चक्कर में उलझा कर खुद भागने के फिराक में है, इनकी ओर देखना बंद करो और इन शैतानों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
कारक तुरंत ध्यान लगाता है तो वह चारो तो यहां से कब का जा चुके थे अबकी वो उत्तर की ओर थोड़ी दूर गए थे, सभी उस और चलते हैं।
चरक उड़ते हुए कहता है, " बहुत ही अधिक चालाक हैं ये चारो, हमारे सामने आकर हमे चकमा दे रहे हैं, ये हमे उलझाए रखना चाहते हैं।
श्रमिक कहता है, " हमे उन पक्षियों को बचाना चाहिए था।
नैवेद्य कहता है, " हैं प्रकृति के नियमो से खिलवाड़ नही कर सकते हैं, वह पक्षी और सर्प एक दूसरे के पूरक हैं, हम उनके बीच पड़ेंगे तो एक को बचाएंगे तो दूसरे को मारने का पाप लेना होगा, इसलिए यहां के क्रिया कलापों के बीच नही पड़ना है।
श्रमिक कहता है, " उन दोनो लड़कियों को तो हमने बचाया था, शैतानों से।
नैवेद्य कहता है, " भाई तुम कबसे मूर्खो की तरह वार्ता करने लगे, मुझसे अधिक तुम्हे नियमों की जानकारी है।
श्रमिक कहता है, " समय व्यतीत करने का कुछ तो मुद्दा हो और कुछ मुद्दे ऐसे होते हैं जो कभी भी समाप्त नहीं होते जैसे राजनीति, नियम कानून पारिवारिक, इनपर कितनी भी बाते कर लो कभी खत्म नहीं होते।
नैवेद्य कहता है, " उन चारो शैतानों के बारे में सोचो जो हमे मुद्दे से भटका रहे हैं।
तभी श्रमिक चिल्ला कर कहता है, " रुको वह चारों शैतान वहीं हैं वह हमे भ्रमित कर खुद वही पर हैं।
सभी हैरत से श्रमिक को देखते हैं !!
अवधोत कहता है, " क्या कह रहे हो श्रमिक, !??
श्रमिक कहता है, " सारे पक्षी उड़कर ऊपर आ गए थे सिर्फ चार ही पक्षी थे जो उस गुफा में गए थे, जबकि पक्षी एक साथ एक ही जगह जाते हैं।
सभी एक दूसरे को देखने लगते हैं।
चरक कहता है, " यह बात तो मुझे भी संदेह में डाल रही है, वह चारो हमे मूर्ख बना रहे हैं, चलो अब उड़कर नही सीधे उस गुफा में ही पहुंचते हैं।
पंचम गुफा का ध्यान करते हैं और मक्खी के रूप में गुफा में प्रकट होते हैं।!
गुफा में अंदर की ओर वह लोग बढ़ते हैं तो उन्हे कई पक्षियों के पर कुतरे नजर आते हैं, शायद उन्हे खाया गया था, ।
वह चारो अंदर जाने से पहले दो लोगो को गुफा के मुहाने पर छोड़ते है, ताकि यहां से वह भाग न निकले, चरक, अवधूत, कारक अंदर की ओर बढ़ते हैं, अंदर चारो शैतान अपने असली रूप में बैठे वार्तालाप कर रहे थे।
हरिक कहता है, " ये देव सच में बड़े मुर्ख होते हैं, इन्हे बड़ी आसानी से अपनी माया के असर से दूसरी ओर भेज दिया गया, अब भटकते रहेंगे वहीं पर।
गूंथन कहता है, " अगर हम उन देवों का रक्त पान कर ले तो हम सीधे राक्षस बन सकते हैं फिर हमारा कोई कुछ नही बिगाड़ सकता।
पिनाक कहता है, ," ये तुम्हे इतना आसान लगता है, उनकी शक्तियां हमसे अधिक है, बस हम इस लिए भारी पड़ते हैं की हमे किसी की परवाह नहीं है, और उन्हे सबको बचा कर चलना होता है, और इसी बात का लाभ उठाकर हम एक एक को पकड़ कर उनका रक्त पान करेंगे।
मतंग कहता है, " मूर्खो हम बातो में लगे हैं और मुझे उनके आस पास होने का अहसास हो रहा है।
सभी चौक कर सतर्क होते हैं, और सूंघने लगते हैं, एक सूंघते हुए अवधूत के करीब पहुंचता है, अवधूत उसकी गर्दन पकड़ कर तेज़ी से धोबिया पाट लगाना शुरू कर देते है, वह जोर से चीख पड़ता है, इतनी देर में उसे कई बार अवधूत पटक चुके थे, बाहर खड़े नैवेद्य और श्रमिक को भी खबर लग चुका था, वह शैतान के चीखने की आवाज सुन चुके थे।
कारक और चरक भी एक एक को पकड़ चुके थे और उनका भी वही हाल होता है, दरअसल ये लोग तो पूरी तरह से लापरवाह होकर ही बैठे थे, और अब फस गए थे, चौथा शैतान समझ नही पा रहा था की वह भागे या फिर इनकी सहायता करे फिर उसे अपनी शक्तियों का आभास होता है, वह तुरंत ही तेज़ हवा का गोला बना कर इन सभी पर फेकने लगता है, जिस से इन तीनो को टिके रहना मुश्किल होने लगा था, पर बाकी तीनो शैतान जो अचानक हमले में बुरी तरह से मार खा चुके थे और अपनी शक्तियों का उपयोग करना भुला दिया था, वह सब तिनके की तरह उड़ने लगते है।
कारक अपने शैतान को छोड़ उस गूंथन की ओर बढ़ता है, तो गूंथन उसकी ओर हवा का गोला फेंकता है तो कारक जल का छिड़काव करने लगता है जिसमे हवा मिल कर शांत हो जाती है, और कारक गूंथन से भिड़ जाता है, उसी समय बाहर से दोनो देव भी अंडरवा जाते हैं और जमकर लड़ाई शुरू होती हैं।
श्रमिक और नैवेद्य एक शैतान को तुरंत ही मंत्र पढ़कर वलय कवच में बंद करते हैं और तुरंत ही उसे नर्क लोक भेजते हैं, अब बचे तीन।
अवधूत जिसे पीट रहा था, वह क्षमा मांगने लगता है, और कहता है, " मुझे छोड़ दो मैं तुम्हारे साथ हूं तुम जैसा कहोगे वैसा करूंगा।
अवधूत उसको वलय कवच में बंद कर उसे भी नर्क लोक में चलता करता है।
अब बाकी दो जो थोड़े अधिक ताकतवर और कई शक्तियों के जानकार थे वह सामने टिके हुए थे, "!
गूंथन अपने मुंह से आग निकलने लगता है जिस से देवी को उस से थोड़ी दूरी रखनी पड़ रही थी, और दूसरा पिनाक अपने चारो ओर कटीले कांटो का घेरा बना लिया था, जिस से उसे पकड़ना मुश्किल हो गया था।
अब दोनो शैतानों के पास कोई चारा नहीं था, वह गुफा को तोड़कर ऊपर नही जा सकते थे क्योंकि गुफा बीच पहाड़ में था, और बाहर भी नही जा सकते थे क्योंकि ये पांचों देव ने घेर रखा था, अब उनके पास मारो या पकड़े जाओ ही रह गया था।
क्रमशः

