Raju Kumar Shah

Tragedy

4.6  

Raju Kumar Shah

Tragedy

दुआ की जरूरत

दुआ की जरूरत

1 min
554


पच्चीस साल में आज पहली बार मंदिर की सीढ़ियां चढ़ी थी मैंने, बस इस आस में कि बिस्तर पर पड़ी माँ की तकलीफ़ें आंख से देखी नही जा रही थी। डॉक्टर्स ने जवाब दे दिए थे!


मंदिर की सीढ़ियों पर पड़े, असहाय, निरीह, लाचार सी आँखें और दयनीय हाथों ने मेरे कदमों को वापस मोड़ने की कोशिश की। पर माँ के ठीक होने की दुआ करने की लालच ने मेरे पैरों को मुड़ने नही दिया।


और घर पहुँचने पर पता चला कि जिसके लिए मैंने दुआ की, अब उसे किसी भगवान के दुआ की जरूरत नही थी!





Rate this content
Log in

Similar hindi story from Tragedy