एक नया आरंभ
एक नया आरंभ
राधा बेटा तुम !इस वक्त पापा ने दरवाजा खोलते ही राधा और कुछ महिलाओं को सामने देखा। अचानक फोन भी नहीं किया राधा की तुम आने वाली हो ? राधा चुप थी।पर मम्मी ने राधा के चेहरे को देखते ही बोला कुछ हुआ क्या ससुराल में?क्योंकि काफी दिनों से राधा और उसके ससुराल वालों की निभ नही रही थी। आप सब?राधा की माँ ने सबको बैठने का इशारा करते हुए पूछा।जी ,मै रोशनी और ये मेरी संस्था नारी चेतना के सद्स्य । मै राधा की पडोसी भी हूँ आप राधा से पूछिये की क्या हुआ?
।तब राधा ने रोते रोते बताया
मयंक से शादी के बाद ही पता चला था कि वो शराब बहुत पीता है ।आपको तो बताया था मम्मी पापा। पर आपने कहा कोई नही सब सही हो जायेगा शराब में धूत रहता। मैने टोकना शुरू किया तो बस लड़ाई झगड़े शुरू हो गए ।तब भी मैने फोन किया था, हर बात बताई थी । पर आपने बोला समय लगेगा ।शादी के शुरू मे नौक झोंक चलती है।
समय जायेगा सब ठीक होगा। ससुराल मे पापा जी ,मम्मी जी भी मयंक को कुछ नहीं कहते क्योंकि पापा जी भी शराब पिया करते थे ।उनके परिवार का यह आम बात हो गई थी। हमारे परिवार में बहुत शांत स्वभाव के थे ।और मम्मी मै तो ऐसा तो वह सोच भी नहीं सकती थी कि मयंक ऐसा निकलेगा !ऑफिस से आते ही मयंक पीने के लिए बैठ जाता और मुझ पर गुस्सा करता ,जब भी मै टोकती।तो हर बात पर लडता ,पेशे से डाक्टर था ।पर किसी के सामने भी वो अपना बुरा व्यवहार नही करता ।आप दोनो के सामने बढिया दामाद बनता। सब उसकी तारिफ करते। किसी मेहमान के जाते ही वह मेरे साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता बस उसे मौका चाहिए था ।राधा को टोकने का कभी वहां पर यह समान क्यों है ?कभी कुछ.... यहाँ क्यू खडी हो ?,सब्जी बेकार बनी क्योंकि मै उसको हमेशा शराब पीने के लिए मना करती थी ।एक दिन मैने उसकी बोतल उठा कर फेंक दी। इस बात पर गुस्सा होकर मयंक ने मुझ पर हाथ उठा दिया था और सारी रोती रही।
सास ससुर ने कुछ नहीं कहा ।
अभी आम बात हो गई थीऔर मेरे टोकने पर मयंक जब चाहे उसके ऊपर हाथ उठा देताआप दोनो. हर माता-पिता की तरह मुझे समझाते ही रहे । कभी मुझे समझने की कोशिश नही की मै दुखी हूँ।मुझको नौकरी करने के लिए पाबंदी थी और मै पढ़ी-लिखी होकर कुछ करना चाहती थी तो वह ससुराल वालों को पसंद नहीं था। तो सोचा कोई नही घर भी जरूरी है। कहीं बाहर जाती तो उसकी सजने सवरने पर दस सवाल कर दिए जाते।
एक तरह से उस घर में कोई अहमियत नहीं थी ।उनको काम करने के लिए एक बहू नहीं कामवाली चाहिए थी। कब बैठना है ?किसके साथ बैठना है? क्या बनाना है? क्या खाना है ?किस समय खाना है? सब उन लोगों के कहने पर ही होता। रोशनी ने कहा राधा की अपना कुछ भी अस्तित्व नहीं रह गया था। किसी मेहमान के सामने उसे बैठने तक नहीं दिया जाता था।
राधा कहने लगी और मैं पढ़ी-लिखी होकर एक कैद में बुलबुल जैसी हो गई थी ।रो रो कर अब आँसु आने भी बंद हो गये। कहीं बाहर किसी कार्यक्रम में मुझे साथ ले जाना पड़ता तो सबके साथ उसका व्यवहार ऐसा होता कि बहु नहीं बेटी है और मयंक मुझको जान से प्यार करता है ,सब दिखावटी करके आ जाते और घर में मेरी स्थिति नौकरानी से भी बदतर थी । मारपीट करके मै एक डरी सहमी लड़की बन चुकी थी। क्योंकि यहां मायके में भी आपका साथ नहीं मिल रहा था। राधा सुबक सुबक रो रही थी मम्मी की गोद मे सिर रख कर।
कब मंयक हाथ उठा देगा ?जरा सा जवाब देने पर मुझको खाना नहीं दिया जाता था। जरा सी गलती पर मयंक उसे बेइज्जत करता। शरीर पर चोट के निशान भी पडने लगे थे। कहीं कोई आस पड़ोस वाली आकर पूछ लेती तो दस बहाने तैयार थे।
