किसी बॉक्स में बंद नहीं रहना
किसी बॉक्स में बंद नहीं रहना
" तुम्हारा इंस्टा का आई डी बताना ज़रा !"
सिया ने अभी अनपैक किया भी नहीं था कि उसकी सो कॉल्ड रुममेट ने हठात पूछ लिया।
पहले तो सिया उस चिड़िया के घोंसले जैसे तीतर बीतर बालों वाली लड़की को देखकर मुस्कुराई और बड़े ही सधे स्वर में बोली
" इंस्टाग्राम या फेसबुक पर नहीं हूँ। मेरा कोई सोशल अकाउंट नहीं है !"
" मैं किसी बॉक्स में फिट होकर नहीं रहना चाहती! "
"ये तुम क्या कह रही हो सिया ?!"
तुम इंस्टाग्राम पर नहीं हो? और तुम्हारा फेसबुक अकाउंट भी एकदम डॉरमेंट सा है। ऐसे कैसे?
तू आजकल के ट्रेंड के हिसाब से नहीं चलेगी तो आज के कॉम्पीटिटिव वर्ल्ड में कैसे सरवाइव करेगी?"
प्रोमिला के लिए यह एकदम सरप्राइजिंग था कि आज के ज़माने में भी कोई लड़की सोशल मिडिया से इतना दूर रह सकती है? फिर भी लोग उसे एक स्कॉलर के रुप में जानते तो थे ही। और कॉलेज में भी उसकी अपनी एक पहचान थी। पढ़ाई के साथ साथ वह राइटिंग और डिबेट वगैरह में जो हमेशा आगे रहती थी।
और..... सबसे बड़ी बात कि उसका कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं था। नो रिलेशनशिप... नो ब्रेकअप। बस मज़े की ज़िन्दगी। हुँह.... खाक मज़े की ज़िन्दगी...! कितनी बोरिंग सी ज़िन्दगी है इस लड़की की! "
प्रोमिला ने मुँह बिचकाया और अपनी नई रुममेट की तरफ से ध्यान हटाकर अपने कमैंट्स और लाइक्स चेक करने लगी।
ये था... अहमदाबाद के मैंनेज़मेंट कॉलेज का एक रूम। इस गर्ल्स हॉस्टल में प्रोमिला लगभग पिछले चार महीने से रह रही थी। इस थ्री सिटेड रूम में शुरू से ही उसकी तीसरी रुममेट नहीं आ पाई थी। सिर्फ वह और उसकी दूसरी रुममेट तारा ही रह रहे थे। पर पिछले महीने तारा अपने बॉयफ्रेंड के साथ लिव इन में रहने चली गई थी। सो तबसे प्रोमिला अकेली ही थी।
आज..... ज़ब सिया प्रोमिला की रुममेट बनकर आई तो उसे अच्छा लगा कि अब अकेलेपन से कुछ राहत मिलेगी। इसलिए उसने बड़ी गर्मजोशी से उसका स्वागत किया।
पर.... ये सिया तो एकदम इस एरा की लग ही नहीं रही थी। लग रहा था कि कोई सिक्सटीन सेंचुरी की मॉडल हो। हुह...इट्स माय बैड लक। पर अब यह मेरी रुममेट बनकर आई है तो इसे एक्सेप्ट करना ही पड़ेगा।
सोचते हुए पामेला सिया के पास गई। सिया बड़े ही करीने से अपना सामान जमा रही थी। वैसे सिया का सामान और कपड़े वगैरह ज़्यादा महंगे तो नहीं थे पर जो भी थे बड़े ही सुरुचिपूर्ण लग रहे थे। उसके कपड़ों के रंग और डिज़ाइन भी ट्रेंडी और कलरफुल थे।
जब प्रोमिला सिया के पास गई तो उसने अपने बेड पर से सामान हटाकर मेरे लिए जगह बनाते हुए कहा,
"आओ ना... बैठो ना यहाँ! "
उसकी सरल सहज़ मुस्कुराहट बड़ी वेलकमिंग थी।
प्रोमिला ने सिया से अचरज़ से कहा,
"वाह.... सिया! तुम तो बहुत ही बैलेंसड और शोर्टेड हो। जबकि मैं खुद को डिसिप्लिन के किसी बॉक्स में फिट नहीं कर पाती हूँ! "
सिया ने बड़े ही दोस्ताना अंदाज़ में प्यार से प्रोमिला का हाथ पकड़कर कहा,
"डोंट वरी प्रोमिला! मुझे तो तुम एकदम बिंदास लगती हो। एकदम हैप्पी शैप्पी टाइप! "
प्रोमिला को यह जानकर अच्छा लगा कि सिया ने उसकी तारीफ की। मतलब एक सिविलाइज्ड और पढ़ाकू लड़की उसकी तारीफ कर रही थी। यह प्रोमिला के लिए गर्व की बात थी।
धीरे धीरे प्रोमिला को अपनी यह रुममेट अच्छी लगने लगी थी। उसका आर्गेनाइज्ड रहना, सोशल मिडिया से दूर रहकर किताबें पढ़ना और तो और वह अभी तक अपने स्कूल के दोस्तों से भी कनेक्टेड थी। प्रोमिला को अब सिया बहुत अच्छी लगने लगी थी।
अब प्रोमिला भी सुबह जल्दी उठने लगी थी. उठकर प्राणायाम करती फिर बीच बीच में अपने पुराने दोस्तों से भी बात करने लगी थी। उसका अपने मम्मी पापा से जो एक दुराव सा था वह अब कुछ कम हो रहा था। सिया को दिन में दो तीन बार अपनी माँ और छोटी बहन से बात करते देखती तो उसे भी अपना छोटा भाई रॉबीन बहुत याद आता।
और... फिर प्रोमिला कभी कभी अपनी माँ से बात करने लगी थी। माँ बेटी के बीच की एक दीवार थी जो ढह रही थी। दोनों अब ख़ुश ख़ुश रहने लगीं थीं।
और... यह सब हो पाया... प्रोमिला की नई रुममेट सिया के आने से... जिसकी अच्छी आदतों ने प्रोमिला की अस्तव्यस्त ज़िन्दगी को बदलकर रख दिया था।
और हाँ... अब प्रोमिला ने खुद को एक टिपिकल बॉक्स में बंद रखना छोड़ दिया था, जिसमें वह खुद को फिट नहीं रख पाती थी।
सिया की कई सारी आदतें अब प्रोमिला के व्यक्तित्व का हिस्सा बन चुके थे।
इसके साथ एक छुपा हुआ सच यह भी था कि....
अब धीरे -धीरे सिया भी प्रमिला की तरह थोड़ा-थोड़ा सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने लगी थी। दोनों ने एक दूसरे की अच्छी आदतों को अपनाकर अपनी अपनी पर्सनालिटी को कंप्लीट करने के रास्ते में अपने कदम बढ़ा दिए थे।
सच तो यह है कि... कोई भी सोशल प्लेटफार्म बुरा नहीं है। बस उसका अत्यधिक इस्तेमाल न किया जाए और खुद के बल पर अपने नॉलेज बढ़ाकर जिंदगी की पढ़ाई की जाए ताकि इंसान इंसान से दूर ना हो।
(समाप्त )
