STORYMIRROR

बूढ़ा तोता

बूढ़ा तोता

1 min
4.9K


सभी की निगाहें अचानक नीरजा पर टिक गईं। उनका फैसला चौंकाने वाला था। पैंतालिस साल की उम्र में जब बच्चों के बच्चे स्कूल जाने लगे तब वह आगे की पढ़ाई करने की बात कर रही थीं।

बहू के चेहरे पर कुटिल मुस्कान थी। बेटे ने विरोध किया,

"कैसी बातें कर रही हो मम्मी। यह उम्र है पढ़ने की।"

नीरजा को अपनी दादी की बात याद आ गई 'सोलह की हो गई। क्या करेगी पढ़ कर। ब्याह कर दो इसका।'

छोटी उम्र में विवाह हो गया। आगे पढ़ने की इच्छा को मन में दबा कर वह गृहस्ती के कामों में डूब गई। पर दिल में दबी इच्छा मरी नहीं। सोचा था कि जिम्मेदारियां पूरी कर अपनी इच्छा पूरी करेगी। जब बच्चों के दायित्व से मुक्त हुई तो पति की मृत्यु हो गई। बात फिर टल गई। पर अब उसने तय कर लिया था कि वह अपनी इच्छा अवश्य पूरी करेगी। वह किसी पर निर्भर नही थी।

दृढ़ स्वर में नीरजा बोलीं,

"पढ़ने की कोई उम्र नही होती। मेरा फैसला अटल है।"

अपना फैसला सुना कर वह अपने कमरे में चली गईं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Drama