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Dr.Shweta Prakash Kukreja

Inspirational


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Dr.Shweta Prakash Kukreja

Inspirational


कत्ल की रात

कत्ल की रात

5 mins 569 5 mins 569

माँ सच कहती थी कि कभी कभी कुछ बातों के मतलब बड़े होकर ही समझ आते है।वह दस साल की थी जब टी.वी. पर निर्भया कांड के बारे में सुना।कुछ समझ नही आया तो माँ से पूछा,"ये बलात्कार क्या होता है माँ?" माँ के चेहरे के भावों को बदलता देख वह समझ गयी कि शायद ऐसा सवाल कर लिया उसने जिसका जवाब माँ के लिए कठिन था।"जब कोई आपको आपकी मर्जी के बिना छुए,कोई ऐसा काम करवाये जो आपको नहीं करना,उसे बलात्कार कहते है।" मुश्किल से माँ ने समझाने की कोशिश की।


"एल्ले, उसमें क्या है,कोई ऐसा करे तो ज़ोर से चिल्लाकर बोलो नहीं।इसमें इतना रोने की क्या बात है?"अपनी नीचे खिसकती स्कर्ट को ऊपर करते हुए वो बोली।

"और जो वो नही माना?ज़बरदस्ती की तब?खैर जब बड़ी हो जाओगी तो खुद बखुद समझ जाओगी।" माँ ये कह वापस काम में लग गयी।


आज प्लेन में बैठे हुए नेहा को माँ की यह बात याद आ गयी।काश कभी बड़ी ही न होती,बस यही सोच रही थी वह।

"औरत हो औरत की तरह रहो।हम मर्दो की बराबरी करने की सोचना भी मत।"साहिल के कहे शब्द फिर उसके कानों में गूंज उठे। साहिल का रिश्ता आया तो पूरा घर नेहा की किस्मत पर फूला नहीं समाया।पढ़ा लिखा, लाखों में वेतन,अमेरिका में खुद का घर,गाड़ी और क्या चाहिए? खुद नेहा भी उसके खुले विचारों और आकर्षक व्यक्तितव से प्रभावित हो चुकी थी।उसकी लिंग भेदभाव औऱ महिला शशक्तिकरण के बारे में सोच ने नेहा को उसका दीवाना बना दिया था।


शादी के बाद सब एक सपने की तरह बीत रहा था जिसमें नेहा खुद को रानी समझ बैठी थी।साहिल के साथ वह सातवें आसमान की सैर कर रही थी।पर एक साल के भीतर ही वह सीधे ज़मीन पर आ गिरी थी।साहिल का एक अनदेखा पहलू उसके सामने आ रहा था।

वह उसे शराब पीने के लिए कहता,पर नेहा मना करती।उस दिन तो उसे ज़बरदस्ती शराब पिला दी।एक पार्टी में जब वह साड़ी पहन तैयार हुई तो उसकी साड़ी ज़बरदस्ती उतरवा दी और एक शार्ट ड्रेस पहनने पर मजबूर किया।पूरी पार्टी में नेहा अपने कपड़े खींचती रही,खुद पर ही शर्म आ रही थी उसे।

जब नानी के गुजरने की खबर मिली तो बेचारी सारा दिन रोती रही।शाम को उसने साहिल से अपना दुख साझा करना चाहा पर साहिल का मन कुछ और ही करने को था।उसके नकारने पर भी वह नहीं माना और गिद्द की तरह उस पर झपट पड़ा।उसे न तो नेहा का दर्द महसूस हुआ और न ही उसकी आँखों से गिरते आँसू।उस दिन एहसास हुआ उसे बलात्कार क्या होता है।भले ही निर्भया की तरह उसका शरीर नोचा नही गया पर उसकी आत्मा चोटिल हुई थी।बिना कपड़े उतारे उसे नंगा किया गया और वह चुप थी।उसने माँ को बताया तो वे बोली कि यह तो पति का हक़ है..बलात्कार नहीं।यह कैसा हक़ हैं जो अपनी पत्नी के दर्द को नहीं समझता।


