पार्किंग की आशिकी
पार्किंग की आशिकी
सीमा अपनी मां के घर बच्चों के साथ दो - चार दिनों के लिए रहने आई हुई थी। उसने मां को बताया कि आज गीता आने वाली है, मैंने उसे शाम का खाना यहीं खाने के लिए कहा है। इतना कहकर सीमा सोफे पर बैठ कर चाय पीने लगी। मां खाने की तैयारियों में जुट गई। चाय पीते पीते वह पुरानी यादों में खो गई ।आज वो गीता से 15 सालों बाद मिलने वाली थी। वो उसकी सबसे पक्की सहेली थी ।दोनों स्कूल साथ जाते थे कॉलेज भी साथ गए और बाद में प्रोफेशनल कोर्स करने वाले थे। दोनों ही पढ़ाई में बहुत अच्छे थे ।क्लास में फर्स्ट - सेकंड ही आते थे। गीता के घर वाले थोड़े आधुनिक विचारों के थे और गीता को आगे पढ़ाने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी। सीमा के घरवाले उसके आगे पढ़ने में ज्यादा रुचि नहीं रखते थे, पर दोनों सहेलियां साथ में कर रही हैं यह सोचकर उन्होंने भी सीमा को प्रोफेशनल कोर्स का फॉर्म भरने दिया ।
दोनों सहेलियां हर काम एक साथ करा करती थी। प्रोफेशनल कोर्स के दौरान दोनों को सुबह से 7:30 बजे से कोचिंग क्लास जाना होता था। वहां से 10:30 बजे दोनों साथ में ही ट्रेनिंग के लिए ऑफिस जाया करती थी और शाम की क्लासेस करके एक साथ ही रात को 8:00 बजे तक घर आया करती थी। मतलब यह हुआ कि पूरे दिन में करीब 13 घंटे दोनों एक साथ बिताते थे
गीता के लंबे बाल ,बड़ी-बड़ी आंखें , गेहुआ रंग, मोतियों जैसे दांत ,एक सुशील और समझदारी भरा स्वभाव उसे बहुत आकर्षक बनाते थे ।सीमा दिखने में बहुत ही सुंदर थी गोरा रंग बड़ी बड़ी आंखें, घुंघराले बाल और एक आकर्षक व्यक्तित्व उसका भी था। दोनों सहेलियां अपने में ही मस्त हुआ करते थे उन्हें किसी और की जरूरत नहीं थी।
हर सुबह क्लास जाने के लिए गीता ठीक 7:00 बजे सीमा के घर घंटी बजाती और सीमा हमेशा की तरह लेट हो रही होती थी। गीता हर बार गुस्सा करके उसे बोलती अगली बार मैं तुझे छोड़ कर चली जाऊंगी ,लेकिन ऐसा कभी होता नहीं था। वह हमेशा उसे साथ जाने के लिए इंतजार करती , सीमा की मम्मी दरवाजे तक दूध का गिलास लेकर उसके पीछे पीछे दौड़ रही होती कि बेटा थोड़ा सा दूध पी जा, सीमा जल्दी-जल्दी चप्पल पहनती और गाड़ी को स्टार्ट करने में लगी रहती थी, यह हर दिन का सीन था। सीमा के घर से कोचिंग क्लासेस 20 मिनट की दूरी पर था। रोज सीमा की वजह से 5 मिनट तो लेट हो ही जाता था और वह दोनों क्लास पहुंचते-पहुंचते 7.25 हो जाया करते थे इसके बाद उन्हें ऊपर चढ़कर जाना होता था क्लास में सेट होना कुल मिलाकर हर रोज देर हो रही होती थी।
कोचिंग क्लासेज शहर के पॉश इलाके में एक बड़ी सी बिल्डिंग के चौथे माले पर हुआ करती थी, उस बिल्डिंग के बाहर मेन रोड से लगी हुई एक बड़ी सी पार्किंग थी ।लगभग 100 बच्चे हर दिन यहां पर क्लास के लिए आया करते थे इस वजह से पार्किंग पूरी भर जाया करती थी ।अगर देर से पहुंचे तो पार्किंग में जगह मिलना बहुत मुश्किल हो जाता था।
