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V. Aaradhyaa

Inspirational

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V. Aaradhyaa

Inspirational

मैं अब प्राइस टैग नहीं देखती

मैं अब प्राइस टैग नहीं देखती

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 "मम्मा! जल्दी चलो ना... फिर ऑफर खत्म हो जायेगा एंड डिस्काउंट भी!"नन्हीं चीनू ने अपनी मां को जिद करते हुए कहा।


संडे का दिन चीनू के लिए बहुत ही खुशी और एक्साइटमेंट से भरा होता था। क्योंकि इस दिन वह और उसकी मम्मी आभा जाकर पूरे सप्ताह का सामान लेकर आते थे। और कई ऑफर के तहत उसे कभी चॉकलेट या चिप्स के पैकेट मिल जाते। तो कभी कुछ खास डिस्काउंट मिल जाता था तो चीनू की खुशी का ठिकाना नहीं रहता था।


पिछली रात आभा को उठने में थोड़ी देर हो गई थी। कल देर रात तक वह ऑफिस का काम करती रहे थी इसलिए सुबह एकदम उठने का मन नहीं कर रहा था। अलसाई सी पड़ी हुई थी। लेकिन जब उसने देखा बिटिया तो नहा धोकर तैयार हो गई है तब उसमें भी थोड़ा नवजीवन का संचार हुआ और चाय बनाकर हल्का नाश्ता कर दोनों मां बेटी बिग बाजार के लिए निकल पड़े।


रास्ते भर चीनू अपनी मां को बताती रही कि आज वह कौन सा चिप्स लेगी और कौन सा बिस्कुट खाए हुए उसे बहुत दिन हो गए हैं। और चॉकलेट का छोटा सा ही पैकेट लेगी लेकिन आज तो उसे लेना ही है क्योंकि उसको यूनिट टेस्ट में मैथ्स में और इंग्लिश दोनों में हाईएस्ट मार्क्स आए हैं।


जब सारा सामान ले चुके तब अचानक चीनू को फ्रूट जैम पर नजर पड़ी और उसने उसका बड़ा बोटल उठा लिया।


आभा ने कहा कि ,"बेटा यह जेम अच्छा है तो सही। लेकिन क्या इसका कोई छोटा पैकेट नहीं है यह तो बहुत महंगा है!"


चीनू एकदम उदास हो गई आज पता नहीं चीनू के मुंह से कैसे निकल गया वैसे वह ऐसी बातें अधिकतर अपने मां के सामने नहीं कहती है क्योंकि इससे मां का दिल दुखता है और मां बहुत उदास हो जाती है फिर कई दिनों तक मां शेर ऑटो में आना-जाना करती है ताकि पैसे बचे और चीनू की फरमाइश की हुई चीज ला सकें।आज जिन्होंने कह दिया आप तो हमेशा कोई भी चीज लोग तो सबसे पहले प्राइस टायर देखती हो और महंगी चीज नहीं ले देती हमेशा सस्ती चीज के चक्कर में रहती हो पापा होते तो ऐसा नहीं होता पापा मुझे कभी भी किसी चीज के लिए मना नहीं करते थे आप तो मामा बहुत कंजूस हो कंजूस!"


बोलने को तो चीनू बोल गई अगले ही पल जब उसने अपनी मां के चेहरे की तरफ देखा एक बेबसी और विचार घी का भाव था और आभा को देखकर लग रहा था उसकी आंखें अब रोई की तब रोई।फिर आभा ने कुछ और सामान की कटौती कर कर जैम का वह पैकेट बच्चे के लिए ले लिया।


आभा और आकाश ......