शादी की सालगिरह थी जब साहिल के आफिस से कुछ दोस्त आये थे।उनके बॉस की नज़रे नेहा को कुछ ठीक न लगी।" साहिल,यू आर सो लकी तो गेट सच आ ब्यूटीफुल वाइफ।"(साहिल तुम भाग्यशाली हो जो इतनी सुंदर बीवी मिली है) उनकी ये तारीफ भी नेहा को तीर की तरह चुभी।वह जहाँ भी जाती बॉस की नजरें उसका पीछा कर रही थी।साहिल से कुछ भी कहने का कोई मतलब न था सो वह चुप रही।अपने पापा के घर सारा दिन चहकने वाली चिड़िया अब चुप ही रहती थी।


दूसरी शाम साहिल फूलों के साथ घर आया और साथ में नेहा का पंसदीदा चॉक्लेट केक भी साथ लाया था।" ओह्ह ,नेहा आज मैं बहुत खुश हूं।सच तुम मेरे लिए बड़ी लकी हो।जिस ओहदे के लिए में दिन रात मेहनत कर रहा था आज तुम्हारे कारण मुझे मिल गया है।"साहिल ने उसे गले लगाते हुए कहा।बहुत दिनों बाद नेहा भी मुस्कुरा रही थी।

"सच नेहा तुम्हारी वजह से मेरा सपना पूरा होने वाला है।बोलो साथ दोगी न तुम मेरा?" साहिल ने उसके बालों को सहलाते हुए कहा तो नेहा बोली,"साथ ही तो हूँ पर मैं कैसे तुम्हारा सपना पूरा कर सकती हूँ?"


"बॉस का दिल तुम पर आ गया है।तुम्हे सिर्फ एक रात उनके साथ गुज़ारनी है,बस एक रात और फिर सर मुझे प्रमोट कर देंगे।तुम चिंता मत करना इससे हमारे रिश्ते पर कोई असर नही पड़ेगा और न ही मेरे प्यार पर।ऐसे बड़े देशों में यह सब चलता है।बोलो न नेहा जाओगी न...अपने साहिल के लिए,अपने प्यार के लिए।यह हम दोनों के लिए है जान।"साहिल एक सेल्समेन की तरह सब समझा रहा था और नेहा बुत बनी सुन रही थी।

अभी थोड़ी देर पहले ही मुस्कुरा रही थी और अब...लगता है उसकी खुशियों को ग्रहण लग चुका था।उसका दिमाग शून्य हो गया था,विश्वास नही हो रहा था कि जो उसने अभी सुना वह सच था।कोई पति कैसे अपनी जीवनसंगिनी को किसी और को सौंप सकता है।साहिल ने उसे एक ड्रेस दिया पहनने को और वह आदतानुसार चुप रही।वह लाल ड्रेस उसके अंग अंग को जकड़े हुए थी,सीने के उभार खुद को छुपाने की भरसक कोशिश कर रहे थे।"उफ्फ! लाल रंग में कातिल लग रही हो।"उसके गालों को चूमते हुए साहिल बोला।नेहा को उसकी नजदीकी से घिन आ रही थी।"सच आज तो कत्ल की रात है....आज कत्लेआम होगा।"कह नेहा कार में बैठ चल दी।

मन ही मन खुद से नफरत हो रही थी उसे।"सच आज कत्ल करके ही साँस लूंगी।अपने गूंगेपन का कत्ल,अपनी बेबसी का कत्ल,अपनी इस सोच का कत्ल की औरतों को सहना ही होता है।आज आर या पार की लड़ाई है जो मुझे ही जीतनी है।" सोचते सोचते उसने आंसू पोछे और गाड़ी एयरपोर्ट की तरफ घुमा दी।


बीता एक साल एक फ़िल्म की तरह उसके नज़रो के आगे घूम गया।दिल्ली के लिए फ्लाइट में बैठी आज सुकून में है। नारी है वह,उसे भी उड़ने का हक़ है और आज अपने हक़ की लड़ाई जीत ली है उसने।कत्ल की रात चली गयी,बस अब नई सुबह का इंतज़ार है जो एक नई किरण के साथ उसके जीवन में आएगी।यह नई सुबह नेहा ने खुद चुनी है अपने लिए।



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