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Manisha Kanthaliya

Abstract


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Manisha Kanthaliya

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एवरेस्ट की कहानी

एवरेस्ट की कहानी

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एवरेस्ट यही नाम दिया है न तुम लोगों ने मुझे और क्या कहूं बहुत मान भी देते हो। मेरे शिखर तक जो भी पहुँच जाता है उसका भी तुम बड़ा सम्मान करते हो। करना भी चाहिए। आखिर मेरे शिखर पर पहुंचना आसान थोड़े ही है। तुमने सुना तो होगा ना मेरे शिखर पर ऑक्सीजन की बहुत कमी है इसलिए उसे साथ लेकर आना होता है। ठण्ड इतनी उसका भी प्रभंध करना पड़ता है। बारिश कभी भी जाती है तूफ़ान कभी भी आ जाता है। इसलिए तैयारी के साथ चलना पड़ता है। अब तुम सोच रहे होंगे की इन सब तकलीफों के बीच में कैसे रह पता हूँ , तो सच कहूं मुझे इन सब से कोई परेशानी नहीं होती। ये सब तो मेरे साथी है। हवा अक्सर मुझे गीत सुना कर जाती है।

दुनिया भर के किस्से और बातें होती है उसके पास मेरे लिए। वो जब तेज चलती है तो कहती है "मैं आज जरा अमेरिका घूम कर आयी हूँ। इलेक्शन होने वाले है वहाँ " कभी बताती "ऑस्ट्रेलिया के जंगल में आग लग गयी है बेकसूर जानवर मर रहे है " में उसकी बातों से कभी खुश तो कभी उदास हो जाया करता। और बारिश उसकी तो अपनी ही कहानियां होती है। समंदर की लहरों की कहानी तो कभी आँखों से गिरने वाले नमकीन पानी की। मैं इन सब के साथ खुश ही था तब तक जब तक तुम इंसानों ने मुझ तक पहुँचाने की नहीं ठानी थी।

जब पहली बार तेनज़िंग नोर्गे और एडमंड हिलेरी ने मेरे पास आये कुछ पल को मैं डरा फिर गर्व सा महसूस किया। अब बारिशों और हवाओं की तरह मेरे पास भी कोई कहानी थी कोई नए दोस्त थे। पर ये क्या इन नए दोस्तों ने मेरी छाती को गोद दिया अपना परचम हवा में लहराने के लिए। मेरे दर्द की जरा भी परवाह न की। तब हवा और बारिशों ने उन्हें सताया भी पर इंसान कहाँ समझता है हमारी पीड़ा को कहा सुनता है हमारी आवाज।

मेरे आंसू निकल गंगा जल में विलीन हो गए और फिर मानो एक होड़ सी लग गयी। मानो मैं उनकी कोई ऐसी प्रेमिका हूँ जिस से वो एक तरफा मोहब्बत कर बैठे हैं और अपनी जिद से उसे अपना बना लेना चाहते हैं बिना ये जानने की कोशिश किये कि मैं भी उनसे मोहब्बत करता हूँ या नहीं। खैर कई लोग आये अपना अपना परचम लहरा के चले गए।

अपने पीछे छोड़ गए उस गंध की निशानियां जो अक्सर वो बलात मोहब्बत के बाद उस प्रेयसी के शरीर पर छोड़ जाते हैं। अब हवाएं और भी तेजी से चलती हैं मेरा दर्द समझती हैं बारिशें मेरे जख्मों पर बरस कर मलहम लगाने की कोशिश करती हैं। तुम्हारे छोड़े उन ऑक्सीजन सिलेंडरों उन खाने के पैकेट्स के साथ तुम्हारी लाशों का बोझ उठाना कितना मुश्किल है तुम नहीं समझ पाओगे। जानते हो ना 8 टन कचरा उठाया है मुझ पर से तुमने। पर बस अब बख्श दो मुझे, मैं अब तुम्हारा और तुम्हारे क़दमों का बोझ और नहीं सह सकता।


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