Gulafshan Neyaz

Tragedy


4.5  

Gulafshan Neyaz

Tragedy


पक्ष विपक्ष

पक्ष विपक्ष

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आज मजदूर और किसान का जो हाल है। वो हामरे देश की वास्तवकिता से हमारा परिचय करा रहा है। कहने को तो हमारे पास परमाणु बम। बहुत बड़ी सेना। प्रोगशाला इंटेलीजेंट साइंसटिस्ट बड़े बड़े डॉक्टर यातायात के सभी साधन मौजूद है

उसके बाद हमारे देश का ये हाल है। इस लॉक डाउन मे जो सबसे जायदा पीस रहे है। वो है मजदूर और किसान जिस किसान को हम अपने अर्थ्वय्स्था की रीड बताते हैं।

उसका ये हाल जो मजदूर हमारी अर्थवयस्था की पटरी है। उनका ये हाल वाक्य निंदनीय है हामरे मजदूर और किसान भाई बड़ी उत्साह के साथ अपने नेता को चुनते हैं। कोई तो ऐसा होगा जिन्हे कुर्सी नहीं उनका दुख दर्द दिखये दे। पर अफ़सोस हर बार कंही ना कंही कभी ना कभी वो छलावा का शिकार हो ही जाते है। उनके दिन बदलने और अच्छे दिन की उम्मीद की जो आस रहती है वो सीसे की तरह टूट जाती है। ये आप स्टेशन के यंहा पर फैली रोटी या अरैया मे ट्रक हादसा देख कर समझ ही सकते है नेताओ को कब समझ मे आएगा की धर्म के धंधा से जायदा जरूरी मजदूरों और किसान के पेट का धंधा है। धर्म के धंधे से पेट नहीं भरता।

छोटे छोटे बच्चे को लेकर। तो कोई गर्भवती होते होये भी मीलों का सफर पैदल तय कर के आ रही है जिस देख कर कलेजा दहल जाता है। रोड पर रोज़ खतरनाक एक्सीडेंट हो रहे है। जिसमे मजदूर बेचारे बेमौत मर रहे है। पहले वो जिन्दा बचेंगे। तभी तो वो कोरोना से मरेंगे कृपा सब राजनीती पार्टी से मेरी गुज़ारिश है की कृपया राजनीती से हट कर पक्ष बिपक्ष से हट कर मजदूर और किसान के हित के बारे मे सोचे।

वरना देश की स्तिथि और भयावह हो जायेगी। ज़ब कोई मजदूर प्रदेश जाता है तो वो दो पैसे की आस मे घर पर बूढी माँ बीवी बच्चे को छोड़ कर जाता है। बहुत सारी उम्मीद के साथ और अपने घर वालो की उम्मीद बन कर ज़ब उसकी लाश उसके घर पहुंचे तो उनके दिल पर क्या गुज़रती होंगी यहीं सोच कर दिल सिहर जाता है मजदूरों की घर वापसी का इंतज़ाम किया जाय उनके राहों मे अगर फूल नहीं बिछा सकते तो कृपया उनके पाँव में छाले भी नहीं पड़ने दे। 


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