Priyanka Shrivastava "शुभ्र"

Drama


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Priyanka Shrivastava "शुभ्र"

Drama


डायरी के पन्ने डे सेवेनटीन

डायरी के पन्ने डे सेवेनटीन

3 mins 165 3 mins 165

लॉक डाउन का आज 17वां दिन है। 21 दिन के लॉक अप का मात्र 4 दिन शेष। सबके चेहरे पर एक खुशी की झलक होनी चाहिए थी। परंतु आज जिसे देखो उसके चेहरे पर एक आशंका की लकीर दिख रही है। लॉक अप में लाख परेशानियों का सामना करना पर रह हो सभी को पर किसी से भी पूछो की क्या लॉक अप समाप्त कर देना चाहिए तो हाँ की ध्वनि नहीं आती।गलती किसी की भी हो पर ये सत्य है कि आज पूरा विश्व के साथ हमारा देश भारत इस कोरोना की मकड़जाल में बुरी तरह घिरा हुआ है। मैं यूँ निराशा की बात नहीं करती पर आज मेरे मुख से भी निकल रहा है कि क्या ये महाभारत के चक्रव्यू रचना के समान सबल रचना का गठन कर लिया है जो समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रहा। 

घबराए नहीं ऐसी कोई भी बीमारी नहीं आई जिसका निदान न हुआ हो। नाश चाहे जितना भी कर ले पर इस कोरोना को भी मात खानी पड़ेगी। हर शत्रु का एक कमजोर कड़ी होता है। इसका भी है और जो इनको, उनको हमको आपको सभी को पता है। सामाजिक दूरी बनाना। हमसे चूक हो रही है।

जिस दिन हम सब मिल कर अपने कमजोर कड़ी को मजबूत कर लेंगे उस दिन कोरोना हमारे देश को, हमारी धरती को छोड़ चला जाएगसाइंटिस्ट इसके लिए भी टीकाकरण की खोज में लगे हुए हैं। साल के अंत तक जरूर इसका टीका आ जाएगा। तब तक हममें इतनी शक्ति हो कि हमलोग टीका आने से पहले सामाजिक दूरियाँ बढ़ा कर इसके चेन को तोड़ इसका नाश करने में सफल हो जाएँ। दूरदर्शन पर जनता के अनुरोध पर रामायण और महाभारत पुनः दिखाया जा रहा है। आज दोनों में ही यादगार भूमिका का दिन है। महाभारत में कृष्ण का रुक्मिणी से मिलन और रामायण में विभीषण का लंका छोड़ राम के पास जाना। 

मनोरंजन का समय समाप्त कर कर्तव्य की ओर बढ़ दिनभर के कार्यों को देख कल के लिए कुछ सार संभार कर लूँ। मैं इनदिनों नियमित रुप से काढ़ा पीती हूँ। कुछ लोगों ने मजाक बनाया कि ये काढ़ा तुम्हें कोरोना से नहीं बचा सकता। ये कोरोना की दवा नहीं। मेरे विचार से यदि आपकी आंतरिक संरचना मजबूत रहेगी तो कोई भी शत्रु आप पर आक्रमण करेगा तो मारा जाएगा। इस काढा के प्रयोग से मैंने अपने घर के लोगों को खांसी से मुक्त करवाया। अतः मैं आदि, हल्दी, गोलमिर्च, ज्वाइन, दालचीनी, लौंग, तुलसी पत्ता और निम्बू से बना काढ़ा नियमित पीती हूँ और घर में सभी को पिलाती हूँ। ज्यादातर रात में मैं इसकी तैयारी कर लेती हूँ और सुबह उठते पहला काम स्वच्छ जल के साथ इसे उबलने को चढ़ा देती हूँ। लगभग दस मिनट उबलने पर एक अच्छी खुशबू आने लगती है। फिर थोड़ा ठंडा कर के छान कर उसका सेवन करती।


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