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Divyanshi Triguna

Romance


3  

Divyanshi Triguna

Romance


लव ट्राई एंगल

लव ट्राई एंगल

5 mins 223 5 mins 223

"एक अनुपम प्रेम कहानी, जिसका वर्णन मेरी जुबानी

एक ऐसा प्रेम है ये, जैसे राधा मोहन दीवानी"

राधा-कृष्ण के प्रेम का वर्णन तो द्वापर युग में मिलता है, लेकिन कलयुग में भी एक राधा कृष्ण के जैसा प्रेम हुआ है। जो संसार के लिए आज भी रहस्य बना हुआ है। दोनों एक-दूसरे को इतना चाहते हैं, जैसे एक साँस तो दूसरा प्राण, एक प्रेमी तो दूसरा प्रेम है। हमारी प्रेम भरी कहानी के बस दो पात्र है- राधिका और श्याम। 

तो बात उन दिनों की है जब राधिका अपने स्कूल में पढ़ा करती थी। श्याम भी उसी स्कूल में पढता था। बस दोनों में कक्षा का ही फर्क था। एक बार स्कूल से बच्चों का टूर गया। उसमे वह दोनों भी गए। वह दोनों स्कूल में दोस्त थे। क्योंकि राधिका बहुत शर्मीले स्वभाव की थी इसलिए वह ज्यादा किसी से बातचीत नहीं करती थी। इसलिए वह श्याम को देखकर शर्माए सी रही। जब टूर वापस आ रहा था, तो दुर्भाग्यवश राधिका की बस छूट गई। वह बस स्टैंड पर अकेले घबराने लगी। क्योंकि सब बच्चे बस में जा चुके थे। तभी वहाँ पर श्याम आ गया। क्योंकि उसकी भी बस छूट गई थी। दोनों एक-दूसरे की तरफ देखने लगे, क्योंकि दोनों की ही बस छूट गई थी। श्याम ने कहा, "अगर आपको ऐतराज ना हो तो आप मेरे साथ दूसरी बस में चल सकती हैं"। पहले राधिका ने कुछ देर सोचा, फिर उसके मन से आवाज आई, भला इंसान जान पड़ता है। साथ चल देना चाहिए और कोई विकल्प भी नहीं है। राधिका श्याम के साथ चल देती है। वैसे तो श्याम भी बहुत अच्छा लड़का है। सज्जन, विनम्र स्वभाव वाला है और सबकी सहायता करने वाला है। वे दोनों वापस आने के लिए वहाँ से चल पड़े। फिर कुछ देर बाद श्याम गीत सुनने लगता है। राधिका को भी वह गीत बहुत पसंद आते हैं। क्योंकि राधिका और श्याम दोनों ही एक-दूसरे को चाहते हैं, लेकिन कभी कहने की हिम्मत नही जुटा सके, इसलिए एक-दूसरे से अनजान हैं। सच मे, वह गीत नही थे, वो तो एक-दूसरे के दिल की बात थी जिसका गीतों द्वारा आदान-प्रदान हो रहा था। खैर, वह दोनों उन गीतों को सुनते-सुनते ही वापस आ जाते हैं। उस टूर के बाद दोनों की दोस्ती और गहरी हो जाती हैं। वहाँ वह गीत ही एक दूसरे की बात सुनने और समझने का बहुत अच्छा जरिया था। श्याम गीत ऐसे ही चला रहा था, जैसे वह राधिका से कुछ कहना चाहता है, पर अपने सज्जन स्वभाव के कारण वह कुछ नहीं कह पा रहा है। फिर भी उनका यह सफर बहुत यादगार रहा। फिर कुछ बाद श्याम स्कूल से निकल जाता हैं। राधिका श्याम को ढूंढती हैं, पर वह उसे कहीं नहीं मिलता। वह जब क्लास के और बच्चों से पूछती हैं तो उसे पता चलता है कि श्याम तो स्कूल से निकल गया हैं। वह नाराज हो जीती हैं कि उसने जाने से पहले मुझे कुछ बताया भी नहीं। किसी कारणवश श्याम को बिना बताए ही वहाँ से जाना पङा। वो दोनों अब जुदा हो चुके थे। मिलने के कोई आसार नहीं आ रहे थे। वो दोनों अलग-अलग उस दिन को याद कर रहे होते हैं, जब उस दिन दोनों बस में थे। दोनों बस एक ही बात सोच रहे थे कि काश! उस दिन अपने दिल की बात कह देते। खैर तीन साल बीत जाते हैं। उसके बाद, उन दोनों के मिलने का समय पास था। उनकी मुलाकात फिर से कालेज में ही हुई। दोनों ने एक ही कालेज मे प्रवेश लिया। दोनों इस बात से अनजान थे। फिर एक दिन राधिका अपनी कक्षा में बैठी हुई थी। कक्षा के सामने से श्याम गुजर रहा था। श्याम की नजर राधिका पर पङी और राधिका के पास जाकर बोला," कैसी हो राधिका?"। पहले तो राधिका चौंक गयी, फिर देखा तो वह श्याम था। श्याम को देखकर राधिका सारी नाराजगी भूल गई और उसे देखकर बहुत खुश हो गई और श्याम से कहा," इतने सालों बाद भी तुम मुझे भूले नही "। श्याम ने कहा," दोस्ती का रिश्ता भूलने के लिए थोड़ी होता हैं"। दोनों की खुशी ऐसी थी, मानो कौन सा खजाना हाथ लग गया हो। दोनों ने बहुत सारी बातें की। फिर दोनों रोज कालेज में एक-दुसरे से मिलने लगे।