एक दिन सीमा और गीता रोज से भी ज्यादा लेट पहुंचे। गीता को अपनी गाड़ी पार्किंग में लगानी थी। जैसे तैसे उसे एक जगह थोड़ी सी गुंजाइश नजर आई तो उसने अपनी गाड़ी वहां पर लगाने की कोशिश की। लेकिन उसकी गाड़ी के पास में किसी ने बहुत ही स्टाइलिश, नॉर्मल साइज से बड़े साइज की मोटरसाइकिल पार्क की हुई थी। जिसकी वजह से गीता को गाड़ी पार्क करने में मुश्किल हो रही थी। उस मोटरसाइकिल को देखकर गीता को बहुत गुस्सा आ रहा था वह मुंह में बड़बड़ करे जा रही थी ,,'पता नहीं लोग क्यों इतने बड़े-बड़े हाथी खरीद लेते हैं,' और लेकर भी आ जाते हैं, और पार्किंग में लगा भी देते हैं ,कब समझ आएगा लोगों को। इतना सब वह बोले ही जा रही थी ,जैसे तैसे उसने उसकी गाड़ी उस बड़ी सी मोटरसाइकिल के पास में लगाई । जैसे ही पीछे हटी, उसने देखा एक सफेद शर्ट और ब्लैक पेंट पहने हुए, लंबा सा, गोरा सा, मूँछ वाला लड़का पीछे खड़ा होकर मुस्कुरा रहा था। जब गीता अपनी गाड़ी लगा रही थी तब उसने उस मोटरसाइकिल को थोड़ा सा साइड में खिसका कर मदद की थी। गीता ने उसके ऊपर ध्यान ना देते हुए जल्दी-जल्दी कदम बढ़ाए क्योंकि, क्लास के लिए लेट हो रहा था । जब वे दोनों क्लास के लिए ऊपर जा रहे थे तब वह लड़का भी उनके पीछे-पीछे आ रहा था। दोनों ने ही ध्यान नहीं दिया। सीढ़ियों पर पर चढ़ते हुए गीता, सीमा को बता ही रही थी कि उसे गाड़ी पार्क करने में मुश्किल हो रही थी और एक लड़का यह सब देख कर मुस्कुरा रहा था। तभी उसने पीछे देखा वही लड़का खड़ा है और एक बार फिर वह सकपका गई।
क्लास पूरी हो गई दोनों नीचे वापस आए गीता अपनी गाड़ी निकालने के लिए पार्किंग में गई तो उसने देखा कि, वही लड़का उस बड़ी सी मोटरसाइकिल को पार्किंग से बाहर निकालकर उसकी आंखों के सामने से चला कर ले गया। मतलब वह बड़ी सी मोटरसाइकिल उसी की थी ,गीता एक बार के लिए तो अपने शब्दो के लिए लज्जित हो गई क्योंकि उसने उसके सामने बहुत कुछ उल्टा सीधा बोला था। पर वह लड़का जिस तरह से गीता की तरफ मुस्कुराकर बाय करके चला गया, उससे वो चिड़ गई थी। सीमा दूर से खड़ी सब देख रही थी। उसने गीता को मजे लेते हुए कहा, कौन था वो , तू जानती है क्या उसको?गीता उस लड़के के इस तरह से हाथ मिलाकर बाय करके जाने से बहुत चिढ़ रही थी जैसे कि वह उसका मजाक बना रहा था। वह बोली जाने दे ना, मुझे उसके बारे में कोई बात नहीं करनी।
उसके बाद उस लड़के की आंखें हमेशा गीता को फॉलो करती रहती। यह बात गीता और सीमा भी अच्छे से जानती थी। चाहे लिफ्ट में साथ में जाना हो ,या सीढ़ियों से उतरना, या क्लास में बैठना ,लड़का हमेशा गीता के आसपास ही होता था। वह क्लास में भी गीता के ठीक पीछे ही बैठा करता था। उसके दिखते ही सीमा हमेशा गीता को चिढ़ाया करती थी, "देख तेरा आशिक आ गया" और गीता यह सुनते ही चिढ़ जाया करती थी। उस लड़के का नाम राज था। लेकिन सीमा और गीता उसे लंबू कहकर बुलाया करती थी।
