कसक क्यों रह जाती है!!!
कसक क्यों रह जाती है!!!
कभी -कभी ऐसा लगता है कि सास ऐसी क्यों होती है जो उन्होंने सहा वो अब उनकी बहू भी सहे क्या वे अपनी कसक निकालती है। कभी रीति रिवाज के नाम पर ,कभी बंदिशें लगा कर••••
ऐसी ही कहानी है रमा की जो उसने सहन किया है उस समय उन्हें बुरा लगता था ।हर काम उसे अपनी सास से पूछ कर करना पड़ता था। पहले संयुक्त परिवार के कारण सास का हुक्म चलता था।
पर अब रमा के बेटे की शादी होने वाली है । वह चाहती है कि बहू सीधी सादी मिले उनकी सोच के अनुरूप मिले। वो हमेशा सबसे कहतीं कि हमें ज्यादा पढ़ी लिखी बहू नहीं चाहिए। नहीं तो वह हवा में उड़ेगी। जब भी किसी से चर्चा करते हुए बात करती हुए ही कहती कि हमें तो लड़की संस्कारी और गुणी चाहिए। जो घर का सारा काम जानती हो ,हमें कोई सर्विस नहीं करानी है।
एक बार वो लड़की देखने गयी । उन्होंने देखा कि लड़की की बात करने का तरीका कैसा है।
लड़की से नाम पूछा ,फिर लड़की ने नाम वगैरह बता दिया। रमा जी और उनके बेटे को लड़की पसंद आ गई।
रमा जी का इकलौता बेटा सोनू भी ज्यादा पढ़ा लिखा न था।और वह पिता जी की कपड़े की दुकान संभालता था। इसलिए सोनू को हाई फाई वाली लड़की नहीं चाहिए थी।
रमा जी ने शादी की डेट फिक्स कर दी। जब भी सोनू नीति से बात करता तो वह टोंक देती अभी से होने वाली बहू को सिर पर मत चढ़ा । इस तरह सोनू उस समय चुप रह जाता!
आजकल शादी के पहले लड़के- लड़की फोन पर बात करते ही हैं।पर ये बात उसकी मां को रास नहीं आई। उसने अपने बेटे सोनू को समझाया बेटा शादी के पहले इतनी बात मत किया कर । शादी के बाद तो हमेशा साथ ही रहना है।इस तरह कुछ समय बाद सोनू और नीति की शादी भी हो गई।
अब क्या था रमा अपनी बहू नीति को हर तौर तरीके बताती ,उनकी बातों से नीति को लगता कि उनके अनुसार ही उसे रहना पड़ेगा। नीति सब बात मानती।
धीरे -धीरे समय निकल रहा था।शुरु में सब ठीक ठाक चल रहा था। हमेशा में सिर पल्लू रखती ,सास के रात में पैर दबाती, और तो और उनसे पूछकर ही खाना बनाती।
उसे लगता था ।कि मेरे पति इतने अच्छे हैं तो सब ठीक है•••!थोड़ा बहुत तो ऊपर नीचे चलता है।
सोनू ने नीति को बताया कि हमारी दादी उनसे इसी तरह व्यवहार करती थी। इसलिए उनका भी यही स्वभाव हो गया। तुम कभी उन्हें जवाब मत देना।जो कभी ग़लत लगे तो तुम मुझे कहना।
नीति भी सोनू की बात मानती कभी कोई जवाब न देती।हमेशा जी मां से ज्यादा कुछ नहीं बोलती। रमा जी से बिना पूछे न कहीं जाती न कोई मनमानी करती।पर रमा जी हमेशा लगाम कसने की कोशिश करती।कभी दो मीठे बोल भी नहीं बोलती!वो तो रमा जी के दो मीठे बोल के लिए तरस गई थी। आखिर मां जी ऐसा कब तक करेंगी! हमेशा सोचती!
अब हद तो तब हो गई जब वह सोनू से सबके सामने बात भी न करने देती।
एक दिन सोनू बहुत प्यार से खोए की जलेबी रबड़ी के साथ लाया और नीति को बुलाने लगा।तब उसकी मां आई कहने लगी तुम लोगों को शर्म हया है कि नहीं, कहीं भी शुरू हो जाते हो?
