Simmi Guru

Tragedy

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Tragedy

छलावा

छलावा

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कमल ने अपनी बेटी को बहुत प्यार से पाला था। उन्हें अपनी बिटिया पर बहुत नाज था अकसर कहते मेरी बेटी मेरा नाम रौशन करेगी। बेटी निशा भी अपने माता पिता के प्यार और विश्वास को बरकरार रखते हुए जिन्दगी मे कदम दर कदम आगे बढ़ रही थी। एक दिन पिता ने निशा को बैंक से पैसा निकालने को कहा। जब निशा बैंक से लौटी तो घर का माहौल एकदम से खराब हो गया दरअसल पिता के एकाउंट में एक लाख रुपये कम थे तुरंत पुलिस को खबर हुआ पर कुछ किसी के समझ नहीं आया और मामला खत्म हो गया। जिन्दगी फिर चलने लगी। कुछ दिनों बाद अचानक एक दिन कमल और उनकी पत्नी को परेशान देखकर पड़ोसियों ने पूछा कारण क्या हैं तब उन्होंने बताया कि कल निशा बाजार गई थी बहुत देर तक नहीं आई तो फोन किया पता चला कि उसका अपहरण हो गया है पुलिस को बताया तो समाज में बदनामी नहीं बताया तो पता नहीं बेटी का क्या हाल हो, अभी ये सारी बातें हो रही थी कि निशा का फोन आया कि पापा मैं आ रही हूं रमेश के साथ मैंने शादी कर ली है। कमल के पैरो तले जमीन खिसक गई बेमन से आने का इजाजत दे दी। निशा आईं फिर ससुराल चली गई घर सूना हो गया था ऊपर से पड़ोसियों के ताने अलग।

एक दिन सुबह सुबह निशा घर आ गई आते ही कहा मैं अब ससुराल नहीं जाऊंगी, माता पिता ने कुछ नहीं कहा। फिर पता चला कि वो माँ बनने वाली है सर पिट लिया पिता ने उसपर से रोज रमेश का फोन की मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता आ जाओ पर ये जाने को तैयार नहीं। कमल की हालात अच्छी नहीं थीं चारों ओर से ताने धमकी समझ नहीं आता क्या क्या करुं क्या नहीं। दिन बीतते गए आज निशा ने एक बेटी को जन्म दिया अब रमेश फोन पर मरने की धमकी देता पर निशा पर कोई असर नहीं पड़ता, कहती मुझे ससुराल में बहुत परेशान किया गया है मैं नहीं जाऊंगी। इस तरह दिन गुजर रहे थे कि अचानक से रमेश का फोन आता है कि अगर तुम आज मुझसे मिलने नहीं आई तो मैं अपनी जान दे दूंगा निशा ने कहा दे दो और सचमुच रमेश ने जान दे दी। कमल आज भी कशमकश में है कि वो कहाँ गलत थे जिन्दगी ने किसे छला आज भी उनकी आँखें अपनी समस्या का समाधान ढूंढ रही हैं।



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