जलेबी
जलेबी
मेरी जलेबी,
तुम आज भी बिल्कुल वैसी ही हो जैसी आज से पंद्रह साल पहले थी। बिल्कुल वही बात करने का अंदाज़, आज भी वही हँसी, सब कुछ वैसा ही है जैसा स्कूल में था। बस, उस समय मेरी तुमसे कोई बात नहीं होती थी। स्कूल में टीचर कितने सख़्त होते थे, एक क्लास में होते हुए भी लड़के और लड़कियाँ अलग -अलग बैठते थे। ऐसा नहीं है कि लड़के लड़कियों से बात नहीं करते थे, लेकिन मैं उस समय भी तुमसे बात करने का हिम्मत नहीं जुटा पाया।
उस समय तुम हरदम अपने किताबों और कुछ सहेलियों में व्यस्त रहती थी, पूरे क्लास में तेज तर्रार लोगो में तुम्हारी गिनती होती थी। तुम्हें जानने वाले सभी तुम्हें बहुत पसंद करते थे, और मैं तुम्हें सबसे ज्यादा।
वक्त के साथ -साथ हमारा स्कूल खत्म हुआ और हमारे रास्ते अलग हो गए। तुमने कॉलेज में एडमिशन लिया और मैं आइटी की तैयारी के लिए शहर से बाहर चला गया, लेकिन ज़िन्दगी ने तुम्हारी हर खबर किसी ना किसी रूप में मुझ तक पहुँचाई, फिर एक दिन पता चला तुमने सात समुंदर पार जाकर अपनी दुनिया बसा ली, जहांँ मैं चाहूँ तो भी उड़ कर नहीं जा सकता था।
ज़िन्दगी इतनी भी कठोर नहीं होती जितना कि हम उसे मान लेते है, इस बात का विश्वास मुझे तब हुआ, जब एक दिन अचानक मैंने मैसेंजर पर तुम्हारा मैसेज देखा, वो पल ऐसा था जैसे मेरे भगवान ने खुश होकर मुझे मेरा मन चाहा वरदान दे दिया हो। उस दिन से मेरे दोस्तों के लिस्ट में एक सबसे खूबसूरत नाम जुड़ गया "जलेबी।"
मुझे पता है, तुम अपने घर परिवार में व्यस्त हो और मैं अपनी जिम्मेदारी में उलझा हुआ, लेकिन फिर भी हमारे बीच ये जो रेशम के जैसा दोस्ती का रिश्ता जुड़ गया है ना, मैं चाहता हूँ वो हमेशा जुड़ा रहे।
वो कहते है ना जब आपको थोड़ा कुछ मिलता है तो थोड़ा और मिल जाए इसकी इच्छा होती है, तो मेरा मन भी चाहता है कि पूरी ज़िन्दगी के अनगिनत दिनों में से कोई एक दिन हमारे दोस्ती के नाम हो, उस दिन तुम ढेर सारी बातें करना, सब कुछ भूलकर कि तुम कौन हो, मैं कौन हूँ। जब तुम मुझसे बिना मतलब की बातें कर रही होगी मैं तुम्हारे लिए अपने हाथों से चाय बनाऊंँगा, जब तुम चाय उठाने के लिए झुकोगी तो तुम्हारी इक घुंघराली लट माथे पर आ गिरेगी, तुम चाय पीना और मैं अपने हाथों से वो शरारती लट तुम्हारे कान के पीछे कर दूँगा।
मुझे पता है हमारे जीवन में वो दिन कभी नहीं आयेगा, लेकिन इस प्यारी सी ख़्वाहिश में ज़िन्दगी यू ही गुज़र जाएगी।
तुम जहाँ भी रहो, उस शरारती लट को अपने माथे पर मेरे लिए सम्हाले रखना।
तुम्हारा दोस्त
गुलाबजामुन