जब उनकी शादी के कार्ड पर इन दोनों का नाम था तो उनके यार दोस्त सभी इस जोड़ी की बहुत तारीफ कर रहे थे।हो भी क्यों ना .....?आखिर तीन साल के प्यार के बाद दोनों ने शादी का निश्चय किया था। और दोनों के परिवार वाले इससे खुश नहीं थे।वजह वही था अंतरजातीय विवाह।आभा ब्राह्मण परिवार की थी और आकाश कायस्थ परिवार का। लेकिन दोनों के मन मिले हुए थे और साथ काम करते हुए दूसरे से इतना जुड़ गए थे उन्हें साथ रहने के लिए बस विवाह ही एकमात्र विकल्प नजर आया था।

आकाश आभा की जगह किसी और को नहीं दे सकता था और ना ही आभा आकाश को छोड़कर किसी और को अपना पति मान सकती थी। इसलिए दोनों ने माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध जाकर शादी कर ली थी

नतीजा यह हुआ था कि ....दोनों के माता पिता ने उनसे संबंध तोड़ लिए थे। आभा के घर में तो खैर उसके कट्टर ब्राह्मण पिता थे, जो माफ करने वालों में से नहीं थे। उसकी मां बचपन में ही चल बसी थी इसलिए आभा का दुख इतना बड़ा नहीं था जितना कि आकाश का।


आकाश का तो भरा पूरा परिवार था। तीन भाई और एक बहन में वह सबसे बड़ा था। और तब जाकर उसने ऐसा रिस्क लिया था। इसलिए परिवार वाले उससे बहुत नाराज थे।तो है आभा के भाग्य को किसी की नजर लग गई तभी तो कालांतर में एक सड़क दुर्घटना में आकाश की मृत्यु हो गई और आभा की दुनिया अंधेरी हो गई।उसकी नौकरी से जितने भी पैसे मिलते थे वह घर की ईएमआई और गाड़ी का किस्त भरने में चला जाता था।

तब तक आकाश था तब दोनों बहुत ही लग्जरी भरी जिंदगी जीते थे।


कदाचित माता पिता का साथ नहीं रहने की वजह से उस कमी को घूम फिरकर अच्छा खाना खाकर पूरी करने की कोशिश करते थे।यहां तक तो ठीक था लेकिन जब आकाश इस दुनिया से चला गया तब चीनू मात्र छः महीने की थी। तब से आभा अकेली अपना और अपनी बेटी का खर्च उठा रही थी।एक बार उसकी पिता आए थे और उसे साथ ले जाने की जिद करने लगे।



आभा ने साफ मना कर दिया क्योंकि उसके दो बड़े भाई थे और अब दोनों की शादियां हो चुकी थी। और घर में बहुएं आ गई थी। उसे पता था वह दोनों भाभियों को खटकेगी और घरवाले उसे तानों से भेद देंगे। ऐसे माहौल में चीनू का विकास भी अच्छे से नहीं हो पाएगा और उसकी परवरिश में वह बात नहीं आ पाएगी जो आकाश अपने बच्चे के लिए सोचते थे।स्वाभिमान से सिर उठाकर नहीं जी पाएंगे आभा और चीनू।


इसलिए उसने अपने पिता के साथ जाने से इनकार कर दिया था जिससे पंडित दया शंकर जी चले गए थे और गुस्से से अपनी पुत्री को कुछ भी दान स्वरूप या फिर कोई गिफ्ट नहीं दिया था। एक फूटी कौड़ी भी नहीं दिया यह सोच कर कि आज ना कल आभा पैसे की कमी का ही सोच कर घर वापस आएगी।


लेकिन वह भी स्वाभिमानी स्त्री थी। उसने भी दुबारा मायके जाने की सोची भी नहीं जहां मान ना हो वहां जाकर करना भी क्या था।


आकाश के घर में भी सब अभी तक सब आभा से नाराज थे। जिसने जादू चलाकर उनके घर के एकमात्र बड़े कमाऊ बेटे को अपने जाल में फंसा लिया था। और अब तो आभा को अपनाने का मतलब था कि उसकी बेटी को अपनाओ और उस बेटी चाहते कल को उसका उसकी शादी का खर्चा भी उठाओ ...इसलिए वह वह लोग भी बिल्कुल अपनेआप को समेटकर बैठ गए थे।


