Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Vikram Singh

Horror


4  

Vikram Singh

Horror


कर्ण पिशाचिनी भाग 3

कर्ण पिशाचिनी भाग 3

8 mins 369 8 mins 369

             भाग - 3


गोपालेश्वर की बात बाद में करते हैं । पहले एक और कहानी को पढ़ लेते हैं ।वर्धमान का सोनपुर गांव , पिछले कुछ दिनों से यहां पर एक रहस्य की उत्पत्ति हुई है ।

यह माघ महीना ( जनवरी - फ़रवरी ) है । जमींदार हरिश्चंद्र की एकमात्र लड़की दीपिका दोपहर का भोजन समाप्त कर , नौकरानी की लड़की माला को साथ लेकर छत पर धूप सेंकने गई थी । सोनपुर एक समृद्ध व धनी गांव है । जमींदार के पास पैसों का भंडार है । उनका बड़ा सा एक घर , जिसके ऊपर बड़ा सा छत हैं । पश्चिम दिशा वाली छत पर बैठकर 13 साल की दीपिका अपने लंबे बालों को सुखाने में व्यस्त थी । माला उसके पास ही बैठकर सूखे कपड़ों को समेट रही थी । अचानक दीपिका ने देखा पश्चिम की तरफ से एक नारियल का बड़ा पत्ता उड़ता हुआ आ रहा है । तेज हवा भी नहीं चल रहा लेकिन यह पत्ता कैसे उड़ रहा है ? सोचते सोचते ही वह पत्ता दीपिका के हाथों के पास आकर रुक गया । डर से चिल्लाते ही वह पत्ता दीपिका के हाथ को छूकर फिर आगे उड़ गया । यह देख पास बैठी माला भी डर से रोने लगी ।

रोने की आवाज सुनकर घर के लोग जब ऊपर आए तो देखा दीपिका कांप रही है और माला उसे पकड़कर तेजी से चिल्लाकर रो रही थी । बेहोश दीपिका को गोद में उठाकर कमरे में सुलाने के कुछ देर बाद ही उसके अंदर तेज बुखार व कुछ परिवर्तन शुरू हो गया ।

इधर जमींदार घर से दूर माधव के आँगन में एक और घटना घटी । माधव का छोटा लड़का आंगन में बकरी के साथ खेल रहा था । न जाने कहां से एक नारियल का पत्ता आंगन में आकर गिरा । कुछ ही देर में वह बकरी छटपटाते हुए लड़के के गोद में ही मर गई । छोटा लड़का वह दृश्य देखकर ही बेहोश हो गया ।

माधव जमींदार घर का खास नौकर है । वह उस वक्त गायों को चारा डाल रहा था , यह खबर सुन बड़ी मां को बताकर वह जल्दी से अपने घर की तरफ भागा । जमींदार हरिश्चंद्र उस समय घर में नहीं थे । वो किसी काम की वजह से पास वाले गांव में गए थे । घर लौटकर सभी समाचार सुनते ही पहले अपनी लड़की को देखने पहुंचे । शाम का वक्त था , बड़े से कमरे में एक ऊंचे पलंग पर उनकी एकमात्र लड़की दीपिका सो रही थी । कमरे के कोने में रखें टेबल के ऊपर एक लालटेन जल रहा है । इतने बड़े कमरे में रोशनी के मुकाबले अंधेरा ही ज्यादा है ।

उस हल्के अंधेरे में उन्होंने देखा कि कई प्रकार की परछाई दीवारों व छत पर चल रहे हैं , नाच रहे हैं । यह देख जमींदार साहब का कलेजा कांप गया । आखिर यह किस अशुभ घटना का संकेत है ?

दीपिका अभी सो रही है , दवाई के कारण उसका बुखार भी कम हो गया है । जमींदार हरिश्चंद्र सोचते हुए बाहर आकर बैठ गए । कुछ समय बाद माधव को बुलाकर उसके लड़के का हालचाल पूछा । वैद्य जी ने दीपिका को जाँचकर फिर हरिश्चंद्र से बात करने आए ।

हरिश्चंद्र बोले - " वैद्य जी आपको पता चला कि क्या बात है? "

" नहीं मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा । वैसे इस ठंडी में एक बड़ा नारियल का पत्ता कैसे उड़ सकता है ? "

" दीपिका आप कैसी है ? "

" बुखार तो अब नहीं है लेकिन वह काफी डरी हुई है । "

