सब एक पैसे के लिए
सब एक पैसे के लिए
"पैसा तो बस एक कागज़ है, जिसमें गांधी की एक तस्वीर और कुछ संख्याएँ लिखी होती हैं, लेकिन हम इंसानों ने उसे इतना अहमियत (महत्व) दिया है कि उसे इंसानों से भी बड़ा बना दिया है।अभी ऐसा समय आ गया है हम इंसानों ने पैसों को अहमियत देकर कि, अभी पैसों से हर चीज़ खरीदी जा सकती है—चाहे वह कितनी भी कीमती चीज़ हो या इज़्ज़त। 'हाँ', सही सुना आपने! हमने पैसे को इतना अहमियत (महत्व) दे दिया है कि हम पैसों से इज़्ज़त भी खरीद सकते हैं; यहाँ तक कि पैसों से हम किसी की खुशी भी खरीद सकते हैं। ऐसा हो सकता है कि वह खुशी एक-दो दिन की ही हो, लेकिन खुशी तो मिलती ही है! इंसान पैसे के लिए इस हद तक गिर चुका है कि वह पैसे के लिए किसी की जान तक ले सकता है—चाहे वह इंसान अपना हो या पराया।अभी तक तो मैं इतना जान चुका हूँ और शायद यह बात आप भी जानते होंगे कि ज़िंदगी में पैसा ही सब कुछ है और पैसों से बड़ा कुछ नहीं है।बस आप इतना समझ लीजिए कि इंसान कुछ भी करता है, बस पैसों के लिए—चाहे वो पढ़ता हो, पढ़ाता हो, या कुछ भी करता हो। पैसा इस कदर तक हावी हो गया है हम पर कि पैसों के लिए एक पुत्र अपने माता-पिता को घर से निकाल देता है, एक भाई अपने भाई को मार देता है। इंसानों ने इस ज़िंदगी से कुछ मतलब रखा ही नहीं।बस सब एक पैसे के लिए।"
