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Anand Mishra

Action

5  

Anand Mishra

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दूसरा चेहरा

दूसरा चेहरा

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4

मुंबई
वर्ष 2038

मुंबई महानगर में नए सार्वजनिक शिकायत एवं नागरिक सहायता केंद्र की स्थापना हुई।

उस केंद्र का प्रभारी नियुक्त हुआ—

अमय त्रिवेदी।

साधारण कपड़े।

धीमी आवाज़।

नियमित जीवन।

वह हर शिकायतकर्ता से एक ही बात कहता—

"पहले पूरी बात बताइए।

समाधान बाद में खोजेंगे।"

कुछ ही महीनों में वह लोगों का प्रिय अधिकारी बन गया।

उसे गुस्सा करते किसी ने नहीं देखा।

एक शाम एक कॉलेज छात्रा, रिया, काँपती हुई केंद्र पहुँची।

उसने बताया कि शहर में एक संगठित गिरोह मेधावी छात्रों को नौकरी का झाँसा देकर उनके दस्तावेज़ और पहचान का दुरुपयोग कर रहा है।

जो विरोध करता...

वह रहस्यमय ढंग से गायब हो जाता।

पुलिस के पास शिकायतें थीं।

सबूत नहीं।

अमय ने रिया से केवल एक प्रश्न पूछा—

"तुम सच बोलने को तैयार हो?"

रिया ने बिना झिझक कहा—

"हाँ।"

उसी रात चार लोग अमय के घर पहुँचे।

उन्होंने धमकी दी—

"यह मामला भूल जाइए।"

अमय ने दरवाज़ा बंद किया।

कुछ ही मिनटों बाद चारों बाहर सड़क पर निःशस्त्र पड़े थे।

किसी की हड्डी नहीं टूटी थी।

लेकिन कोई फिर खड़ा भी नहीं हो पा रहा था।

अगली सुबह निरीक्षक स्मिता देशपांडे ने पूछा—

"आप हैं कौन?"

अमय मुस्कुरा दिए।

"सरकारी कर्मचारी।"

स्मिता को उत्तर पर विश्वास नहीं हुआ।

जाँच के दौरान उन्हें पता चला कि अमय का कोई डिजिटल इतिहास दस वर्ष से पुराना उपलब्ध ही नहीं था।

मानो उनका जीवन वहीं से शुरू हुआ हो।

धीरे-धीरे गिरोह के लोग एक-एक करके पकड़े जाने लगे।

लेकिन अमय उन्हें मारते नहीं थे।

हर बार वे उन्हें जीवित पुलिस के हवाले करते।

और हर गिरफ्तारी के साथ नए दस्तावेज़, नए बैंक रिकॉर्ड और नए गवाह सामने आ जाते।

गिरोह का सरगना—

विक्रांत सूरी

समझ गया कि सामने वाला आदमी केवल लड़ना नहीं जानता...

वह वर्षों से उसकी पूरी व्यवस्था को समझ रहा है।

उसने अमय का अतीत खोज निकाला।

दस वर्ष पहले...

अमय का नाम अद्वैत राणा था।

वे राष्ट्रीय वित्तीय अपराध प्रकोष्ठ में अन्वेषक थे।

उन्होंने युवाओं की पहचान चोरी करने वाले एक विशाल नेटवर्क का पर्दाफाश किया था।

लेकिन अंतिम कार्रवाई से पहले उनके पूरे दल की हत्या कर दी गई।

अद्वैत अकेले बच गए।

उन्होंने नौकरी छोड़ दी।

अपनी पहचान बदल ली।

और दस वर्षों तक चुपचाप पूरे नेटवर्क का अध्ययन करते रहे।

वे प्रतिशोध नहीं...

पूर्ण प्रमाण चाहते थे।

विक्रांत ने उनका सामना किया।

"दस साल..."

"सिर्फ़ बदला लेने के लिए?"

अमय ने शांत स्वर में उत्तर दिया—

"यदि बदला लेना होता..."

"...तो पहली रात ही ले लेता।"

"मैं चाहता था कि तुम्हारा अपराध तुम्हारे साथ समाप्त न हो।"

"तुम्हारी पूरी व्यवस्था कानून के सामने खड़ी हो।"

अंतिम टकराव एक परित्यक्त डेटा केंद्र में हुआ।

विक्रांत ने सारे डिजिटल अभिलेख मिटाने का प्रयास किया।

अमय ने उसे रोकने के लिए संघर्ष किया।

लंबी लड़ाई के बाद विक्रांत हार गया।

लेकिन अंतिम क्षण में उसने सर्वर नष्ट करने का बटन दबा दिया।

अमय ने उसे पकड़ने के बजाय...

पहले सर्वर की आपात ऊर्जा प्रणाली सक्रिय की।

डेटा सुरक्षित हो गया।

उसी डेटा में हजारों पीड़ितों के प्रमाण थे।

स्मिता ने आश्चर्य से पूछा—

"आप उसे भागने भी दे सकते थे।"

अमय ने उत्तर दिया—

"एक अपराधी फिर पकड़ा जा सकता है।"

"लेकिन यदि सत्य मिट जाए..."

"...तो हजारों पीड़ितों को न्याय कभी नहीं मिलेगा।"

कुछ महीनों बाद न्यायालय ने पूरे गिरोह को दोषी ठहराया।

सैकड़ों युवाओं की पहचान बहाल हुई।

कई परिवार वर्षों बाद सामान्य जीवन में लौट सके।

रिया का भाषण – विधि विश्वविद्यालय, पाँच वर्ष बाद

"लोग अक्सर पूछते हैं कि सबसे साहसी व्यक्ति कौन था।"

"वह नहीं जिसने सबसे अधिक लोगों को हराया।"

"वह था जिसने दस वर्षों तक अपने क्रोध को प्रमाण में बदला।"

"मैंने उसी दिन सीखा कि न्याय की सबसे बड़ी शक्ति मुट्ठी में नहीं..."

"...धैर्य में होती है।"



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