Episode 6
Episode 6
जब वक़्त ने किसी और को चुना
"रक्षक बदले जाते हैं"
सुबह की हल्की धूप। शहर सामान्य लग रहा है—बहुत ज़्यादा सामान्य।
नायक सड़क किनारे बैठा है। घड़ी उसकी जेब में है, लेकिन अब वह उसे छूता नहीं।
(नायक):
"मैंने सोचा था, अगर मैं नहीं करूँगा… तो कुछ नहीं होगा। लेकिन वक़्त कभी खाली नहीं रहता।"
नायक एक चाय की दुकान पर खड़ा है।
टीवी चल रहा है।
News Anchor (TV):
"आज सुबह एक चमत्कारिक घटना में, एक स्कूल बस बड़ा हादसा होने से बाल-बाल बची…"
वीडियो में दिखता है—
बस अचानक रुक जाती है।
लोग जम जाते हैं।
और फ्रेम के कोने में—
एक लड़का।
नायक की साँस अटक जाती है।
लड़के की कलाई में—
वही घड़ी।
नायक टीवी के और पास जाता है। स्क्रीन पर नाम फ्लैश होता है—
"अज्ञात नायक"
"तो यह सच था… अगर मैं नहीं, तो कोई और।"
घड़ी उसकी जेब में अचानक ठंडी हो जाती है—जैसे वह अब उसकी नहीं रही
शाम। वही पुल जहाँ पहले आत्महत्या करने वाला आदमी मिला था।
नायक वहाँ खड़ा है। थोड़ी देर बाद वही लड़का आता है—डरा हुआ, उलझा हुआ।
नायक:
"तुम्हें भी अजीब सपने आ रहे हैं?"
लड़का चौंकता है।
लड़का:
"आपको कैसे पता?"
नायक मुस्कुराता है—कड़वाहट के साथ।
नायक उसे सब बताता है—घड़ी, कीमत, परछाईं।
लड़का हँसने की कोशिश करता है।
लड़का:
"तो मैं हीरो बन गया?"
नायक सिर हिलाता है।
नायक:
"नहीं। तुम अगला क़र्ज़ बन गए हो।"
The
लड़का अपनी परछाईं की ओर देखता है।
परछाईं…
हिलती नहीं।
एक सेकंड बाद हिलती है।
लड़के का चेहरा सफ़ेद पड़ जाता है।
रात। पुल के नीचे पानी बह रहा है।
नायक अपनी जेब से अपनी पुरानी घड़ी निकालता है—अब वह साधारण है, टूटी हुई।
वह उसे नदी में फेंक देता है।
(नायक):
"मैंने वक़्त नहीं छोड़ा था… वक़्त ने मुझे छोड़ दिया था।"
कैमरा ऊपर जाता है—
नए लड़के की कलाई पर घड़ी हल्की-सी चमकती है।
