ravindra kumar

Horror Thriller

5.0  

ravindra kumar

Horror Thriller

गुमशुदा लड़की

गुमशुदा लड़की

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बात उस समय की है जब मेरी पोस्टिंग पिथौरागढ़ के जंगली इलाके में थी।मैं उस छोटे से चौकी का इंचार्ज था कुल मिलाकर उस चौकी में पांच लोग थे।बिजली की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी चौकी का काम धाम लालटेन और परंपरागत साधनों से चल रहा था।मैं ,जयदेव ,राजेश यादव, कमलेश तिवारी और एक अर्दली पवन सिंह की पोस्टिंग उस चौकी में थी।

काम धाम सब ठीक ही चल रहा था इलाका छोटा और गरीबी होने के कारण यदा कदा ही कोई घटनाएं होती थी।ठंड का मौसम शुरू हो रहा था शाम होते ही अंधेरा छा जाता था।पहाड़ी इलाक़ा होने के कारण ठंड बहुत ही ज्यादा ही हो जाती थी।सभी चौकी के स्टाफ़ घर चले जाते और रात की ड्यूटी किसी एक स्टाफ की बारी बारी आती थी।

एक दिन की बात है शाम का वक़्त हो चला था सारे स्टाफ़ घर जाने की तैयारी कर रहे थे लेकिन जिसकी नाईट ड्यूटी थी वो अचानक किसी कारण वश आज आ नहीं पाया था।समस्या विकट थी कोई और स्टाफ़ रुकने को तैयार नहीं हो रहा था पर मना भी नहीं कर पा रहा था।ये स्थिति देखकर मैंने कहा मेरा घर पास में ही है और मै अकेला भी हूँ आज मैं चौकी पर रुक जाता हूं।बाकी के स्टाफ़ मेरी तरफ देखकर अचंभित रह गए उन्हें मुझसे शायद ऐसी उम्मीद नहीं थी।

मेरे समझाने पर वो सब अपने अपने घर की ओर चल पड़े।

मैं भी रात को खाना खाकर वहीं चौकी पर बैठकर कुछ किताबें पढ़ने लगा।मैं अपनी नौकरी के साथ साथ प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी भी कर रहा था।करीब क़रीब रात के 11 बजे होंगे मुझे कुछ गिरने की आहट बाहर सुनाई दी मैंने सोचा कोई जानवर होगा।कुछ खास ध्यान नहीं दीया।

लगभग आधे घंटे बाद मुझे किसी के चौकी में आने की आहट सुनाई दी साथ ही पूरी चौकी किसी खुसबू से महकने लगी।मैंने उस दिशा में नजर घुमाई तो मुझे एक सुंदर सी लड़की आती हुई नजर आयी।मेरे पास आकर उसने कहा मैं यहाँ घूमने आयी थी दोस्तों के साथ पर भटक गयी जैसे तैसे मैं यहाँ पहुँची हुँ।प्लीज् मेरी हेल्प करे ।मैंने कहा कोई बात नहीं आप यहीं रुक जाओ सुबह मैं आपको शहर तक छोड़ दूंगा।

नहीं आप अभी चलो मेरे साथ मेरे दोस्तों को हेल्प की जरूरत है वो पास की पहाड़ी पर फसें हुये है।उस लड़की ने कहा।मैंने सोचा अगर इसके दोस्त पहाड़ी पर फसे हुये है तो उनको जल्द से जल्द मदद पहुचाने की जरूरत है नहीं तो ठंड और जंगली जानवरों से उनको खतरा था।चौकी पर और कोई तो नहीं था मैं उस लड़की के साथ अकेले ही पहाड़ियों की ओर चल पड़ा।उस इलाके से मैं अनजान था पर लड़की के बताए रास्ते पर मै चले जा रहा था।

रात के अंधेरे और पहाड़ी रास्ते के कारण चलने में काफ़ी तकलीफ हो रही थी मगर चांदनी रात की वजह से थोड़ा सुकून था।चलते चलते हम एक सुनसान झोपड़ी के पास पहुंचे।

लड़की ने बताया वो अपने दोस्तों के साथ इसी झोपड़ी में रुके थे शायद वो लोग इसी झोपड़ी में होंगे।मैं झोपड़ी में अंदर दाखिल हुआ वहीं कोने में मुझे चार लाशे दिखाई पड़ी ।

उन चारों लाशो को मै देखने लगा पर ये क्या उनमे से एक लाश उस लड़की की भी थी जो मुझे लेकर यहाँ आयी थी ये देखकर मैं सदमे में चला गया।मैं उस लड़की को देखने झोपड़ी के बाहर आया पर वहाँ कोई नहीं था।

तभी मुझे सुबह के समाचार पत्र की खबर का ध्यान आया दिल्ली के चार लोग पिथौरागढ़ पहाड़ियों में घूमने आए मगर गुम हो गए।

फिर अगले दिन हम सबने मिलकर उन लाशो को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और उनके परिवार वालों को खबर करदी।

पोस्टमार्टम से पता चला कि हार्ट अटैक की वजह से उनकी मौत हो गई थी।पर चार लोगों शा एक उलझन बनी रही।बाद में मेरा तबादला कानपुर हो गया मगर यह अनसुलझी पहेली अबतक मेरा पीछा नहीं छोड़ती की सबकी मौत कैसे हुई ?हार्ट अटैक से चारों की एकसाथ मौत कैसे सम्भव है?


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