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Monika Sharma "mann"

Drama

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Monika Sharma "mann"

Drama

बुढ़ापे की सनक

बुढ़ापे की सनक

2 mins
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मेरी सासू बहुत ही ज्यादा पूजा पाठी व करम कांडी महिला थी। 

उनको हमेशा ही इसी बात की सनक थी के कोई उनसे पहले नहा न ले और यदि नहा भी लिया हो तो घर में बना मंदिर वो ही खोलेगी। 

एक दिन रिया रोज की तरह सुबह पांच बजे नहा ली। 

रिया जल्दी से रसोई घर में जाती है और सबके नाश्ते के लिए तैयारियां करने लगती है तभी उसे लगा क्यों ना दो मिनट भगवान के सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो जाए।

घंटी की आवाज सुनते ही सासु माँ तपाक से अपने बिस्तर से कूदी और बोली "अरे ये आज मंदिर किसने खोला है ऐसे ही थोड़ी ना मंदिर खुल जाता है ? भगवान को प्यार से उठाना पड़ता है स्नान कराना पड़ता है। चले आते हैं मंदिर खोलने । रिया डर के मारे चुपचाप रसोई घर में जाकर नाश्ते की तैयारी में लग जाती है।

रिया के ससुर जी उठकर स्वयं व अपनी पत्नी के लिए चाय बनाने लगते हैं मगर आज तो सासू मां से पहले मंदिर खोल दिये जाने से बहुत परेशान थी। जिसका उलाहना उन्होंने सुबह से ही देना शुरू कर दिया था । 

ससुर जी कहते रह गये के चाय तो पी लो। मगर सासू मां इतनी नाराज थी के घुस गई नहाने। जैसे ही नहा कर बाहर आई तो उनका पैर फिसल गया। हाय राम हाय राम करती हुई कहराने लगी । 

रिया दौड़ कर उनकेज् पास गई। उन्होंने उसे इसका दोषी बताया और उसको कहा " तुमने मंदिर खोला था न इसलिए भगवान मुझसे नाराज हो गये और देखो मुझे चोट लग गई। रिया मन ही मन सोच रही थी कि इन बुजुर्गों को कौन समझाए - कि खाली मंदिर खोल देने से भगवान जी गुस्सा नहीं होते। अब सास तो सास होती है उनका गुस्सा होने का कारण भला कौन जान सकता है। 


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