मानसिकता
मानसिकता
मैं सरकारी दफ्तर में प्रशासनिक विभाग में थी।अक्सर नारी मुक्ति पर और लड़कियों की बराबरी पर बहस करने वाले मिस्टर सिंह ने जब अपने नॉमिनेशन फॉर्म भरे तो मैं चौंक उठी उसमें कहीं भी उन्होंने अपनी पुत्री का नाम नहीं डाला था। उन्हें बुलाकर मैंने उन्हें गलती सुधार के लिए प्रेरित किया तो वह बोले कि मैडम मेरी बेटी की शादी हो चुकी है, इसलिए नॉमिनेशन सिर्फ बेटे के ही नाम है। हंसते हुए मैंने कहा अब कभी बच्चों की बराबरी की बात ना करना। विवाहित तो आपका बेटा भी है। अपने ना रहने पर भी आप बेटी को कुछ नहीं देना चाहते। यही आपकी मानसिकता है।
