एक लक्ष्मी जायेगी,दूसरी आयेगी

एक लक्ष्मी जायेगी,दूसरी आयेगी

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शिखा जी आज बहुत खुश थी,अपनी बेटी आशी का रिश्ता जो पक्का कर के आई थी | संपन्न परिवार का पढ़ा-लिखा लड़का था आशीष | चार महीने बाद की शादी की तिथि निकली थी | शिखा जी के दो ही बच्चे थे उनका बेटा आकाश आशी से दो साल बड़ा था पर आशी के लिए अच्छा रिश्ता मिल गया इसलिए घर में सबने पहले उसकी शादी करने का मन बना लिया था | 



सब बहुत खुश थे की चार दिन बाद ही आशी के पापा के पास आशीष के पापा का फोन आया...उन्होंने आशी के पापा से बड़े ही विनम्रता पूर्ण अंदाज़ में कहा की "आशीष के चाचाजी को आपका बेटा आकाश उनकी बेटी महक के लिए बहुत अच्छा लगा, अगर आप कहें तो एक बार सब मिल लेते हैं | आकाश के पापा ने दो दिन बाद का मिलने का प्रोग्राम बना लिया | आकाश और महक ने कुछ देर बातें की और शादी के लिए हाँ कर दी | दोनों ही बच्चों की शादी पक्की होने से जहाँ शिखा जी खुश थी...वही उन्हें बहुत चिंता भी हो रही थी कि दो-दो शादियों की तैयारी एक साथ कैसे करेंगी | अब आशी की शादी की तारिख दो महीने बाद की रखी गयी और आकाश की शादी की चार महीने बाद शादी तय हुई... क्यूंकि सबका मानना था एक लक्ष्मी जायेगी तो दूसरी आएगी | 



दोनों तरफ के परिवार शादी की शॉपिंग में लग गए | शिखा जी ने एक दिन सोचा आज आशी और महक का लहंगा ले लेते हैं | इसके लिए उन्होंने महक को भी शॉपिंग के लिए बुला लिया ताकि लहंगा उसकी भी पसंद का आ सके | बहुत से शो रूमस में देखने के बाद एक जगह शिखा जी को दो लहंगे पसंद आगये परन्तु आशी और महक को एक ही लहंगा पसंद आ रहा था | आशी ने अपनी मम्मी से हँसते हुए कहा "मम्मी देखो भाभी की और मेरी पसंद कितनी मिलती है, दोनों को एक ही लहंगा पसंद आ रहा है"| शिखा जी को जो दो लहंगे पसंद आ रहे थे, उनमें से एक लहंगा चार हज़ार रुपय महंगा था...शिखा जी ने वो लहंगा आशी के लिए लेने का मन बना लिया जबकि वो लहंगा आशी और महक दोनों को पसंद आ रहा था और दोनों के ऊपर पहना हुआ भी बहुत सुन्दर लग रहा था। शिखा जी ने उस बात की परवाह न करते हुए उस महंगे लहंगे के लिए दुकानदार से आशी का नाप लेने को कह दिया । आशी ने कहा "मम्मी मैं इस से मिलता-जुलता कोई और लहंगा ले लूंगी। आप भाभी के लिए ये लहंगा सिलवा दो क्यूंकि महक कुछ बोल तो नहीं पायी थी पर आशी उसका मायूस चेहरा देखकर समझ गयी थी। महक कुछ बोलती उससे पहले ही उसकी सास बोली "कोई फर्क नहीं पड़ता दो-चार हज़ार में । अब पहले ही इतना टाइम हो गया है, मैं तो अब थक चुकी हूँ। अब मुझ में और लहंगे देखने की हिम्मत नहीं है"। कहते हुए शिखा जी ने दुकानदार से उस दूसरे लहंगे को महक के नाप का बनाने को बोल दिया। उन्होंने इस बात की भी परवाह नहीं की कि वो लहंगा महक को ज़्यादा पसंद नहीं है क्यूंकि वो आशी का लहंगा महक से अच्छा लेना चाहती थी। आशी को अपनी मम्मी का ऐसा व्यवहार बिल्कुल पसंद नहीं आया और महक के मन में भी कहीं ना कहीं ये आता रहा कि मम्मी जी कुछ समय लगा कर उसकी पसंद का कोई और लहंगा देख लेती। 


कुछ दिन बाद लहंगे बन कर आ गये। शिखा जी ने सोचा लहंगे के मैचिंग की चूड़ियां लेकर साथ-साथ सारा सामान महक के घर भिजवा देंगे । उन्होंने आशी से कहा "तू और महक जाकर चूड़ियां पसंद कर आओ"। आशी ने कहा "पहले मैं अपना लहंगा पहन कर देख लेती हूँ, ठीक बना है की नहीं"। कुछ देर बाद आशी लहंगा पहन कर बाहर आयी तो शिखा जी को तो एक दम से झटका ही लग गया । उन्होंने कहा "ये लहंगा तो मैंने महक के लिए पसंद किया था फिर दुकानदार ने तेरे नाप का कैसे बना दिया ।


आशी ने अपनी मम्मी के कन्धों पर हाथ रखते हुए कहा "मम्मी मैं आपके घर की लक्ष्मी को घर में आने से पहले ही नाराज़ नहीं करना चाहती थी । मैं भाभी के उदास चेहरे को देख कर समझ गयी थी कि वो ये लहंगा नहीं बनवाना चाहती। मैं नहीं चाहती थी रिश्ता शुरू होने से पहले ही हमारे रिश्तों में गांठ पड़ जाये । अगर आप कुछ देर और लगा कर भाभी के लिए दूसरा लहंगा देख लेती तो उनका मन कितना खुश होता क्यूंकि हर लड़की का सपना होता है कि वो दुल्हन के रूप में सबसे सुंदर लगे । आपके ऐसा करने से उनके मन में शुरू से ही यह बैठ जाता कि बेटी के लिए महंगा लहंगा पसंद कर लिया और बहु के लिए सस्ता । शिखा जी आशी की बातें सुनकर कुछ देर तो उससे बहस करती रही कि "तू मुझे मत सिखा...बेटी तो बेटी ही रहेगी पर आशी के बार-बार समझाने पर उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और उसे गले लगाते हुए बोली "ऐसा लग रहा है...मैं तेरी माँ नहीं हूँ, तू मेरी माँ है"। 


जब आशी और महक चूड़ियां लेने गये और आशी ने महक का ब्लाउज़ दुकानदार को दिखाते हुए कहा "इसके मैचिंग की इनके साइज़ की चूड़ियों का सैट दिखाइये"...तो महक एकदम से बोली "अरे दीदी ये लहंगा तो आपका है ना"? तब आशी ने उसे बताया कि उसने घर आकर दुकानदार को फोन कर के बता दिया था की ये लहंगा आपके साइज का बनाना है तो महक को रोना ही आ गया वह आशी को गले लगाते हुए बोली "ये आपने क्या किया...आपको तो ये लहंगा बहुत पसंद था"। आशी ने महक के गाल खींचते हुए कहा "ये आपके ऊपर ज़्यादा अच्छा लग रहा था"। महक के पास शब्द नहीं थे कुछ बोलने के लिए ?


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