STORYMIRROR

Rekha Shukla

Abstract

2  

Rekha Shukla

Abstract

कहानी शब्दों की

कहानी शब्दों की

1 min
134


अपनी कहानी छोड़ जा 

शर्म आती है मगर आज ये कहना होगा 

कुछ तो निशानी छोड़ जा 

अब हमें आपके क़दमो मे ही रहना होगा 

जमाने की हिचकियाँ है की तीखी मिर्चियाँ 

मालूम नहीं मालूम नहीं 

शबनम की चुभन पाँव में छाले उफ़्फ़ ये ईश 

मालूम नहीं मालूम नहीं ।



Rate this content
Log in

Similar hindi story from Abstract