" और माधव का लड़का ? "

" उसका हालत भी एक जैसा ही है शरीर ठीक है लेकिन डर इतनी जल्द मन से नहीं जाता । "वैद्य जी घर लौट गए ।


दीपिका प्रतिदिन रात को अपनी दादी शारदा देवी के पास सोती है । उस दिन भी उनके पास ही सो रही थी । अचानक रात को शारदा देवी की आंख एक ' खटखट ' की आवाज सुनकर खुल गई । आंख खोलकर देखा तो दीपिका लड़खड़ाते हुए दरवाजा खोलकर बाहर जा रही है । उसकी साड़ी का आँचल फर्श पर गिरा हुआ था । उसके बड़े - बड़े बाल चेहरे के सामने थे तथा दोनों हाथ कंधे के पास नीचे लटक रहे थे ।

शारदा देवी डरते हुए बोली - " बिटिया रानी कहां जा रही हो ? "

मानो दीपिका को कुछ भी सुनाई नहीं दिया । शारदा देवी जल्दी बिस्तर से उठकर दौड़ते हुए दीपिका के पास गईं ।

उसके हाथ को पकड़ कर खींचते ही दीपिका ने मुड़कर देखा । उफ्फ! कितनी भयानक नजर है । शारदा देवी डरते हुए उसके हाथ को छोड़कर पीछे हट गई । 13 साल की लड़की के आंखों में मानो किसी 40 साल के आदमी का भयानक दृष्टि हैं । लाल मणि जैसी आँखे लेकिन दीपिका के आँखों की पुतली का रंग काला है यह शारदा देवी जानती हैं । दीपिका घर से निकलकर आँगन के पास वाले गौशाला में चली गई । चारों तरफ वातावरण में एक सनसनाहट की आवाज सुनाई देने लगी । शारदा देवी चिंता व डर के आतंक से वहीं बेहोश हो गईं । 

सुबह जब माधव काम करने आया तो देखा कि बड़ी मां बाहर बेहोश पड़ी हुई हैं । उसने सभी को बुलाना शुरू कर दिया , आवाज को सुन सभी जल्दी से भाग कर आए । उन्होंने सोचा शायद बाहर जाते वक्त बड़ी मां गिरकर बेहोश हो गईं ।

शारदा देवी को कमरे में ले जाकर चेहरे पर पानी छिट्टा मारते ही उन्होंने अपनी आंखों खोली । आंख खुलते ही उन्होंने पूछा ,

" बिटिया रानी कहां पर है? "

हरिश्चंद्र बोले - " वह तो आपके पास ही सो रही है । मां आपको क्या हुआ था ? "

शारदा देवी ने इसका उत्तर नहीं दिया । मुड़कर देखा तो दीपिका पास ही सो रही थी । इसके बाद उन्होंने कहा ,

" रात को थोड़ा बाहर जाने के लिए उठा था , तभी चक्कर आने के कारण मैं वहीं पर गिर पड़ी । तुम सभी जाओ मैं थोड़ा आराम करूंगी । "

सभी के जाने के बाद शारदा देवी सोच रही थी कि क्या उन्होंने रात को सपना देखा था । वह बाहर क्यों गईं थी ? रात का दृश्य याद आते ही उनका शरीर एक बार फिर डर से कांप गया ।

इधर गौशाला से नौकर के आवाज़ को सुनकर सभी उस तरफ गए । वहां पर जाकर उन्होंने देखा कि पिछले सप्ताह जो भूरी गाय का बछड़ा जन्मा था , वह जमीन पर मरा पड़ा हुआ है । किसी ने बछड़े के पेट को फाड़कर अंतड़ियों को बाहर खींचकर निकाला है । ऐसी असंभव घटना इस गांव में पहले कभी नहीं हुई । खबर फैलने में ज्यादा समय नहीं लगा । गांव के कई लोग इसे देखने के लिए आते और दृश्य देख डर से अपनी नजरें घुमा लेते ।

जमींदार हरिश्चंद्र ने यह सब देखकर चिंतामग्न में खो गए । 2 दिन पहले जमींदारी का काम समाप्त करके जब वो लौट रहे थे उस वक्त नदी के किनारे वाले श्मशान में उन्होंने एक तांत्रिक जैसे आदमी को देखा था । कब आए ? कहां से आए ? एक बार परिचय लेना होगा ।


