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Anand Mishra

Action Classics Fantasy

4  

Anand Mishra

Action Classics Fantasy

एक ही दिन

एक ही दिन

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4

उज्जैन
वर्ष 2041

आर्यवर्धन तिवारी भारत के सबसे प्रसिद्ध आपदा प्रबंधन आयुक्त थे।

उनकी पहचान थी—

तेज़ निर्णय।

असाधारण संगठन क्षमता।

और कठोर अनुशासन।

लेकिन लोग उनसे डरते अधिक थे, सम्मान कम करते थे।

वे परिणाम देखते थे...

लोगों को नहीं।

एक दिन उन्हें विंध्य क्षेत्र के एक छोटे कस्बे अमृतपुर जाना पड़ा।

मौसम विभाग ने अत्यधिक वर्षा की चेतावनी दी थी।

आर्यवर्धन ने स्थानीय अधिकारियों की बात सुने बिना आदेश जारी किए।

कुछ लोगों को लगा कि वह जल्दबाज़ी कर रहे हैं।

कुछ को लगा कि वे उनकी बात सुन ही नहीं रहे।

रात को उन्होंने अपनी रिपोर्ट पूरी की।

घड़ी में 11:59 बजे।

उन्होंने आँखें बंद कीं।

सुबह...

फिर वही तारीख़।

17 जुलाई।

उन्होंने सोचा—

शायद भ्रम है।

लेकिन वही समाचार।

वही लोग।

वही बैठक।

वही वर्षा।

उन्होंने पूरे दिन अलग-अलग निर्णय लिए।

रात आई।

फिर...

17 जुलाई।

दिन बदलता ही नहीं था।

पहले उन्होंने इसका लाभ उठाया।

सभी आँकड़े याद कर लिए।

हर बैठक का परिणाम पहले से जान लिया।

लोगों को प्रभावित करने लगे।

लेकिन अगली सुबह...

सब फिर वैसा ही।

उन्होंने चिड़चिड़े होकर कहा—

"इसका कोई अर्थ नहीं।"

एक वृद्ध विद्यालय अध्यापक ने उनकी ओर देखकर पूछा—

"यदि हर दिन नया अवसर हो..."

"...तो अर्थ क्यों नहीं होगा?"

आर्यवर्धन ने ध्यान नहीं दिया।

दिन दोहराते रहे।

उन्होंने अलग-अलग प्रयोग शुरू किए।

एक दिन केवल बच्चों के साथ बिताया।

एक दिन अस्पताल में।

एक दिन किसानों के बीच।

एक दिन उन्होंने पहली बार बिना टोके...

स्थानीय महिला स्वयंसेविका रेवती की पूरी बात सुनी।

रेवती ने नक्शा बनाकर दिखाया—

"बाढ़ नदी से नहीं आएगी।"

"पुराने वर्षाजल मार्ग बंद हो चुके हैं।"

आर्यवर्धन चौंक गए।

वर्षों का अनुभव...

लेकिन यह बात उन्होंने कभी पूछी ही नहीं थी।

उन्होंने महसूस किया—

वे समस्या हल करने में इतने व्यस्त थे...

कि लोगों को समझना भूल गए थे।

दिन फिर दोहराया गया।

इस बार उन्होंने कोई आदेश नहीं दिया।

उन्होंने केवल प्रश्न पूछे।

गाँव वालों से।

बच्चों से।

मज़दूरों से।

अध्यापकों से।

धीरे-धीरे पूरा मानचित्र बदल गया।

उन्होंने स्थानीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक को जोड़ दिया।

जब शाम आई...

तो इस बार बाढ़ का पानी नियंत्रित मार्गों से निकल गया।

किसी की जान नहीं गई।

रात को उन्होंने पहली बार शांति से आँखें बंद कीं।

सुबह...

घड़ी में 18 जुलाई था।

समय आगे बढ़ चुका था।

आर्यवर्धन मुस्कुराए।

रेवती ने पूछा—

"आप इतने प्रसन्न क्यों हैं?"

उन्होंने उत्तर दिया—

"कल पहली बार आया है।"

"क्योंकि आज मैंने उसे कमाया है।"

आर्यवर्धन की निजी डायरी

18 जुलाई 2041

"मैंने सोचा था कि नेतृत्व का अर्थ सही उत्तर देना है।

फिर एक दिन ने मुझे सिखाया कि नेतृत्व का अर्थ सही प्रश्न पूछना है।

समय मुझे दंड देने के लिए नहीं रुका था।

समय तब तक रुका रहा, जब तक मैं बदल नहीं गया।"



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