इस बीच एक दिन ऑफिस में गीता ने सीमा को बताया कि एक लड़के ने उसे बहुत परेशान कर रखा है हर जगह उसकी गाड़ी के पीछे पीछे आता है , जानबूझकर गीता की गाड़ी के पास अपनी गाड़ी लगाता है और हर बार गीता की गाड़ी में कोई तो चिट्ठी रख कर चला जाता है ।उस चिट्ठी में ज्यादा कुछ नहीं लिखा होता ,बस यही कि वह उससे मिलना चाहता है। सीमा गीता की परेशानी समझ रही थी। दोनों इतनी बात करते हुए एक कॉफी हाउस पहुंचे। कॉफी हाउस में सीमा और गीता पहली बार गए थे दोनों ने कॉफी के अलावा इडली सांभर मंगवाया और अपने आर्डर का आने का इंतजार कर रहे थे। तभी सीमा ने गीता की ओर देखा तो उसके चेहरे का रंग पूरा उड़ चुका था, चेहरे पर पसीने की बूंदें थी ।उसने पूछा, तुझे क्या हुआ, बोल ना क्या हुआ है? तभी गीता दबे हुए आवाज में कांपते हुए बोली, सामने देख वही लड़का आ रहा है । तब वह 50 मीटर की दूरी पर था। उसके कदम धीरे-धीरे गीता की ओर बढ़ रहे थे। और वह क्षण भी आ गया जब वह गीता और सीमा के सामने खड़ा था। उसने बड़ी हिम्मत के साथ गीता को कहा कि आपका नाम क्या है? मुझे आपका नंबर चाहिए। गीता एकदम सुन्न पड़ गई उसके मुंह से कोई शब्द नहीं निकल रहा था। स्थिति को भांपते हुए सीमा बीच में बोली, आप कौन हैं? और आपको इनका नंबर क्यों चाहिए? लड़का देखने में सभ्य परिवार का ही लग रहा था। लेकिन गीता सीमा के साथ में पहली बार हुआ था कि किसी ने सीधे आकर उनसे बात की हो और इस तरह से फोन नंबर मांगा हो। सीमा ने बागडोर संभालते हुए आगे कहा कि आपको इनका नंबर क्यों चाहिए ?तो उस लड़के ने कहा कि यह मुझे पसंद है और मुझे इन से बात करनी है। तब सीमा ने कड़क आवाज में कहां इनको आप पसंद नहीं हो। और इन्हें इस तरह से परेशान करना इनकी मम्मी और भाई को पसंद नहीं आएगा और वो आपके लिए अच्छा नहीं होगा। आप इन्हें परेशान करना बंद कीजिए। तब तक गीता थोड़ा संभली और उसने कहा, मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी, आप जाइए यहां से ।अब सीमा का टाइम था, उसने और गुस्से के साथ बोला ,आपने सुन लिया ना इनके मुंह से भी अब जाइए यहां से। यह पहली बार नहीं था जब सीमा ने गीता को इस तरह के हालातों में बचाया हो। उस लड़के के जाने के बाद सीमा ने गीता को समझाया कि तुझे अपने मामलों में खुद खड़े होना होगा अपना आत्मविश्वास रखकर इस तरह के लोगों को सबक सिखाया कर।
कुछ दिनों बाद वैलेंटाइन डे वाले दिन गीता और सीमा को क्लास जाना था, पर एक डर सा था। वैलेंटाइन डे का माहौल अजीब होता है ,कोई भी लड़का किसी भी लड़की को आकर प्रपोज कर देता है और एक अजीब सी स्थिति बन जाती है। क्लास पूरी होने तक दोनों के साथ इस तरह का कूछ हुआ। दोनों को इस बात का मन में सुकून था। यहीं बात करते हुए वह दोनों घर जाने के लिए गाड़ी नीचे पार्किंग में से निकालने पहुंची। क्योंकि भीड़ ज्यादा थी तो सीमा बाहर ही खड़ी थी और पार्किंग में गीता गाड़ी निकालने के लिए गई। जैसे गीता अपनी गाड़ी के पास पहुंची तो ,वहां उसने पीछे देखा कि राज खड़ा है और उसे देख कर मुस्कुरा रहा है ।वह अपने दो और दोस्तों के साथ खड़ा था। धीरे-धीरे गीता की ओर बढ़ा । उसके हाथ में एक कार्ड था। उसने वह कार्ड गीता के हाथों में दिया, गीता कांप रही थी उसके चेहरे पर पसीना था, उसकी नजर सीमा की ओर देख रही थी कि सीमा उसकी मदद करने आए।पर सीमा ने भी सोच लिया था कि आज का मामला उसे ही संभालना होगा। राज ने वह कार्ड गीता को दिया और कहा कि "अगर आप आएंगी तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा।"