इसी बीच दीपिका नींद से जागी । आज शरीर स्वस्थ लग रहा है । उठकर मुंह हाथ धोते वक्त उसे ऐसा लगा कि होंठ के पास कुछ लगा है । हाथ से होंठ पोछते ही वह लाल सूखा चीज उसके हाथ में लग गया । यह मानो सूखा हुआ खून है ।

कुछ दिन बाद ही लगातार उसी तरह गांव में कई सारे गाय व बकरी मरने लगे । शाम होने के बाद गांव के रास्ते पर कोई भी नहीं दिखाई देता । सभी अपने घरों में जाकर कुंडी को अच्छे से बंद कर देते ।

परिस्थिति खराब हो रही है यह देखकर सभी जमींदार साहब के यहां रात को पहरा देने के फैसले के लिए इकट्ठा हुए । जरूर कोई जंगली जानवर गांव में आ गया है । लेकिन रात को पहरा कौन देगा ?

शाम होते ही चारों तरफ का परिवेश बदल जाता है । कोई मानो हवा में धीरे - धीरे बात करता है । सभी पालतू पशु आधी रात को अशांत हो जाते ।

रात को दीपिका के साथ शारदा देवी सोती थी लेकिन उस रात के बाद माला भी उसी कमरे के फर्श पर सोने लगी । प्रतिदिन रात को शारदा देवी जागने की कोशिश करतीं लेकिन रात के 12 बजते ही किसी अनजाने प्रभाव से उन्हें गहरी नींद आ जाती । अगले दिन सुबह उठकर देखती तो दीपिका पास ही शांत होकर सोते हुए मिलती ।

उन्हें सचमुच का डर लगा जब उन्होंने लगातार दो दिन सुबह दीपिका के होठों के पास लाल सूखे खून जैसा कुछ लगा हुआ देखा । इधर दिन पर दिन पशुओं के हत्या की खबर भी शारदा देवी के कानों तक पहुंच रही थी । शारदा देवी जान गईं कि गुरुदेव के शरण के अलावा अब दूसरा कोई उपाय नहीं है ।

जमींदार हरिश्चंद्र ने अपनी मां के आदेश से गुरूदेव को लाने के लिए आदमी भेजा । इसी बीच और एक घटना घटी ।

गुरुदेव आने से पहली वाली रात को माधव बिना डरे अपने घर के बाहर निकला था । उसने देखा कि एक परछाई पास वाले घर के बकरी के बाड़े से निकल रहा है ।

वह अपनी जान की परवाह किए बिना उस परछाई के पीछे पीछे गया । एक समय वह परछाई जमींदार के बड़े घर के अंदर चला गया । माधव इसके बाद अपने घर लौट गया ।

अगले दिन माधव से यह सब सुनकर शारदा देवी और भी चिंतित हो गईं । गुरुदेव के आने के बाद शारदा देवी दीपिका को लेकर उनके पास गए । गुरुदेव दीपिका को तीक्ष्ण नजरों से देखने लगे । शारदा देवी ने देखा कि शांत दीपिका की आंखें फिर से उसी रात की तरह लाल हो रही है , हालांकि फिर से सबकुछ सामान्य हो गया । दीपिका को ले जाने के लिए कहकर शारदा देवी ने गुरुदेव से सब कुछ खुलकर बताया । गुरुदेव ने सब कुछ सुना और फिर सुनकर बोले ,

" कल एक यज्ञ करूंगा , उस वक्त दीपिका बेटी को कमरे के अंदर ही बंद रखना । ध्यान रखना कि कुछ भी हो जाए पर वह कमरे से निकल ना पाए । "

गुरुदेव अभी नए हैं , उम्र यही कोई 34 - 35 होगा । उनका नाम महानंद आचार्य है । वंशानुगत महानंद और उनके दादा , परदादा इस जमींदार परिवार के कुलगुरु हैं ।

पहले हर बार अपने पिताजी दयानंद आचार्य के साथ आते थे लेकिन पहली बार वो अकेले आए हैं । महानंद जी ने आते वक्त पास के श्मशान में एक परिचित चेहरे को देखा था । इतने सालों बाद देखा था लेकिन उन्हें उस आदमी को पहचानने में कोई भूल नहीं हुई । वह कोई और नहीं गोपाल है जो अब गोपालेश्वर बन चुका है ।.....


।। अगला भाग शीघ्र आयेगा ।।



Rate this content
Log in

More hindi story from Vikram Singh

Similar hindi story from Horror