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Kalpesh Patel

Drama Inspirational Thriller

4.5  

Kalpesh Patel

Drama Inspirational Thriller

धड़क

धड़क

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30

धड़क

मंगल की सूनी ज़मीन पर वह अकेली थी।
खोज के लिए गई माँ सुनीता लौट नहीं सकी।

एक सन्नाटे भरी सुबह, धड़कते दिल से
सुनीता ने हेल्मेट उतारने का जोखिम लिया।

उसने सांस ली —
हवा थी!

हैरान होकर उसने लाल मिट्टी खोदी,
अंदर एक छोटा हरा अंकुर फूट रहा था।

धीरे-धीरे उसे समझ आया —
मंगल पर कुछ नहीं उगा था,
यह तो उसकी अंदर की आशा का अंकुर था।

अब उस सूने ग्रह पर
सुनीता अकेली नहीं थी।

आज मंगल पर सुनीता थी,
उसकी धड़क और उसकी आशा भी थी।



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