मासूमियत
मासूमियत
"ओह बोर हो गया हूँ कार्टून देख देख कर माँ भी तो नहीं रहती हैं जो रोज नित नई कहानियां सुनावे या हमारी फरमाइस पर नित नये पकवान बनावे ।"
राजू उदास होकर अपनी आँखें बंद कर वहीं सोफे पर लेट गया।
हे भगवान कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा हूँ ! दुसरे ग्रह से आये मानव पृथ्वी पर किसी को ढूँढ़ने आये हैं। लेकिन जिससे बातें कर रहे हैं वह तो अब इस दुनिया में नहीं हैं !हाँ यह महाभारत काल के पात्र हैं वेशभूषा इनकी आदिमानव सी लगती है।राजू मन ही मन हँसने लगा ; हाहाहा ये मम्मी पापा और दादी के साथ रहते-रहते मैं भी फैंटेसी हो गया हूँ।
सच्चाई एवं हकीकत से दूर , बस ख्वाबों में जीने वाला।दिल की बात किससे कहूँ ?माँ बाहर जाकर खेलने से मना करती हैं।दादी की पौराणिक कहानियां मुझे पसंद नहीं आती हैं।क्या करुँ….?
सोचते सोचते दो बूँद आँसू लुढक पड़े।ओहह...यह इतने प्यार से सहलाते हुए हमें कौन जगा रहा है !राजू आँखें खोल कर समझने का प्रयत्न करने लगा।
"अम्मू आप आप कब आईं ? आप हमें छोड़कर कहाँ चलीं गई थीं ।अब वापस मत जाना तेरा राजू बिल्कुल अकेला हो जाता है। किस्से कहानियों के किरदार हमारी आँखों से नींद चुरा लेते हैं । मैं चैन की नींद सोना चाहता हूँ । लूडो कैरमबोर्ड खेलना चाहता हूँ , मैं अकेलेपन से घबराता हूँ।"उसके माथे को सहलाते हुए अम्मू बोली ; "बस दो मिनट रुको लल्ला मैं वापस आ गई हूँ ।आपकी दादी को एक कप चाय देकर अभी आती हूँ ।"
"नहींईईई पहले मुझे बताईये आप इतने दिनों तक क्यों नहीं आईं ?"
"लल्ला मेरा मुन्ना यानि तेरा भईया बीमार था उसकी सेवा कर रही थी अब वह ठीक हो गया तो मैं वापस आ गई हूँ ।"
"अम्मू अगर मेरा भईया है तो मेरे साथ रहता क्यों नहीं ?देखो मैं कितना अकेला हो गया हूँ। आँखें बंद करते ही कार्टून के करैक्टर और दादी माँ की कहानियों से निकल कर पूराने लोग मुझे डराने आते हैं।"
"ना मेरे बच्चे अब आपको कोई नहीं डरायेगा आपकी अम्मू आ गई है ।"
मन ही मन "तुम खुश रहो लल्ला तभी मेरे मुन्ने का पेट भरता रहेगा ।वह बीमार नहीं होगा।"
