Travel the path from illness to wellness with Awareness Journey. Grab your copy now!
Travel the path from illness to wellness with Awareness Journey. Grab your copy now!

Raju Kumar Shah

Tragedy Classics

4.5  

Raju Kumar Shah

Tragedy Classics

मिलन!

मिलन!

2 mins
223


एक गहरे से गड्ढे में रुका हुआ पानी, जो बहता नहीं था ! बगल से कलकलाती नदी बहा करती थी, जिसकी बहावट की आवाज से, गड्ढे का पानी रोमांचित होता रहता ! वह चाहता था कि बहती नदी के धाराप्रवाह जल में जाकर समा जाए ! लेकिन रुके हुए जल के लिए रास्ता कौन बनाता, नदी से मिलने के लिए !

सालों से सूखे की मार झेलता गढ्ढे का पानी अपनी गहराई को खोने लगा ! धीरे धीरे यह लगने लगा कि वह, जल्दी सूखकर अपने अरमानों को अपने दिल में लिए, लुप्त हो जायेगा ! जो लालसा मन में थी, उसका अस्तित्व खत्म होने की कगार पर था ! उसके मन की गर्मी ने भी उसका पानी सोखना तेज कर दिया ! गहरे गड्ढे का पानी सिमटकर चंद अंजूलियों जितना रह गया था ! इतना कम की गहरे गड्ढे में किसी का पैर पड़ जाय तो उसका दम निकल जाए !

लेकिन तभी कमाल हो गया ! गहरे गड्ढे का रुका हुआ जल, जो वाष्प बनकर आकाश की गोद में किलकारी मार रहा था, जो उसी रुके हुए पानी का कुछ हिस्सा था, उसे प्राण गवाते गढ्ढे के पानी का दर्द देखा नही गया ! मचलता वाष्प, ठीक सूखते जल के सिर पर इक्कठा हो गया और जम कर उसके हालात पर रोया, इतना रोया की वाष्प का आस्तित्व ही मिट गया लेकिन तब तक, गढ्ढे का सूखता जल लबालब भरकर अपने गर्त से बाहर निकल गया ! और सीधे नदी के कलेजे में समा गया !

लुप्त होते जल की चाहत मिल गई ! वाष्प अपना रूप बदलकर पुनः अपने जल में सम्माहित हो गया ! लेकिन वह गहरा गड्ढा आज भी अपनी जगह है ! आज भी उसमें जल एकत्रित है जिसका सिरा नदी के बहाव से टूट गया है। पर नए जल का नया अरमान, उसी कलकलाती नदी की आवाज सुनता है, उसके दिल में भी चाहत उभरती है कि काश वह नदी से मिल पाता ! लेकिन ! क्या पता इस बार नया वाष्प आए या न आए !


Rate this content
Log in

More hindi story from Raju Kumar Shah

Similar hindi story from Tragedy