Rekha Joshi

Abstract


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बुजुर्ग माता पिता और बच्चे

बुजुर्ग माता पिता और बच्चे

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बुजुर्ग माता पिता भी आदत से मजबूर है उनके माता पिता ने भी वही किया जो वह अब कर रहें हैं, लेकिन ज़माना बदल गया है, आज के बुजुर्ग माता पिता अपने बड़ों के आगे बोलते नहीं थे, उन्हें भी कई बातें अपने बुजुर्गों की बुरी लगती थी पर वह वक्त ही कुछ ऐसा था न चाहते हुए भी वह उनकी कई बाते मान लिया करते थे, पता नहीं वह उनके आदर सम्मान की वज़ह से करते थे या समाज की वज़ह से, कई बार तो वह अपना मन मसोस कर रह जाते थे l

आजकल जमाना बदल गया है और पीढ़ी दर पीढ़ी ऐसा ही होता है, आज की पीढ़ी अपने माता पिता की कहाँ सुनती है, आजकल बच्चों के पास हर बात का ज़वाब होता है जोकि कई बार अपने बुजुर्ग माता पिता को आहत भी कर देता है, इसलिए बुजुर्गो को भी समझना चाहिए कि बच्चों के मामले में ज्यादा दखलअंदाजी मत करें, वह इसलिए आजकल बच्चे अपनी जिंदगी अपनी ही तरह जीना चाहते हैं, बुजुर्ग माता-पिता जितनी भी टोका टोकी कर लें, बच्चे तो वही करेंगे जो वह करना चाहते हैं क्योंकि वह आर्थिक रूप से अपने बुजुर्गो पर आश्रित नहीं हैं और सम्मान या तो करना आता नहीं या वह अपने माता पिता से अपनी ही तरह का प्यार करते हैं l

इसलिए बड़े बुजुर्गो को भी अपने से मतलब रखना चाहिए अपनी सेहत का ध्यान खुद रखें और बच्चों की भी सुने लेकिन उन्हें उनकी जिंदगी उनके अनुसार ही जीने दें l


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