Pawan Gupta

Inspirational


4.7  

Pawan Gupta

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होमवर्क

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आज ऑफिस से घर आया,अभी घर में घुसा ही था ,और हाथ पैर धो ही रहा था कि अंदर वाले रूम से आवाज आई , "पापा पापा मेरा होमवर्क करा दो" ,मेरा बेटा कृष जोर जोर से बोल रहा था। मेरी पत्नी अवंतिका गुस्से में चिलाते हुए बोली ,"हां आने की देर हुई नहीं ,अपने काम में लगा ले , दिन भर करता क्या है तू , अपना होमवर्क भी खुद से नहीं कर पाता है क्या !"

कृष - "नहीं माँ होमवर्क सारा हो गया है, बस एक प्रोजेक्ट है, जो समझ नहीं आ रहा है ,आप तो करवाती नहीं हो तो मैं क्या करूं !"

अवंतिका - "हां हां मैं ही ज्यादा पढ़ी लिखी हु ना ,कि मैं तेरा होमवर्क करा दूं", 

कृष - "माँ तभी तो मैंने पापा से बोला !"

अवंतिका - धीरे से समझाते हुए " ठीक है बेटा पापा से बोल रहे हो , पर पापा अभी अभी काम करके आये है ,थके होंगे ना थोड़ा चाय पी लेने दो खाना खा लेने दो फिर होमवर्क करा देंगे !" 

  कृष - "ओके माँ , पापा प्लीज याद करके करा देना "

  मैं सारी बातेंं सुन रहा था ,और सोच रहा था कि मेरी फॅमिली कितनी अच्छी है ,सब एक दूसरे का ख्याल रखते हैं ,इतने में चाय का कप लेकर अवंतिका आई और बोली कि चाय पी लीजिये मैं खाना भी थोड़ी देर में लगा देती हूं !चाय पीने के 20 मिनट बाद सबने खाना खा लिया !खाना खाने के बाद फिर एक बार कृष ने याद करते हुए बोला , "पापा अब तो करा दो !"

मैंने कहा - "अच्छा चलो दिखाओ अपने स्कूल की डायरी क्या प्रोजेक्ट मिला है देखें जरा !"

ये कहते हुए मैं कृष के साथ रूम में चला गया ! और अवंतिका बर्तन धोने चली गई !मैंने जब कृष के स्कूल की डायरी देखी तो उसका प्रोजेक्ट देख के सर घूम गया !

मन ही मन फुसफुसाते हुए मैंने कहा , ये भी कोई प्रोजेक्ट है , आज कल स्कूल वालो को भी कुछ समझ नहीं आता है ,अरे स्कूल वाले ऐसा प्रोजेक्ट देते ही क्यों हैं , जो इतने छोटे बच्चे समझ ही ना सके !

कृष - मुझे देखते हुए बोला " क्या हुआ पापा? "


मैंने कहा "कुछ नहीं तू कुछ और अपना काम कर ले मैं सोचता हूं कि ये प्रोजेक्ट कैसे बनेगा !"

कृष - "पापा प्रोजेक्ट में दो पत्थरों का प्रयोग करके किसी रिश्ते को दर्शाना है ,पर कैसे होगा !"

  

 मैंने कहा बेटा तुम कुछ और काम कर लो ,चलो ड्रॉइंग बना लो ,मैं सोचता हूं कि इसे कैसे करना है ,कृष ड्रॉइंग में व्यस्त हो गया ,और मैं सोचने में !

  आज कल स्कूलों में पढाई काम ड्रामा ज्यादा हो गया है , प्रोजेक्ट के नाम पर कुछ भी दे देते हैं ,

हम भी तो स्कूल में पढ़ते थे, हमें भी प्रोजेक्ट मिलते थे ,मिट्टी के फल बनाने को तो कभी कागज के फूल ! पर आज पढाई का तरीका ही बदल गया है !

 बेड पर लेटे लेटे यही सब सोच रहा था ! ना जाने कब नींद आ गई !अचानक नींद सुबह खुली , तो देखा कृष और अवंतिका दोनों ही जाग गए हैं , और अपनी अपनी तैयारियों में लगे हैं !मैं जल्दी ही कृष के पास गया और बोला "बेटा मुझे माफ़ कर दो मैं थका हुआ था ,पता नहीं कब नींद आ गई ,अभी तुरंत हम दोनों मिलकर प्रोजेक्ट कम्प्लीट कर लेते हैं।"

  कृष ने बोला " its ok " पापा ! आप परेशान ना हो ,कल रात ही माँ ने प्रोजेक्ट कम्प्लीट करवा दिया ,और प्रोजेक्ट अच्छा भी बना है !"

  मैंने कहा "अच्छा तो मुझे भी दिखाओ !" कृष अपना प्रोजेक्ट ले आया !

  उस प्रोजेक्ट में मेरी पत्नी के समझदारी की खूबसूरती स्वतः ही झलक रही थी !

 किस तरह उसने दो पत्थरो को एक रिश्ते का रूप दे दिया था !

 अवंतिका ने एक गुलाबी चार्ट पेपर पर एक पत्थर को पेस्ट कर उसके ऊपर काले स्केच से कुछ बाल बनाये थे ,और पत्थरो के बगल से हाथ और निचे पैरो की आकृति बनाई हुई थी,और उसके बगल में दूसरे पत्थर को पेस्ट कर उसी प्रकार से लम्बे बाल हाथ और पैर बनाये थे,उन दोनों के बीच एक लाल रंग का दिल जो उनके रिश्ते को शब्द दे रहा था !

  ये कलाकृति देख ऐसा प्रतीत हो रहा था,कि मानो एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को अपना दिल दे रहा हो !

  मुझे ये प्रोजेक्ट देखकर ये समझते देर ना लगी कि किसी भी वस्तु से कुछ भी बनाया जा सकता है ! बस मन में कुछ करने की इच्छा हो !मुझे अपनी पत्नी पर भी गर्व महसूस हुआ !मैंने सोचा समझदारी पढाई की मोहताज नहीं होती है , कम पढ़े लोग भी ऐसे काम कर जाते हैं , जिसे पढ़े लिखे लोग इम्पॉसिबल समझते हैं , ये सब हमारी सोच पर निर्भर करता है कि हम क्या हैं , और हम क्या कर सकते हैं .....              

            


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