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Dinesh Dubey

Horror Thriller

3  

Dinesh Dubey

Horror Thriller

भूतहा बस

भूतहा बस

5 mins
120

भाग 14 


नलिनी गुस्से से कंडक्टर को देखती है, वह कहती है, " तुम्हारा दिमाग खराब है क्या? अगर हमारा सर नीचे गिर जाता और गाड़ी उसे कुचल देती तो क्या होता।"


कंडक्टर कहता है, " गिरा तो नहीं ना गिर जाता तो बोलती, और इसे सिलवा लो, नहीं तो हवा से भी गिर जायेगा।"


राजेंद्र कहता है, " खुद को भी सम्हाल ले नहीं तो तू भी उड़ जायेगा।"


नलिनी कहती है, " तुझे तो वैसे भी चबा जाने का दिल कर रहा है।"


रोशन कहता है, " सब एक दूसरे को चबा जायेंगे तो बचेगा कौन।"


नलिनी कहती हैं, " हम बचेंगे तो भी बहुत है।"


रोहन कहता है, " बुआ जी, थोड़ी देर के लिए शांत बैठ जाओ, अभी दस कहानियां और सुननी है।"


नलिनी कहती है, " अबे हत्यारे कि औलाद अब तू मुझे आदेश देगा, चल पहले तुझे ही निपटा देती हूं।"


वह भयानक रूप धारण करती है, !!

रोहन हाथ जोड़कर कहता है, "बुआ जी आप तो मुझसे बहुत प्यार करती थी, मुझे बहुत चाहती थी, अब अचानक मेरी दुश्मन क्यों हो गई।"


नलिनी कहती हैं, " मेरा भाई भी बहुत प्यार करता था मुझे पर उसी ने मेरी गर्दन काट दी, तू उसी की औलाद है, तुझे मारकर मैं अपनी दिल की भड़ास पूरी निकालूंगी।"!


रोशन भूत कहता है " अरे इसको मार दोगी तो हम मुक्त नहीं हो पाएंगे।"


कंडक्टर कहता है, " हां बुआ जी।"


नलिनी एक जोरदार थप्पड़ कंडक्टर को मारती है, वह तेज़ी से नीचे गिरकर चार बार ऊपर नीचे उछालता है !!


नलिनी कहती है, " बुआ मैं सिर्फ इस नालायक बच्चे की हूं सबकी नहीं, अब इसके साथ जिसे मरना है आगे आ जाओ।"

रूपम और रुचि आगे आते है,  यह देख नलिनी गुस्से से देखती हैं, !!

रुचि कहती है, " हम मरने के लिए नहीं आए, हम समझाने आए हैं।"


नलिनी अपने भयंकर रूप में ही थी, वह रुचि को भी काट खाने दौड़ती है तो रूपम उसे रोक लेता है और कहता है " देखिए आंटी आप अपने आप को बहुत ताकतवर समझ रही है तो गलत बात है, हम सभी मिल गए तो आपको फिर से बाहर निकाल कर फेंक देंगे, सभी लोग उनके हां में हां मिलाते हैं।"


रोहन मौका देख राजेंद्र से कहता है, " फूफा जी आप ही समझाइए ना बुआ जी को में आप सभी को इस योनि से मुक्त करवा दूंगा।"

नलिनी झूमने लगती है और कहती है, " मैं किसी को नहीं छोडूंगी अगर इस लड़के को बचाने कोई आया।"


राजेंद्र कहता है, " तुम हर बार अपनी ही जिद्द करती हो, इस बार मैं तुम्हारी जिद्द नहीं चलने दूंगा, ये तुम्हारे भाई का बेटा है, पर इसमें इसकी क्या गलती है, ये तो बेचारा छोटा था तब, जो काम तुम्हारे भाई ने किया वही तुम भी कर रही हो, और ये देखो ना हमारी तरह ये भी तो भाग कर शादी करने जा रहे हैं तो ये भी नरेंद्र के दुश्मन ही हैं।"!


