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Amita Kuchya

Inspirational

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Amita Kuchya

Inspirational

इतना लेने की लालसा क्यों???

इतना लेने की लालसा क्यों???

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नीति की शादी हुए कुछ समय ही बीता था।उसके मम्मी पापा ने वो सब कुछ दिया जो तय हुआ था।बस मोटरसाइकिल के लिए हामी भरी थी और वो नहीं दे पाए तो नीति को हमेशा ही ताने सुनने मिल जाते। सास हमेशा कहती कि "तुम्हारे पापा तो अपनी बात से मुकर गए , मायके जाना तो पापा को याद दिला देना मोटर साइकिल भी देना है दामाद को । "


नीति जब भी मायके जाती तो नहीं बोलती।उसे लगता कि पापा के ऊपर वैसे ही कर्ज है वो कैसे दे पायेंगे।

अब जब नीति लौटी तो सास और उसके पति निमेष ने पूछा कि मोटरसाइकिल के बारे में पापा से बात की क्या कहा!!!! और कब दे रहे हैं?

फिर नीति ने कहा "पापा के ऊपर वैसे ही कर्ज है मैं कैसे उनसे बोलती?"


फिर नीति की सास का रुख ही बदलने लगा। उसे अब अपने बेटे के लिए मोटरसाइकिल मिलने की उम्मीद नहीं लग रही थी। धीरे-धीरे अपनी धौंस जमाने लगी । यहां तक कि सभी काम नीति से कराने लगी।ऊपर से काम वाली बाई को काम से हटा दिय


फिर भी नीति सब कुछ सह कर घर का काम संभालने लगी।


अब एक दिन जब उसके पापा मोटरसाइकिल देने आए तो पति और सासु मां बहुत खुश हुई। फिर भी उनका नीति के प्रति रवैया नहीं बदला ।उनको लगता कि नीति के मायके वाले हमेशा ही देते रहे••••

हर त्योहार पर रीति-रिवाज के नाम पर कुछ न कुछ डिमांड रहती।पर वो कभी संतुष्ट नहीं होते।


धीरे-धीरे समय बीतता गया एक दिन नीति को पता चला कि वह मां बनने वाली हैं। अब‌ उसने सोचा चलो अब पति और सासु मां में बदलाव आ जाएगा। वह बहुत कमजोर हो गई थी। न तो उसकी डाइट पर ध्यान दिया जाता ,न ही फल दूध दिया जाता था। कुछ समय पश्चात गोद भराई की रस्म हुई तब भी नीति के मम्मी पापा के यहां सब कुछ आया।तब पर भी लालच समाया हुआ था। उन्हें लगा कि डिलेवरी भी मायके में हो जाए।तो खर्च बचेगा।इस तरह वह अपना खर्चा बचाने की सोचती और खुशी खुशी नीति के मम्मी पापा उनकी हर बात को मानते।


उसे मायके भी खुशी - खुशी जाने दिया। अब लड़की होने की खबर दी गई ,तो न खुश हुई न ही पोती को देखने आई।अब उन्हें लगा कि चौंक में पथ  होगा तो वे नातिन और बेटी को सब देंगे। तो सास ने नीति को बुला लिया। इस तरह उनका लालच ही बढ़ता ही जा रहा था।


कुछ समय बाद जब उनकी बेटी की शादी तय हुई , उन्होंने शादी में अपनी बेटी सबकुछ दिया पर कार तुरंत नहीं दे पाए। तब उनके साथ भी वही हुआ जो उनको सपने में भी उम्मीद नहीं थी


आज उसकी ननद ने जब मां से कहा - "मेरे ससुराल वाले कार की मांग रहे हैं।वो आपने नहीं दी तो मेरा वहां रहना दुश्वार हो जायेगा।वो भी वही करें जो आपने भाभी के साथ किया।तो क्या होगा? "


आज नीति की सास को एहसास हुआ कि उसने भी नीति के साथ वही किया। जो आज उसकी बेटी के साथ हो रहा है।इस तरह सास बहुत दुखी रहने लगी।अब कार के लिए इतनी जल्दी व्यवस्था नहीं हो पा रही थी।तो नीति ने कहा-  "मां जी दीदी की खुशी से बढ़कर कुछ नहीं है आप चाहें तो मेरे गहने गिरवी रख कर कार दीदी को कार दे दीजिए।"


फिर तो सासुमा की आंखों में आंसू भर आए••• कहने लगी कि "तुम्हारे साथ मैंने क्या नहीं किया फिर भी तुमने हमें दिल से अपनाया। मुझे माफ़ कर दो नीति मेरी कितनी गलत सोच थी । मैंने न तुम्हारे मायके वालों को सम्मान दिया, न ही तुम्हें वो प्यार दिया जिसकी तुम हकदार थीं।"

इस तरह उन्हें एहसास हो रहा था । यहीं ही अपने कर्मों की सजा भुगतनी ही पड़ती है आज मेरी बेटी को मेरे किए की सजा मिल रही है। भगवान से हमेशा विनती करती कि कोई की बेटी को मां-बाप के किए की सजा न मिले।

अबकी बार मीनू मायके आई तो काफी खुश लग रही थी कि उसने बताया मां मुझे कोई कमी नहीं है आप बेफिक्र हो जाइए। फिर तब जाकर उन्हें इत्मीनान हुआ चलों मेरी खुश‌ है ।उनका रवैया नीति के प्रति बदल‌  गया।


सखियों- शादी में लेन-देन की रीत चली आ रही हैं उसका असर शादीशुदा जिंदगी में नहीं होना चाहिए । क्योंकि मां-बाप अपनी बेटी को उसकी जरूरत की सामान देते थे।कि नाजों से पली बेटी को परेशानी न हो। परंतु आजकल दहेज की मांग की जाती है वह बहुत ग़लत होती है।हर मां बाप अपनी हैसियत से बढ़कर ही दान दहेज देते हैं।ताकि उसकी बिटिया दुखी न हो।पर दान दहेज ही सबसे बड़ी समस्या बन गया।उसका अंत होना चाहिए


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