Akanksha Gupta

Drama


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Akanksha Gupta

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एक छोटा रास्ता

एक छोटा रास्ता

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दिन ढल रहा था। हवा में ठंडक बढ़ रही थी। तरु अपनी कार में घर की तरफ लौट रहा था। उसका सफर अभी बीस किलोमीटर बाकी था। अपने शहर से पच्चीस किलोमीटर दूर इस बीहड़ और सुनसान इलाके में नौकरी करना आज उसकी एक मजबूरी और जरूरत दोनों ही थी क्योंकि आज के समय में हाथ में रोजगार का होना हवा में ऑक्सीजन होने से भी ज्यादा जरुरी हो गया है शायद।


तरु अपने घर जल्दी पहुंचना चाहता था इसलिए उसने एक छोटे रास्ते से निकलने की सोची। यह रास्ता उसके इस सफर को आधा कर सकता था। काम में हुई इतनी थकान के बाद रोज के समय से पहले घर पंहुचना किसी सपने से कम नही इसलिए तरु ने उस रास्ते पर अपनी कार मोड़ दी बिना यह सोचे कि उस रास्ते पर कोई खतरा भी हो सकता है।


तरु बमुश्किल दो मिनट तक ही उस छोटे रास्ते पर आगे बढ़ा था कि उसकी गाड़ी बंद हो गई। उसने नीचे उतरकर देखा तो गाड़ी का टायर पंचर हो गया था। उसने स्टेपनी खोलकर टायर बदलना शुरू किया कि तभी तीन लम्बे तगड़े आदमी उसके पास आकर खड़े हो गए। तरु टायर बदलने में इतना मग्न हो गया था कि उसे इसकी भनक तक नहीं लगी। कुछ देर बाद जब वह टायर बदल कर पीछे मुड़ा तो अपने पीछे तीन अजनबियों को खड़ा देख एकदम से घबरा गया। वे तीनों एकटक उसे ही देख रहे थे। तरु ने उन तीनों से धीरे से पूछा- “एक्सयूज मी, आप लोग यहाँ पर ऐसे क्यो खड़े है?”


उनमें से एक मुस्कुराते हुए बोला- “ हम लोग यहां काफी देर से खड़े हैं। हमारी गाड़ी यही पास में खराब हो कर बंद पड़ गई है। क्या आप हमें लिफ्ट दे सकते हैं बस यह रास्ता खत्म होने तक?”


तरु सोच में पड़ गया। ये लोग इस रास्ते पर क्या कर रहे है? क्या यह लोग सच कह रहे है? कही ये लोग गुंडे बदमाश तो नहीं जो उस जैसे राहगीरों को अकेला देखकर उन से लूटपाट करते हैं? या फिर ये लोग सच मे उसकी तरह ही इस छोटे रास्ते पर अपनी मंजिल की ओर जल्दी पहुंचना चाहते थे?


तरु यह सब सोच ही रहा था कि वे तीनों आदमी मुस्कुराये। उन तीनों को मुस्कुराते हुए देखकर तरु के हलक सूख गया। उसने नजर घुमाई तो एक ड्राइवर उस ओर चला आ रहा था। वह आते ही एक आदमी से बोला- “चलिए सर आपकी गाड़ी ठीक हो गई हैं।”


यह बात सुनकर वे तीनों आदमी खुश हो गए। उनमें से एक आदमी बोला- “ओ दैट्स ग्रेट। चलो अब जल्दी ही घर पहुंच जाएंगे। फिर वह तरु की तरफ देखकर बोला- “सॉरी, आपको परेशान किया।”


यह कहकर वह बाकी दोनों लोगों के साथ अपने रास्ते चले गए। उनके जाते ही तरु ने राहत की सांस ली और वह अपनी कार में बैठकर घर की ओर निकल पड़ा उसी छोटे रास्ते पर।





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