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Arya Vijay Saxena

Horror Tragedy Thriller


4.5  

Arya Vijay Saxena

Horror Tragedy Thriller


भयानक पीपल का वृक्ष

भयानक पीपल का वृक्ष

4 mins 346 4 mins 346

आज आपको अपनी जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा बताने जा रहा हूँ, जो कि सत्य घटना पर आधारित है l बात उस समय की है जब मैं आठ साल का था l मैं अपने छोटे बहन भाई के साथ गर्मियों की छुट्टियों मे अपने ननिहाल गया हुआ था l सहारनपुर जिले के एक छोटे से गाँव मे मेरा ननिहाल था।

हम सब भाई बहन दिन भर खूब धमाल करते, खाते पीते l पर जैसे ही शाम होने को आती पूरे गाँव मे एक अजीब सा सन्नाटा छा जाता l हम सभी बहन भाई को शाम के बाद घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं थी l कई बार नाना नानी से पूछने की कोशिश की, पर निराशा ही हाथ लगती l

ज्यादा जोर देने पर मामा ने बताया कि गाँव के बाहर एक शापित पीपल का वृक्ष है जो काफी पुराना है l जिस पर भूत प्रेतों का बसेरा है l कई लोग उनका शिकार होकर या तो पागल हो चुके हैं, या मर गए हैं l ये सुनकर हम सबकी साँसे अटक गई l पूरी रात डर मे बीती, पूरी रात करवटें बदलते हुए बीती l

जब कभी उस पीपल के वृक्ष के बारे में सोचता तो शरीर मे एक सिहरन सी दौड़ जाती l सोचकर कर ही मन मे एक अजीब सा डर पैदा होता था l खैर दिन बीतते गए, छुट्टियां खत्म होने को आई l छुट्टियां खत्म होने मे चार पांच दिन शेष थे l

एक दिन भरी दुपहरी मैं और मेरे मामा का लड़का किसी काम से कुछ सामान लाने के लिए दुकान पर गए l सामान लेकर लौट रहे थे कि एक कुत्ता पीछे लग गया l कुत्ते से बचने के लिए हम दौड़ते दौड़ते उस पीपल वाले मार्ग पर पहुँच गए l जब ये पता चला तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई l

दूर दूर तक कोई इंसान नज़र नहीं आ रहा था l चारो ओर भयानक सन्नाटा छाया था l हम डरते डरते आगे बढ़े, दूर से ही पीपल के उस वृक्ष को देखा l कितना भयानक, घना, और डरावना दिखाई दे रहा था l हिम्मत करके हम किसी तरह आगे बढ़े, चलते चलते ऐसा महसूस हो रहा था कि कोई है जो हमारे पीछे आ रहा है l

हम आगे बढ़ते गए, पीपल के पेड़ के नीचे आकर अचानक मेरे कदम जाम से हो गए l जैसे किसी अंजान शक्ति ने पैरों को बाँध दिया हो l मेरा पूरा शरीर पसीने से तरबतर हो गया था l

चीखने की कोशिश की पर चीख ना सका, घबराकर इधर उधर देखा l

अकस्मात नजर पीपल पर पडी, मकड़ी के काले भयानक जालों से एक घूरती हुई आकृति नज़र आई l उसको एक पल ही देख पाया, दूसरे पल मुझे अपना भी होश नहीं रहा l जब होश आया तो खुद को नानी की गोद मे पाया l शाम के आठ बजे थे l मामा मामी, नाना, माँ,मौसी सब मुझे घेरकर बैठे थे l एक बार तो समझ मे नहीं आया कि क्या हुआ है l

अभी भी वो भयानक चेहरा बार बार मेरी आँखों के सामने आ रहा था l कुछ भी कहने सुनने की स्तिथि मे नहीं था l बार बार सभी पूछ रहे थे कि क्या हुआ था, क्या देखा था l पर मैं कुछ भी बता नहीं पाया था l उस भयानक चेहरे के बारे मे सोचते सोचते कब नींद आ गई पता ही नहीं चला l

अगली सुबह थोड़ा अच्छा महसूस कर रहा था l नाश्ता करने के बाद नाना के पास जाकर बैठ गया l नाना ने पूछा कि कल वहां ऐसा क्या देखा कि तुम बेहोश हो गए थे l ये सुनकर मैं सन्न रह गया l नाना ने बताया कि तुम्हारे मामा के लड़के ने घर आकर बताया कि तुम जमीन पर गिर गए थे l तुम्हारे मामा तभी भागे भागे गए और तुम्हें घर लेकर आए l जब तुम्हें घर लेकर आए तो तुम बेहोश थे, तुम्हें कोई सुध नहीं थी l

शाम को किसी से झाड़ा लगवाया तब जाकर तुम्हें होश आया l उस घटना को लेकर मैं बहुत डर गया था l कुछ दिन के बाद हम भाई बहन, माँ अपने घर आ गए l पर वो घटना सालो मेरे ज़हन मे रही l आज उस घटना को 20 साल हो चुके है, जब भी उसके बारे मे सोचता हूँ तो एक सिहरन सी पूरे शरीर मे दौड़ जाती है l


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