गीता ने बिना कुछ कहे हाथ में कार्ड पकड़े हुए पीछे मुड़ा और गाड़ी निकाल कर सीमा के पास आ गई । सीमा के पास आते ही वो गुस्से और घबराहट से बोली, तूने ऐसा क्यों किया मेरे साथ ?तूू आयी क्यों नहीं मेरी मदद करने? तुझे पता है ना मैं ऐसे मामले नहीं संभाल सकती। सीमा ने बोला अच्छा यह सब छोड़ और बता हुआ क्या। गीता बोली अभी चल यहां से ,घर चल कर बताती हूं , क्योंकि राज यह सब देख रहा था। गीता घबराहट के कारण गाड़ी चलाने की स्थिति में नहीं थी। इसलिए आज गीता की गाड़ी सीमा चला कर उसके घर तक लेकर आयी ।घर आकर दोनों एक कमरे में बंद हो गए ।तब गीता ने अपने बैग से वह कार्ड निकाल के सीमा को दिखाया। वह एक शादी की निमंत्रण पत्रिका थी। उस कार्ड पर बाहर गीता कुमारी एवं रीमा कुमारी लिखा हुआ था। उसे देखते ही सीमा सबसे पहले तो यह बोली कि यार, तू लंबू को बता मेरा नाम रीमा नहीं सीमा है। गीता बोली मजाक छोड़, यह सब क्या है ,मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है। सीमा बोली यह उसकी बहन की शादी का कार्ड है और वह तुझे उसकी शादी में बुला रहा है। जाना या नहीं जाना यह तो तेरा फैसला है। गीता बोली, तू पागल है क्या, इस सब में मेरी कोई रुचि नहीं है। मैं ऐसे किसी की शादी में नहीं जाने वाली हूं। सीमा बोली अगर नहीं जाना था तो तूने कार्ड लिया ही क्यों? तुझे मना कर देना था वहीं पर। गीता बोली मुझे उस समय कुछ समझ नहीं आया, बस मुझे वहां से निकलना था । दोनों ने निश्चित किया कि वह शादी में नहीं जाने वाले हैं ।इसके बाद दोनों अपनी अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गए और इस बात को भूल गए। लेकिन उन्होंने एक बात नोटिस की कि उस दिन के बाद से राज ने क्लास में आना बंद कर दिया इसके बाद वो कभी दिखाई नहीं दिया।
आज का दिन
यह सब सीमा सोच रही थी, तभी दरवाजे पर घंटी बजी गीता आ गई थी ।बहुत ही बदली हुई लग रही थी। 15 साल बाद दोनों सहेलियों ने एक दूसरे को देखा और सीधे गले लग गई। गीता का लुक बहुत बदल गया था। सीधी-सादी से रहने वाली गीता आज पूरा मेकअप करे हुए थी। आंखों में नीले रंग लाइनर , ब्राउन लिपस्टिक , बालों में अच्छा सा बक्कलऔर सुंदर सा सूट पहने हुए थी। उसे देखते ही सीमा बोली, अरे वाह ,मेकअप से भागने वाली गीता इतने मेकअप में। तभी गीता बोली, नहीं यार, आज बैंकर से मीटिंग थी सीधा वहीं से आ रही हूं। इसलिए थोड़ा बहुत लगा लिया है। गीता बोली सीमा तू भी तो कितना बदल गई है ।सीमा की शादी विदेश में हुई थी। वहां के रंग ढंग में वह बदल चुकी थी ।बाल सीधे करवा लिए थे और कलर करवाये हुए थे। पहनावा भी मॉडर्न हो चुका था। तभी सीमा ने कहा हां भाई, आज भी कितनों ही दिलो को घायल कर सकते हैं। इतना कहते दोनों खिलखिला के हंस पड़े। दोनों ने पुरानी ढेर सारी यादों को मिलकर ताजा किया। खाना खाकर ,मम्मी पापा से सब से मिलकर गीता अगले दिन की कांफ्रेंस में जाने के लिए सीमा को टाइम पर तैयार रहने की हिदायत देकर घर चली गई।
