जरुरत
जरुरत
"नेहा, मैं ऑफिस का काम देख लूंँगा। तुम आरुष को लेने जाओ, स्कूल की छुट्टी हो गई होगी।"
"नहीं अमित, बस थोड़ा सा काम बाकी है, मैं जल्दी से खत्म करके स्कूल चली जाऊंँगी।"
"और आरुष ?"
"मैं स्कूल में फ़ोन करके बोल दूंँगी कि मुझे थोड़ा लेट हो जायेगा तो आरुष को स्कूल में रहने दे।"
"यार नेहा, अगर तुम्हे काम है तो मुझे स्कूल जाने दो, मैं आरुष को ले आऊंँगा।"
तुम्हें पता है ना अमित, जब आरुष के पापा ने ही उसकी जिम्मेदारी नहीं उठाई तो मुझे किसी और की जरूरत नहीं है, मैं अकेले ही उसके लिए काफ़ी हूंँ।"
"लेकिन कब तक ?"
"जब तक मैं जिंदा हूंँ।"
"तुम समझती क्यों नहीं नेहा, ज़िन्दगी बहुत बड़ी होती है तुम कब तक आरुष को अकेले सम्हालोगी ?"
"मुझे किसी की जरूरत नहीं अमित, मैं आरुष के लिए खुद काफ़ी हूंँ।"
"मैं मानता हूंँ नेहा, तुम आज के दौर की पढ़ी लिखी, समझदार महिला हो। लेकिन जब किसी अपने का साथ मिल जाता है तो ज़िन्दगी और आसान हो जाती है। तुमने तो सुना ही होगा एक और एक ग्यारह होते है।"
"थैंक्स अमित समझाने के लिए, मुझे किसी की जरूरत नहीं।"
"हो सकता है किसी को तुम्हारी बहुत जरूरत हो नेहा।"
"किसको ??"
"मुझको।"