ऊपर से उनके पास यह बहाना काफी था कि ,


"हमलोग अभी तक तुम दोनों के प्रेम विवाह से नाराज हैं। इसलिए हम तुम्हें नहीं अपना सकते। और अब तो हमारा बेटा भी जीवित नहीं तो तुमसे हमारा रिश्ता एकदम खत्म!"हकीकत में वह आभा और चीनी की जिम्मेदारी लेने से कतरा रहे थे।


उस दिन बाजार से आने के बाद आभा बहुत उदास थी और इधर चीनू भी चुप चुप सी थी। उसे वह जैम खाने का मन बिल्कुल नहीं कर रहा था जिसकी वजह से उसने अपनी मां का दिल दुखा दिया था।शाम को अपने लिए एक कप चाय लेकर और चीनू को चॉकलेट मिल्क शेक बनाकर देकर आभा बालकनी में बैठी थी थोड़ी देर में छेद करते करते आवा के पास आए और कहा,


"मम्मा! मेरा आज का होमवर्क कमप्लीट हो गया है। अब मैं अगले टेस्ट की तैयारी कर लेती हूं आप मुझे थोड़ा सा पढ़ा दो!"


आभा का मन आज कुछ अनमना सा था। कदाचित वह अपने सैलरी और खर्चे का हिसाब किताब लगा कर परेशान थी कि ऐसा क्या किया जाए कि चीनू के शौक भी पूरे कर सकूं और बिटिया को हर चीज में चीज में प्राइस टैग देख कर के मन ना मारना पड़े।अभी आधा को उठने का मन नहीं था इसलिए उसने चीनू को कहा,


"बेटा ! अभी कल तो आपका टेस्ट हो गया है ना। अब तो सात दिन के बाद अगला टेस्ट है ना ? तो आज से ही क्यों पढ़ रही हो। कल पढ़ा दूंगी या फिर परसों पढ़ा दूंगी!"


"नहीं मम्मा! मुझे आज ही पढ़ना है। मुझे अपनी क्लास में सबसे आगे रहना है ।जो बच्चे सबसे आगे रहते हैं उन्हें बड़े होकर स्कॉलरशिप मिलती है और अगर मैं अच्छे से पढूंगी तो आगे जाकर बहुत अच्छी नौकरी भी मिलेगी। क्योंकि जब मेरी प्रोफाइल अच्छी होगी तो मुझे नौकरी भी अच्छी मिलेगी और पैसे जब अच्छे मिलेंगे तो मुझे किसी मुझे या आपको कोई सामान खरीदते हुए उसका प्राइस टैग नहीं देखना पड़ेगा!"


आभा चौंक गई। सिर्फ आठ साल की तो थी चीनू, और कितनी बड़ी बात कह गई थी।पल भर में आभा के चेहरे की उदासी दूर हो गई थी। उसकी जगह उम्मीद और आशाओं की किरण झिलमिलाने लगी थी। उसने सोचा,


" जब नन्हीं चीनू अभी से अपना प्रोफाइल अच्छा बनाने की बात कर रही है। तो क्यों ना मैं भी कोई और कोर्स करके अच्छा परफॉर्म करके प्रमोशन लूं और जब मेरी सैलरी बढ़ेगी तब चीनू के शौक भी पूरे कर पाऊंगी। और मेरी बिटिया को सच में अपनी जरूरतों के लिए अपने शौक के लिए प्राइस टैग देखकर मन मसोसकर नहीं रहना पड़ेगा!"


थोड़ी देर बाद .....आभा चीनू को अगले टेस्ट के लिए मन लगाकर पढ़ा रही थी और चीनू भी बड़े मनोयोग से पढ़ रही थी।मां बेटी के आंखों में भविष्य के सुनहरे सपने तैर रहे थे जहां उन्हें अपने शौक और अपनी जरूरतों के लिए किसी डिस्काउंट या ऑफर का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।


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