अगले दिन सुबह कॉन्फ्रेंस में दोनों टाइम पर पहुंच गई। गीता और सीमा कई उन लोगों से मिली जो क्लास के टाइम के दौरान उन्हें लाइन मारा करते थे ।अब सभी सभी प्रोफेशनल हो चुके थे और उच्च पदों पर आसीन थे। एक उम्र के बाद उन सभी लोगों से मिलना थोड़ा अजीब लग रहा था ।साथ ही पुरानी यादें रोमांच भी भर रही थी।
गीत और सीमा को एक दूसरे से ढेर सारी और बातें करनी थी। इतने सालों बाद मिले किसके जीवन में क्या हुआ? गीता ने शादी नहीं की थी उसकी उम्र 42 की हो गई । की शादी 21 साल की उम्र में ही हो गई थी ।सीमा का प्रोफेशनल कोर्स जल्दी पूरा हो गया था। गीता के ऊपर कुछ पारिवारिक समस्याओं के कारण उसका कोर्स पूरा होने में देरी हो गई थी और धीरे-धीरे शादी के कई रिश्ते आये लेकिन कुछ बात कही बन नहीं पाई ।गीता अब एक बहुत बड़ी कंपनी की है मैनेजिंग डायरेक्टर थी।
कॉन्फ्रेंस कुछ समय अटेंड करने के बाद दोनों ने सोचा कि चलो बाहर चलकर बैठते हैं और कुछ बातें करते हैं। दोनों बाहर पार्किंग में आई एक दूसरे को अपना सुख दुख बता रही थी सीमा ने उसकी शादी से संबंधित समस्या है उसके स्वास्थ्य की समस्याएं और उसका अकेलापन जैसी कई बातों को शेयर किया ।गीता ने बताया कि शादी नहीं कर पाने से उसे कितने तरह के ताने लोगों के सुनने पड़ते हैं, उसके मां-बाप भी कितना दुखी है ।उसने शादी नहीं की उससे उसे कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता वह उसकी जिंदगी में सफल है। पर दुनिया इतनी आसान नहीं है अगर उसे ऑफिस में प्रमोशन मिलता है तो लोग उसे भी अलग नजर से देखने लगते हैं ।एक अकेली लड़की अगर सफल है तो उसने कोई गलत रास्ता अपनाया होगा ,इन सब बातों से उसे बहुत दुख पहुंचता है। इतना कहते हुए गीता की आंखों में आंसू आ गए। सीमा ने गीता को समझाया तू इन सब बातों पर ध्यान मत दिया कर ।तू जो कर रही है वह बहुत मुश्किल काम है ,इतनी बड़ी कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्टर बनना और सब कुछ संभालना आसान नहीं है।
दोनों सहेलियां यह सब बातें करके वापस कांफ्रेंस में जा रही थी तभी गीता का दुपट्टा एक बड़ी सी गाड़ी के बाहर वाले मिरर में फंस गया। गीता फिर से बोली ,ना जाने कैसे-कैसे लोग होते हैं ,जो अपनी गाड़ी का मिरर इस तरह से बाहर टेढा छोड़ देते हैं ,लोगों को कब समझ में आएगा। उसका दुपट्टा उसमें पूरी तरह से फंस गया था, तभी एक हाथ उसकी ओर बड़ा और धीरे से उसका दुपट्टा निकाल दिया। पीछे पलट कर देखा तो गीता के होश उड़ गए ।उसके सामने वही लंबा सा लड़का खड़ा था और इस बार फिर से उसने उसकी गाड़ी के बारे में उल्टा सीधा बोला था। राज पहले की तरह मुस्कुरा दिया। उसने हेलो कहा।गीता कुछ जवाब नहीं दे पाए और बहुत तेजी से आगे बढ़ गई। सीमा भी आगे बढ़ी रही थी कि राज ने आवाज देकर कहा ,सीमा जी मुझे कुछ बात करनी है। सीमा को समझ नहीं आया कि इसे मुझसे क्या बात करनी है ,लेकिन फिर भी वो रुकी। बात खत्म करने के बाद जब वह गीता के पास वापस पहुची, तो गीता ने बहुत ही गुस्से से कहा कि तू उसके पास क्यों रुकी थी, क्या बात करनी थी तुझे उससे? सीमा बोली कुछ नहीं चल।