मिलते-जुलते वो दिन आ ही गया, जब श्याम ने अपने दिल की बात राधिका को बताई। श्याम ने कहा," मैं बहुत सालों पहले तुमसे कुछ कहना चाहता था। लेकिन कभी हिम्मत ही नहीं हो पाई। पर आज मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूँ कि राधिका, मैं तुम से बहुत प्यार करता हूँ। मैं तुम्हे बहुत चाहता हूँ"। पहले तो राधिका ने कुछ नहीं कहा। फिर कुछ देर बाद, अपनी नजरें उठाकर श्याम को देखा और बोली," तुम नहीं जानते, पर मैं भी तुम्हे बहुत प्यार करती हूँ। बेइन्तहा मोहब्बत करती हूँ तुमसे। लेकिन मेरी भी यह सब कहने की हिम्मत नहीं हुई"। श्याम ने कहा,"सच"। राधिका ने कहा,"सचमुच"। उस समय दोनों के चेहरे पर खुशी और आँखों में प्रेम वाले आँसु, इतने थे कि दोनों एक-दूसरे को रोक नहीं पाए और कालेज में ही एक-दूसरे के गले लग गए। कुछ देर बाद दोनों ने एक-दूसरे के आँसु पूछे और हर परिस्थिति में प्रेम को निभाने का वादा किया।

 दोनों ने एक-दूसरे को बहुत चाहा पर, किसी कारणवश उनकी शादी ना हो सकी। पर दोनों ने मरते दम तक एक-दूसरे को चाहा। केवल इसी ध्येय के साथ कि " हमारा मिलन मन से मन का हुआ हैं, दिल से दिल की शादी हुई हैं"। ऐसा मिलन किसी का हो सकता है भला। दोनों के प्रेम में इबादत थी। वो दोनों एक-दूसरे के दिल मे बसे हुए भगवान थे। 

"राधा के श्याम और श्याम की राधा"। उनका प्रेम हमेशा हमेशा के लिए अमर हो गया। अंत में बस इतना ही कहना है कि ये प्रेम तो एक बहाना था, सभी को प्रेम का सही मतलब जो समझाना था कि "साथ रहना प्रेम नहीं, एक-दूसरे के लिए रहना प्रेम हैं"।



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