छाँव
छाँव
कई साल से मेट्रो शहर में रहने वाला मोहित, आज अपने गांव आया था। जब से उसे पता चला था कि अम्मा, बाऊजी की तबीयत ठीक नहीं रहती तो इस बार वह सोच कर आया था कि कैसे भी हो इस बार अम्मा को शहर ले जाने के लिए मना ही लेगा।
"देखो अम्मा, मान जाओ अगर तुम मान गयी तो बाऊजी भी मान जायेंगे।"
अरे बबुआ कैसे मान जायें, आज तक तोहार बाऊजी ई गांव छोड़कर कहीं ना गये।
तो क्या हुआ अम्मा, वक्त के साथ बदलना चाहिए।
"अब, ये उम्र में हम पाचन का बदलम।"
"देखो अम्मा, आप लोग हमारे लिए बरगद के छाव जैसे है, इसलिए आप लोग हमारे साथ चले और हमें सेवा का मौका दे।"
"बेटा, बात ते तोहार सही बा लेकिन बरगद के पेड़ जब बुजुर्ग हो जाला ते वो के गांव से कैसे उखाड़ के शहर में लगावल जाला ?"
