एक प्रेम पत्र ऐसा भी
एक प्रेम पत्र ऐसा भी
मेरी प्यारी बीवी
मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। शायद तुम भी इस बात को अच्छे से जानती हो फिर भी सोचा तुम्हें याद दिला दूँ। हमारी शादी को २० साल हो गए पर कुछ बातें ऐसी है जो मैं तुम्हें बता नहीं पाया।
तो चलों शुरुआत उस समय से करते है जब हमारी सगाई हुई थी। मैं बहुत खुश था उस दिन। ऐसा नहीं है कि मेरे लिए लड़कियों की कमी थी पर हाँ इतना जरूर कह सकता हूँ कि तुम जैसी कोई दूसरी नहीं थी। जब कॉलेज में पढ़ता था हर लड़की मरती थी मुझपर। पर मुझे किसी स्पेशल लड़की का इंतजार था।और मेरी लाईफ मे वो स्पेशल लड़की तुम थी।
तुम तो जानती ही हो घर का बड़ा होने की वजह से मुझ पर कई जिम्मेदारी थी। मैंने निभाने की पूरी कोशिश की और बदले मे किसीसे कोई उम्मीद नहीं रखी। पर जब तुम मेरी जिंदगी मे आई उम्मीद की एक डोर सी बंध गई सोचा शायद तुम तो मुझे समझोगी।
याद है जब हमारी नई नई शादी हुई थी। मुझे हमेशा संडे का इतंजार रहता था सोचता तुम्हें कही घूमने ले जाऊँ तुम्हारे साथ समय बिताऊँ पर शायद तुम्हें तो मेरे साथ समय बिताना भी पसन्द नहीं था। हमेशा कुछ न कुछ बहाने बना देती मम्मी जी पापाजी को बुरा लगेगा। हर संडे क्या बाहर जाना। कौन क्या सोचेगा किसको क्या लगेगा हर किसीकी फिक्र थी तुम्हें। पर मेरा क्या? मैं क्या सोचता हूँ मुझे कैसा फील होता हैं वो कभी नहीं सोचा तुमने। क्योंकि तुम जानती थी तुम्हारे सिवाय मेरा कोई ठिकाना नहीं।
फिर क्या कुछ साल बाद बच्चे हुये। तुम्हारा सारा वक्त उनके लिए था। तुम उनके साथ इतनी बिजी हो गई कि मेरे लिए समय नहीं था तुम्हारे पास।ठीक हैं फिर भी मैंने तुम्हारा इतंज़ार किया की शायद अपनी सारी जिम्मेदारियां निभाकर कभी न कभी तुम मेरे पास लौट आओगी। लेकिन बच्चे बडे हुए तो जिम्मेदारियाँँ और भी बढ गई उनके लिए भी तुम मुझसे लडने झगडने लगी।
कभी कभी सोचता हूँ कि शायद मैं ही गलत हूँ।मैं खुश हूं कि तुमने अपनी सारी जिम्मेदारियाँँ बहुत अच्छे से निभाई। मेरे हर सुख दुख में मेरे साथ दिया। कभी उफ् तक नहीं किया। पर फिर भी तुम्हारे साथ होते हुए भी ,तुम्हारे पास होते हुए भी। मैं बहुत अकेला महसूस करता हूँ। ऐसा लगता हैं कोई नहीं जो मुझे समझे जिसे मेरी फिक्र हो। इसलिए कहता हूँ अब लौट आओ मेरे पास मुझे तुम्हारा इतंजार हैं। अब जी ले हम अपने लिए भी।
तुम्हारे इतंज़ार में
तुम्हारा जीवनसाथी।
