कैसा ये प्यार है
कैसा ये प्यार है
पहली बारिश के बाद मौसम काफी सुहाना हो गया था। सुबह की चाय लान में पीने का मन हुआ।
वो चाय लाने गई ,पतिदेव की नज़र गुलाबों पर पड़ी, अररे नन्हीं नन्हीं जलकण गुलाब पर मोती सा चमक रहा था कितना प्यारा लग रहा है, वह हाथ बढ़ाकर आहिस्ते से एक गुलाब तोड़ लिया, तभी पत्नी आ गई। गुलाब भी मन ही मन मानों इतरा रहा था, बारिश में भीगकर।
ओहह, अब जूड़े में गुलाब सजाना संभव नहीं है, क्योंकि हेयर स्टाइल काफी बदल गये हैं। वह गुलाब अपनी पत्नी को देता हुआ बोला, “फुलों सी खूबसूरत प्यारी पत्नी को प्यारा सा फूल भेंट कर रहा हूँ।
वह भी बड़ी अदा से गुलाब लेकर चूम ली। गुलाब को रश्क होने लगा क्योंकि वह दो प्रेमीयों के प्यार का प्रतीक बन गया। चाय का स्वाद गपशप के बिना अधूरा लग रहा था, वह पेपर पढ़ने में मशगूल हो गया, पत्नी गुलाब से खेलने लगी।
ही लव मी ...लव मी नॉट….
एक एक कर पंखुड़ियाँ बिखरती रही, रहस्य और रोमांच से भरते हुए वह खेलना छोड़ कर पूछ बैठी, “सुनिये आज सण्डे है, चलिये ना 102 नॉट आउट देखने” “क्या यार; सप्ताह में एक ही दिन तो मुझे आराम करने को मिलता है, वह भी तुझे बर्दाश्त नहीं होता।”
पंखुड़ियों का खेल समाप्त हो चुका था, गुलाब पूरी तरह बिखड़ चुका था ....ही लव मी नॉट !
