घरौंदा
घरौंदा
आलोक एक घर लेना चाहता था मां ने कहा बेटा घर वो जहां शांति हो, प्यार हो, विश्वास, अच्छे संस्कार व ईमानदारी की नींव हो।
आलोक कार्यालय में बेईमानी की ओर पैसों से घर बनाना वहां जाने के बाद न जाने क्यों सब अस्वस्थ रहने लगे, उसकि बेईमानी भी कार्यालय में पकड़ी गई जिसके चलते उसे सजा मिले
उसे मां की बात याद आई की इमानदारी से अगर मैंने कमाया होता तो आज सुख शांति होती मगर मेरी बेईमानी की वजह से पूरे घर को तकलीफ हुई है और उसने जीवन में दोबारा बेईमानी ना करने का संकल्प लिया।