इतने दिन जब नीति कुछ नहीं बोल पा रही थी।अब उससे रहा न गया और वह बोलने लगी - "मम्मी जी आप अति करते हो, आप तो इन्हें इतना सुना रही हो कि कुछ पूछो मत••••
इन्होंने मुझे आप लोगों के सामने ही बुलाया है ये बता रहे रबड़ी वाली खोए की जलेबी लाए है ,जो मुझे बहुत पसंद हैं। इतना क्यों सुना रही है?"
इतना सुनकर रमा जी कहां चुप रहने वाली थी। उन्होंने कहा - "हम भी भरे पूरे परिवार में रहे हैं मजाल है कि तुम्हारे ससुर के सामने कभी बात की हो!"
फिर सोनू भी कहने लगा- "मां अब तो समय बदल गया है पहले जैसा कुछ नहीं है।अभी भी आपकी पुरानी सोच है , नीति इस घर में पूरी तरह से ढल चुकी है।आप भी अपने आप को बदलिए और प्यार के दो बोल से कोई सिर नहीं चढ़ता।आपके मीठे बोल के लिए तरस गई है, कब तक मम्मी जी उससे ऐसे बातें करेंगी?"
इतना सुनते ही रमा जी तिलमिला उठी। और अपने पति को कहने लगी -"अजी सुनते हो देखो तो हमारा सोनू अब हमारा नहीं रहा। देखो तो इस चार दिन की आई बहू ने जोरु का गुलाम बना लिया है जो कभी ऊंची आवाज में बात नहीं करता था।आज हमारे आगे हमसे जुवान लड़ाने लगा।"
अब उसके पति भी समझाने लगे- " देखो रमा बच्चों के आपसी प्यार को समझो। जो मैं नहीं कर पाया।वो हमारा बेटा कर पा रहा है।जो तुमने सहा वो जरुरी नहीं है हमारी बहू भी सहन करे।सास की खरी खोटी सुनती रहे। हमारे मीठे बोलने से ही घर की खुशियां है। जैसे रस्सी को ज्यादा जोर से खींचने पर टूट जाती है वैसे ही हमारे रिश्ते न टूट जाए।"
इतना सुनते ही रमा को लगा कि बेटा बहू का होकर न रह जाए।तो वो शांत हो गई।
उनके पति ने समझाया कि हमारी बहू बहुत अच्छी है ,जो तुम्हारी हर बात मानती आई है अब तुम अपनी सास की तरह रौब दिखाओगी तो कहीं हमारा बेटा ही हमसे दूर न हो जाए। इसलिए संभल जाओ।तुम भी अच्छी सास बन जाओ।
इस तरह रमा को समझ आया कि हमें अपनी सास की तरह नहीं बनना है। क्योंकि वो जान चुकी थी कि समय बदल गया है। रमा ने अपने बहू बेटे से माफी मांगी। और कहने लगी हमें भी तुम लोगों पर रोक टोक नहीं लगानी नहीं चाहिए। तुम लोग की अपनी गृहस्थी है जैसे चाहो रहो पर एक मर्यादा में सब अच्छा लगता है।
इस तरह नीति और सोनू मां को गले लगाते हुए बोले मां आपके हिसाब से रहेंगे। और सोनू बोला -'आप भी नीति से हमेशा प्यार से बात करेंगी।'
सखियों- पहले बेटे संयुक्त परिवार होने के कारण खुल कर नहीं बोल पाते थे।पर आज एकाकी परिवार के साथ खुलापन होने से पति पत्नी के लिए बोलता है। इसी लिए हमें अपनी बहू के साथ बेटी जैसा व्यवहार ही करना चाहिए।
सखियों-ये रचना आप लोगों के कितने करीब है आप की सास क्या ऐसी ही है?या उनमें समय के अनुसार बदलाव आ चुका है। ये रचना पढ़कर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य व्यक्त करें।
