मुक्ता
मुक्ता
अरे, साहिबा सुनो, ये शगुन है, ऊपर एक बैड खाली था न वो आज से इसका होगा। इसे ऊपर ले जाओ और बाकी सब से भी मिला दो।" पी जी वाली आन्टी ने ऊपर जाती हुई साहिबा को आवाज देकर कहा।
"सुनो सूनो सुनो कमरे में चौथा पंछी पहुंच चुका है पुराने पंछी स्वागत के लिए आ जाओ।" कह कर खिलखिला के हंस दी थी साहिबा। पहले एक लड़की आई जिसने फेसपैक लगा रखा था, तभी चिटकनी खुलने की आवाज के साथ दूसरी लड़की प्रकट हो गई और तीसरी जो कानों में इयरफोन ठूंसे बैठी थी को साहिबा ने इशारे से बुलाया।
" ये शगुन है आज से ये भी हमारे धमाल कुनबे की एक अदद सदस्य और शगुन ये फेसपैक से पुती हुई हमारी शिवानी है. ये जो बालों में तौलिया लपेटे खड़ी है ये है मिस मुक्ता और इस खाकसार का नाम तो आप नीचे आंटी मधुर वाणी में सुन ही चुकी हो।" साहिबा नाटकीय अंदाज में बोली। आधे घंटे में ही शगुन को वो कमरा अपना सा लगने लगा था।
"तुम्हारा नाम बहुत प्यारा है मुक्ता।" शगुन ने कहा।
"थैंक्स यार मुझे मालूम है. बहुत लोग ये बात मुझे कह चुके हैं।" मुक्ता ने मुस्कराते हुए कहा।
"चलो इसी बात पर इसे"मुक्ता" नाम की कहानी सुनाई जाये, चलो मुक्ता टेपरिकार्डर शुरू हो जाओ। " शिवानी ने चहकते हुए कहा।
"तो आज तुम ही सुना दो ना कितनी बार तो सुन चुकी हो। "मुक्ता ने शिवानी से कहा।
"अरे जिस आनंद रस में डुबा कर तुम सुनाती हो, वो हमारे पास कहाँ? "शिवानी ने इसरार करते हुए मुक्ता से कहा।
"चल ठीक है. हाँ तो शगुन मेरी एक दीदी है पूजा और दीदी के दो साल बाद मेरा जन्म हुआ। दादी मेरी पैदाइश से खुश नहीं थी। और अपनी किसी सहेली के कहने पर मेरी दादी ने मेरा नाम रखा *मुक्ता*, यानि जिस घर में मुक्ता वो घर लडकियों से मुक्त। मम्मी-पापा को दादी की दलील तो पसंद नहीँ आई पर नाम पसंद आ गया था क्योंकि मुक्ता का एक अर्थ मोती होता है और पापा अक्सर मुझे सुच्चा मोती कह के बुलाते थे। बेशक दादी ने अपनी नापसंदगी के चलते मुझे ये नाम दिया पर उनके अंतिम दिनों में उनकी लाडली मैं ही हो गई थी। "दादी की बात करते वक्त मुक्ता थोड़ी भावुक हो गई थी।
"बस.? "शगुन ने पूछा।
"आगे सुनो तो. फिर मेरा भाई पैदा हुआ विश्वास। "
"मतलब तुम्हारी दादी की सहेली की बात सच निकली। " शगुन के मुँह से निकला।
"हाँ ।"
"ये तो बढ़िया तरीका है.. आज ही मौसी को फोन करती हूँ उनकी बेटी को पन्द्रह दिन पहले ही दूसरी बेटी हुई है.. मौसी को बोलती हूँ उसका नाम मुक्ता रख दे।" शगुन ने उत्साहित होते हुए कहा।
"जरा रुको बहना. अति उत्साहित होने की जरूरत नहीं.. कहानी अभी बाकी है दोस्त।" शिवानी ने संजीदा होने का अभिनय करते हुए कहा।
"अच्छा. फिर आगे....?" शगुन ने प्रश्न वाचक निगाहों से मुक्ता की ओर देखा।
"तुम्हारी तरह दादी को लगा नाम का टोटका काम कर गया।" मुक्ता ने मुस्कुराते हुए कहा।
"फिर हमारे पडोस में शर्माणी आण्टी के यहाँ पोती हुई.... उसका नाम मुक्ता रखा गया। दो साल बाद फिर से पोती हो गई तो पहली पोती का नाम ज्योति कर दिया गया और दूसरी का मुक्ता। और फिर. ।"
"क्या तीसरी भी पोती. और फिर उसका नाम मुक्ता ?"
"हाँ जी.. एकदम सही पकडे़ हो।" कह कर शिवानी जोर से हँसी।
सभी लड़कियों के हँसने की आवाज़ नीचे तक आ रही थी।
