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Dinesh Divakar

Drama

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Dinesh Divakar

Drama

दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 7

दिव्य दृष्टि- एक रहस्य 7

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अब तक

दृष्टि प्रेम बनकर सहस्त्रबाहु को चकमा देकर वहां से भाग जाती है और प्रेम और सहस्त्रबाहु को चुनौती देती है कि तीन दिन में जैसिका को बचा सकते हैं तो बचा ले वरना प्रेम और सहस्त्रबाहु को दृष्टि को हराने का उसके मायाजाल तक पहुंचने का कोई रास्ता नजर नहीं आता दोनों निराश हो जाते हैं।

अब आगे

सहस्र बाहु कमरे से बाहर चले जाते हैं प्रेम वहीं निराश होकर बैठ जाता है कहीं से भी कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। तभी सहस्त्रबाहु दौड़ते हुए आते हैं उनके मुख पर प्रसन्नता था वह आते ही बोला- मिल गया, मिल गया रास्ता।

प्रेम भी उत्सुकता से पूछा- कैसा रास्ता सर जल्दी बताइए ?

दिव्या - सहस्त्रबाहु बोले।

दिव्या ! - प्रेम हैरानी से बोला।

हां दिव्या तुम्हें याद है वह भी तो उसी मायाजाल में कैद रहती है उसे उस मायाजाल में पहुंचने का रास्ता पता होगा।

प्रेम- हां सर, इस बात पर तो मैंने ध्यान ही नहीं दिया लेकिन दिव्या तो उस समय से दिखी ही नहीं।

सहस्र बाहु - तुम उसे भुलाओ तुम्हारे बुलाने से वह जरूर आयेगी, एकांत मन से उसका ध्यान करो। 

प्रेम दिव्या का ध्यान करके उसे बुलाता है - दिव्या हमारी मदद करो हमें तुम्हारी मदद की जरूरत है।

थोड़ी ही देर में दिव्या वहां प्रगट हो गई- क्या हुआ प्रेम ?

प्रेम- भगवान का लाख-लाख धन्यवाद जो तुम आ गए, जैसीका को दृष्टि ने अपने मायाजाल में कैद कर लिया है मुझे जैसिका को उस मायाजाल से बाहर लाने में तुम्हारी मदद चाहिए।

दिव्या चौंक पड़ी- क्या मतलब वो जैसिका थी ?

प्रेम- जैसिका थी मतलब !

दिव्या - दृष्टि एक लड़की को अपने मायाजाल में कैद कर रही थी मुझे लगा कोई और है।

प्रेम- इसका मतलब तुम जानती हो जैसिका को दृष्टि ने कहा कैद किया है।

दिव्या- पता तो है लेकिन उसे उस मायाजाल के सबसे ख़तरनाक जगह पर कैद करके रखा है । जिससे उस जगह पर पहुंचा असंभव है।

प्रेम- चाहे कुछ भी हो मैं जैसिका को बचाने जाउंगा तुम मेरा साथ दोगी ना !

दिव्या- मैं तो हमेशा से तुम्हारे साथ हूं।

इतने देर से चुप बैठे सहस्त्रबाहु बोले- प्रेम वह अपने शक्तियों के घमंड में एक गलती कर दिया जैसिका के शरीर से बाहर निकल कर जिससे उसे खत्म करना थोड़ा आसान हो जाएगा और उस मायाजाल को खत्म करने के लिए उसके मूल तक जाना होगा उसके मूल को खत्म करने से वह मायाजाल नष्ट हो जाएगा।

ये लो दो त्रिशूल इससे तुम दोनों एक साथ उस मायाजाल पर और दृष्टि पर वार करना इससे उसका अंत हो जाएगा और वह मायाजाल भी नष्ट हो जाएगा और हां याद रखना दोनों वार एक साथ होना चाहिए वरना..

और एक बात याद रखना जब तुम्हारे सामने मुश्किल ज्यादा हो जाए तो इसका मतलब तुम मंजिल के करीब हो । उससे डरना मत डटकर सामना करना और याद रखना पाप और पुण्य के जंग में जीत हमेशा सत्य की ही होता है।

अब जाओ तुम्हारे पास सिर्फ तीन दिन है दिखा दो उस भुतनी को कि हममें है दम।

प्रेम और दिव्या इस उम्मीद के साथ आगे बढ़े।

क्या प्रेम और दिव्या जीत पायेंगे पाप और पुण्य के जंग में ?


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