नलिनी यह बात सुन थोड़ा शांत होती है, वह कहती हैं," सही कहा मैं भी तो अपने भाई की ही गलती दोहराने जा रही थी, ( रोहन से ) माफ कर दे बच्चे, मैं चुड़ैल हो गई हूं तो थोड़ा गुस्सैल हो गई हूं, पर अब दिमाग ठीक हो गया है, लेकिन भाई को नहीं छोडूंगी।"


रोहन कहता है, "वैसे वह भी बहुत सुधार गए हैं, पर आप को जो करना है करिएगा, पर वह तुम्हें याद कर रोते रहते हैं उन्हें बहुत अफसोस है आपको मारने का।"


नलिनी सोचने लगती है, तभी रूपम कहता है, " भाई अगला कौन है।"


बाबा पूजा करवा रहे हैं, पूजा खत्म होती है, बाबा कहते हैं, " अब सुबह सुबह पूजा शुरू करेंगे, कल ही सारी पूजा समाप्त करेंगे।"


नरेंद्र कहता है, " बाबा जी, बच्चे तो ठीक हैं ना।"


बाबा कहते हैं, " अभी तक तो सभी कुछ ठीक हैं, पर हैं तो खतरों के बीच में ही, जब तक वह बाहर नहीं आ जाते तब तक कुछ कहा नहीं जा सकता हैं।"


रमेश कहता है, " क्या बाबा जी कल से पूजा करवा रहे हैं और अब भी कह रहे हैं की बच्चे अभी भी खतरे में हैं।"


बाबा मुस्करा कर देखते हैं और कहते हैं, " डॉक्टर के पास जाते हो तो दवा लेते समय यह कहते हो की दवा ले जा रहा हूं पर गारंटी के साथ ठीक होना चाहिए, ऑपरेशन के वक्त पेपर साइन करते वक्त कोई कहता है की ये क्यों साइन करवा रहे हो, पर हमारी पूजा पाठ पर शक जरूर करोगे, !!


नरेंद्र कहते हैं, "बाबा जी रमेश भाई ये भूत प्रेत नहीं मानते है, इसलिए ऐसा कह रहे हैं।"


रमेश कहता है, " सही बात है, मैंने तो आजतक कोई भूत प्रेत नहीं देखा है, मुझे तो लगता हैं हम बेकार में यहां पूजा पाठ के चक्कर में फंसे हैं, हमें गांव जा कर देखना चाहिए था।"


बाबा कहते है, " तो तुझे भूत प्रेत देखना है, चल तुझे अभी दिखाता हूं।"


रमेश की वाइफ कहती है, " बाबा जी आप इनकी बातों पर नाराज मत होइए, ये अपने आगे कभी किसी को मानते ही नहीं।"


बना कहते हैं, " कोई बात नहीं आज के बाद ये सब मानने लगेंगे।"


रमेश कहता है " ठीक है मैं भी देखना चाहता हूं, दिखाइए कहां पर है भूत प्रेत।

बाबा जी औरतों को अंदर जाने को कहते है, वहां सिर्फ नरेन्द्र और रमेश ही रहते हैं।


बाबा वहीं बैठ कर पूजा शुरू करते हैं, वह जल छिड़क कर आवाहन शुरू करते हैं, और अक्षत निकाल कर चारों ओर फेंकते हैं, तभी उनके सामने तेज हवा चकती है, और हवा से एक आकृति सी बनने लगती है, यह देख रमेश चौकता हैं, !!


बाबा दुबारा अक्षत फेंकते हैं तो एक प्रेत वहां पर प्रकट होता है और कहता है, "मुझे क्यों बुलाया है ?"


बाबा कहते हैं, " हमारे एक मित्र भूत प्रेत नहीं मानते हैं, उनको भूत प्रेत देखना था बस इसी लिए परेशान किया और कुछ नहीं।"

प्रेत कहता है, " कौन हैं, वो मूर्ख ?


बाबा रमेश से कहते हैं, " देख ले भाई, और अब भी भरोसा ना हो तो तुम्हें जो भी करना ही करके देख लो, दिखा दे प्रेत इन्हें अपने कारनामे, !!


प्रेत अपने रूप को फटाफट बदलने लगता है, वह कभी भेड़िया बनता है, तो कभी कुत्ता बन जाता है, !!


क्रमशः



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