घर के सामने एक नारी संस्था की महिला ये रोशनी दीदी रहती थी । हाँ रोशनी ने कहा मुझे हमेशा राधा पर कुछ अंदेशा रहता कि जैसे राधा खुश नहीं है पर पड़ोस में रहने की वजह से कुछ ज्यादा कुछ राधा के लिए कर भी नहीं पा सकती थी। एक दिन घर में किसी के ना होने पर वह राधा के पास आई और उन्होंने राधा को बहुत हिम्मत दी कि वह बताएं कि उसके साथ कोई परेशानी है क्या? पर राधा डर की वजह से कुछ कह नहीं पा रही थी। ऐसा कई बार हुआ रोशनी जी ने राधा को अपने हक के लिए कुछ बातें समझाएं ।
पर राधा उनके सामने ही मानने को तैयार नहीं थी कि ससुराल वाले उसे परेशान करते हैं। क्योंकि वह बहुत डरी हुई थी। एक दिन रात को शराब में धुत मयंक राधा पर जोर जोर से चिल्ला रहा था और मार रहा था की सब्जी अच्छी नहीं बनी। राधा बहुत जोर जोर से रो रही थी ,तभी रोशनी जी ने आवाज सुनी और सोसाइटी वालों को लेकर वह उनके घर पहुंच गई ।सब लोग ऐसे बन गए जैसे घर में कुछ हुआ ही नहीं था। क्योंकि राधा को उस वक्त काफी चोटें लगी हुई थी और राधा नीचे गिरी पड़ी हुई थी और उठ नहीं पा रही थी।
अब राधा के पास भी कोई बहाना नहीं था। ससुराल का फिर भी वह कहने लगी कि मैं गिर गई थी पर सब समझ रहे थे कि उसके ऊपर बहुत हाथ उठाया गया है ।और उस पर मानसिक और शारीरिक अत्याचार हुआ है। सब राधा को पुलिस स्टेशन ले गए और ससुराल वालों के खिलाफ सोसाइटी में हंगामा और राधा के साथ दुर्व्यवहार का केस करा और राधा को लेकर घर पहुंचे ।आपने जैसे व्यवहार किया अपनी बेटी से ,ऐसी ही ससुराल मे पीडित बेटियाँ या तो मारी जाती है ।या आत्महत्या करती है मायके का साथ हो तो ऐसा नही होता।
ओह मेरी बच्ची ! इतना कुछ !
मम्मी पापा दोनो रोने लगे।
और राधा के माता-पिता को समझाया सबने कि समाज क्या कहेगा ? अपनी बेटी के दुख सुख में वह साथ नहीं है तो ऐसे माता-पिता का क्या फायदा है? की बेटी अत्याचार सहते सहते मर जाए और माता-पिता बस यही समझाते रहे, कि कुछ दिन में सब सही हो जाएगा !अब माता-पिता उसके समझ चुके थे । रोशनी और सब साथियों को धन्यवाद दिया ।
रोशनी जी ने राधा को रोज आकर समझाया "" डरो नही बुरी रात बीत गई. है नयी जिंदगी राह दिख रही है।
मयंक से शादी करके जिंदगी खत्म नहीं हो गई उसको अपनी करनी की सजा कानून जरूर देगा और तुम उसकी वजह से अपनी जिंदगी खराब नहीं कर सकती तुम्हे उठकर आगे बढ़ना होगा और नहीं राह निकालनी होगी बहुत परिवारों में इससे बुरी बुरी बातें हो जाती हैं और तब भी वह लड़कियां उठकर खड़ी हो जाती हैं आगे बढ़ने के लिए और सबको एक मिसाल दे जाती हैं जिंदगी में कुछ करके अब तुम्हारी बारी है।एक कविता तुम्हारे लिए लिखी है पढ लेना ।रोशनी के जाने के बाद राधा ने कागज पढा ...लिखा था
"अनमने मन का खुद से है सामना
असंभव का संभव हो, यह है तुम्हें मानना
अपने शब्दकोश से ,काश शब्द हटाना होगा
डर को निडर, असंभव को संभव, बनाना होगा
अनमने मन को आज ये समझाना होगा
जब... कुछ करने की इच्छा से साहस से भर जाएगी
तब तुम्हें एक नयी दुनिया नजर आएगी ।
और कुछ ही दिन में आत्मविश्वास आने लगा। प्यार और देखभाल से राधा शादी से पहले वाली राधा बन गई थी। आगे की पढ़ाई करने के लिए उसके माता-पिता ने एडमिशन करा दिया गया था ।ससुराल वालो को सजा मिली और अब डर खत्म हो गया था। आत्मविश्वास से भरी राधा और एक नई राह चुनने के लिए वह तैयार थी।
बुरी रात बीत गयी थी अब नया सवेरा दिख रहा था।
