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Aditya Srivastav

Abstract Others Children

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Aditya Srivastav

Abstract Others Children

एक अल्फाज़

एक अल्फाज़

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जिसे मैं रखना चाहूं ज़ेहन से सदा

एक मुलायम मखमली लिबास है तू !


बारिश की पहली बूंद से निकली

मिट्टी की मादक मिठास है तू !


साग़र में मोती मिल जाए

तो पनपे जो एहसास है तू !


थोड़ी नाज़ुक थोड़ी कच्ची

जैसे दुबली सी कोई बच्ची


सुनहरे अक्षरों में लिखी हुई 

एक अल्फाज है तू।


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