दरअसल राज ने सीमा से जो कहा उसे सुनकर सीमा ने सोचा इस वक्त गीता को कुछ भी ना कहना ही सही होगा। राज ने कहा सीमा जी मुझे आपकी मदद चाहिए। मैं गीता जी को 16 सालों से चाहता हूं। वह अगर मेरी बहन की शादी में आती है तो मेरा पूरा परिवार उनका इंतजार कर रहा था स्वागत करने के लिए।उनके शादी में ना आने के बाद मैं बहुत उदास हो गया। घरवालों ने मुझे जोर दिया कि मैं शादी कर लूं पर मेरे दिल में सिर्फ उनके लिए ही जगह है।मैं जानता हूं कि गीता की भी शादी नहीं हुई है। अगर आप मेरी मदद करें तो यह रिश्ता मुकम्मल हो सकता है। पहले तो सीमा को समझ नहीं आया कि यह जो कह रहा है सच है? फिर कुछ सोचकर सीमा ने कहा आप पहले अपने घर वालों के साथ मिलकर गीता के घरवालों से मिले या फोन पर बात करें अगर सब कुछ ठीक लगता है तो मैं जरूर आपकी मदद करूंगी।
राज और उसके परिवार गीता और उसके परिवार से मिला दोनों को ही है रिश्ता सही लगा। पर अब गीता को उसके लिए मनाना था, और यह काम सीमा को ही करना था।
गीता और सीमा साथ में पाव भाजी खाने गई ।वहां सीमा ने गीता से कहा कि तुझे शादी कर लेनी चाहिए। तू बता तुझे कैसा लड़का चाहिए। गीता बोली बहुत मुश्किल है यार, 40 की उम्र पर जो भी मिलते है भी मिलते हैं वो या तो विदुर होते हैं, यह कम पढ़े लिखे कोई बिजनेसमैन या किसी के परिवार में कोई समस्या है ।कहने का मतलब यह है कि कोई ना कोई कॉम्प्रोमाइज करना होता है। सीमा ने गीता को छेड़ते हुए बोला अच्छा तो अगर कोई तुझे ऐसा मिल जाए जो जो बहुत ही पढ़ा लिखा हो, अपने प्रोफेशन में सफल हो ,जिसका परिवार भी अच्छी साख रखता हो ,जो तुझे नौकरी करने दे ,और उससे ज्यादा जरूरी है जो तुझे बहुत प्यार करे तो क्या तू शादी कर लेगी ? गीता ने हंसते हुए कहा, हां तो मुझे क्या प्रॉब्लम होगी।
दोनों खाना खत्म करके गीता के गाड़ी से गीता के घर आए क्योंकि सीमा को जाने से पहले गीता के मम्मी पापा से भी एक बार मिलना था। दोनों जैसे ही घर के अंदर दाखिल हुए तो गीता एकदम चौक गई क्योंकि राज और उसका परिवार वहां आया हुआ था और गीता के मां-बाप और राज के मां-बाप बहुत हंस-हंसकर के आपस में बातें कर रहे थे। गीता को एक बार के लिए कुछ समझ नहीं आया वह आए हुए मेहमानों को नमस्ते करके सीधे अपने कमरे में चली गई। सीमा भी उसके पीछे पीछे आयी और उसने गीता की आंखों में आंखें डाल कर कहा कुछ समझ आया।
गीता सांवलिया नजरों से सीमा की ओर देख रही थी। तब सीमा ने कहा शांत हो जा, पूरी बात सुन ,तब उसने पार्किंग लॉट में राज और उसके बीच हुई सभी बातें गीता को बताई।
तभी राज भी वहां पर आ गया और उसने बहुत ही सरल और साफ शब्दों में गीता को कहा कि गीता जी मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं और बहुत वर्षों से आपकी प्रतीक्षा कर रहा हूं अगर आप ठीक समझे तो हम इस विषय को आगे बढ़ा सकते हैं। गीता कुछ बोल नहीं पा रही थी। तभी गीता की मम्मी कमरे में आई उन्होंने राज के सर पर हाथ रख कर कहा गीता हम सब की भी यही इच्छा है। गीता को भी इस रिश्ते को एक मौका देना सही लगा ।दोनों ने सगाई के बाद एक दूसरे को जानना शुरू किया और उनकी शादी का दिन भी आ ही गया।
गीता की बारात दरवाजे पर खड़ी थी तभी सीमा दौड़ती हुई आई और बोली "देख तेरा आशिक आ गया" और दोनों फिर से खिलखिला कर हंस पड़ी।

